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Homeभक्तिप्रायश्चित के लिए किया गया था इस मंदिर का निर्माण, जब गणेशजी ने तोड़ा था देवताओं का घमंड, जानिए वजह!

प्रायश्चित के लिए किया गया था इस मंदिर का निर्माण, जब गणेशजी ने तोड़ा था देवताओं का घमंड, जानिए वजह!

Aithor mandir
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ऐठोर मंदिर (Aithor Ganesh) एक ऐसा मंदिर पुष्पावती नदी के किनारे स्थित है, जहां भक्तों के दुख हरते हैं श्री गणेश और कहलाते हैं पांडव युग के लंबोदर, जिनका इतिहास है अनोखा। आइए जानते हैं ऐठोर मंदिर का रोचक इतिहास! 

गांव की सीमा से गुजरती पुष्पावती नदी के किनारे विराजमान गजानन 

गुजरात के महेसाणा जिले के उंझा तहशील में विघनहर्ता का प्रसिद्ध ऐठोर गणेश मंदिर स्थित है। इस मंदिर के साथ अनेकों दंतकथाएं जुड़ी हुई हैं, मंदिर में स्थापित गणेशजी की मूर्ति पांडव युग की मानी जाती है। प्राचीन गणेश मंदिर पुष्पावती नदी के किनारे ऐठोर गांव में यह मंदिर स्थित है। गांव की सीमा से गुजरती पुष्पावती नदी के किनारे भगवान गजानन विराजमान हैं। मंदिर की विशेष मान्यता है स्थापित गणेश जी की मूर्ति किसी धातु से नहीं बल्कि मिट्टी में से बनी हुई है। मूर्ति को सिंदूर और घी चढ़ाया जाता है। प्राचीन गणेश मंदिर का इतिहास भी उतना ही अनोखा है। मिट्टी से निर्मित बाँई सूंढ वाले गणेश जी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं।

aithor ganesh

Aithor Ganesh, image- Fb 

मिट्टी के उपयोग से किया गया मंदिर का निर्माण 

ऐसा कहा जाता है प्राचीन काल में मंदिर का निर्माण मिट्टी का उपयोग करके  किया गया था। पांडवों के समय-काल से यह मंदिर स्थापित है। मंदिर में गणेश जी, शिवलिंग, माता पार्वती समेत शेषशनाग की भी स्थापना की गई है।

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थात: घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली। प्रभु, हमेशा हमारे सारे कार्य बिना विघ्न के पूर्ण करें॥

क्यों नहीं भेजा गया था गणेश जी को निमंत्रण 

पौराणिक कथा के अनुसार देवी देवताओं ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था, इस कार्यक्रम में सभी देवी देवता अधिक संख्या में जुड़े थे, लेकिन गणेश जी को निमंत्रण नहीं भेजा गया। ऐसा कहा जाता है लंबोदर की टेढ़ी सूंढ के कारण उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया था। जिस कारण से गणेश जी क्रोधित हुए, और देवताओं की बारात उंझा और ऐठोर के मध्य से होकर निकलने वाली थी और रास्ते में कई रथ टूट गए। इस तरह से गणेश जी ने अपना क्रोध देवों पर उतारा।

aithor

 ऐठोर मंदिर, Image FB

सभी ने भगवान कृष्ण को मनाने का संकल्प लिया तो किसी ने पुष्पावती नदी के किनारे मिट्टी के गणेश जी बनाकर पूजा अर्चना शुरू कर दी। इस प्रकार से सभी ने प्रण लिया कि सभी प्रकार के शुभ कार्य का प्रारंभ गणेश जी के स्मरण से ही किया जाएगा। आप भी विघनहर्ता के दर्शन करें और हो जाएं ऐठोर गणेश जी की भक्ति में लीन।  

देखें यह वीडियो: Ganesh Mandir Upleta| Siddhivinayak Temple 

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