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Advocate ने अपनी शादी पर छपवाया अनोखा कार्ड, नेटिजन्स को पसंद आया आइडिया

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भारत को लोगों के दिमाग हर चीज में आगे हैं. लोग अक्सर सोचते है कि वो कुछ नया, कुछ अलग करें और दूसरों को अचंभित करें. इसी तरह देशभर में जोड़े अक्सर अपनी शादी के कार्ड को अनोखा बनाने के लिए रचनात्मक विचार लेकर आते हैं. ये शादी के कार्ड कभी-कभी लोगों द्वारा सराहे जाते हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो जाते हैं. कभी-कभी इनको केवल नकारात्मक टिप्पणियां भी झेलनी पड़ती हैं. ऐसे ही एक उदाहरण में, गुवाहाटी, असम के एक एडवोकेट (Advocate) ने अपने विशेष दिन के लिए एक संविधान-थीम वाला शादी का कार्ड बनवाया.

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COURTESY: GOOGLE.COM

आपको बता दें कि अद्वितीय शादी के कार्ड में दूल्हन पूजा सरमा और दूल्हे, वकिल अजय सरमा के नाम हैं, जो समानता का प्रतिनिधित्व करने के लिए न्याय के तराजू के दोनों ओर लिखे गए हैं. 28 नवंबर को होने वाली इस शादी ने अपने अनोखे न्योते से खूब सुर्खियां बटोरी हैं.

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दिलचस्प बात यह है कि कार्ड में देश में विवाह से संबंधित कानूनों और अधिकारों का भी उल्लेख है. टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के अनुसार, शादी के कार्ड में लिखा है, “विवाह का अधिकार भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 के तहत जीवन के अधिकार का एक घटक है. इसलिए, इस मौलिक अधिकार का मेरे लिए उपयोग रविवार 28 नवंबर 2021 को करने का समय आ गया है.”

बता दें कि शादी के निमंत्रण में एक वाक्य है जो निश्चित रूप से आपको हसा देगा, “जब वकीलों की शादी होती है, तो वे ‘हां’ नहीं कहते हैं, वे कहते हैं – ‘हम नियम और शर्तों को स्वीकार करते हैं.'” (We accept the terms and conditions)

जानकारी के अनुसार एडवोकेट सरमा अपने दोस्तों के साथ मजाक कर अपनी शादी के लिए एक अनोखा कार्ड बनाना चाहते थे. उन्होंने कहा कि जहां लोग विवाह समारोह के स्थान, समय और तारीख जैसे विवरणों पर ध्यान देते हैं, वहीं कार्ड के नीचे और ऊपर जो लिखा है उसे पढ़ने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है.

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पांच साल से कानून की प्रैक्टिस कर रहे एडवोकेट ने कार्ड डिजाइन करने के लिए एक दोस्त की मदद ली. उसने अपने परिवार को शादी के कार्ड के विचार के बारे में भी नहीं बताया और उन्हें भी कार्ड के बारे में सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ही पता चला.

संविधान पर आधारित यह शादी का कार्ड इंटरनेट पर वायरल हो गया है. कानून की पढ़ाई कर रहे कुछ यूजर्स ने मजाक में कहा कि उन्होंने निमंत्रण पढ़कर आधा सिलेबस खत्म कर दिया. हंसते हुए इमोटिकॉन वाले कुछ लोगों ने लिखा कि एक पुजारी के बजाय एक न्यायाधीश शादी की रस्मों की अध्यक्षता करेगा. दुख की बात बस ये है कि दूल्हा-दुल्हन ने कहा कि शादी के लिए कोई खास थीम नहीं है.

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