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Homeन्यूजMP में महुआ से बनी ‘दारू’ कहलाएगी ‘हेरिटेज शराब’, ऐसी होगी ‘देसी दारू’ वाली नई आबकारी नीति

MP में महुआ से बनी ‘दारू’ कहलाएगी ‘हेरिटेज शराब’, ऐसी होगी ‘देसी दारू’ वाली नई आबकारी नीति

Heritage Liquor
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सरकारें शराब को इतना बढ़ावा देना चाहती हैं कि अब देसी दारू भी हेरिटेज शराब(Heritage Liquor) के नाम पर बेची जाएगी. हेरिटेज का मतलब नहीं समझे तो इसका मतलब है विरासत. अब इस नाम के पीछे और नई आबकारी नीति में लाए जाने वाले प्रावधानों के बारे में समझिए कि असल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान(Shivraj Singh Chauhan) के इस ऐलान का मतलब क्या है.

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बजाया ढोल

दरअसल मध्य प्रदेश के मंडला जिले में पहुंचे सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासी समुदाय के लोगों के साथ न सिर्फ डांस किया बल्कि ढोल भी बजाया. सीएम शिवराज सिंह चौहान ने उसके बाद एक अहम ऐलान किया, जिसके बाद से ये चर्चा हो रही है कि जो देसी दारू कई जगहों पर अवैध घोषित है, उसे मध्य प्रदेश सरकार वैध करने की तैयारी में है.

हेरिटेज शराब के नाम से बिकेगी देसी दारू

शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि एक नई आबकारी नीति आ रही है, महुआ से अगर कोई परंपरागत शराब बनाएगा तो वह अवैध नहीं होगी. उसे दुकानों पर हेरिटेज शराब(Heritage Liquor) के नाम पर बेची जाएगी. हम उसे भी आदिवासियों की कमाई का जरिया बनाएंगे. परंपराओं के निर्वाह के लिए बना सकता है, अगर वह बनाता है तो उसे बेचने का भी अधिकार होगा. सरकार इसके लिए नई आबकारी नीति बनाएगी.

मध्य प्रदेश में जनजातीय गौरव सप्ताह

दरअसल इस ऐलान के पीछे की सियासी वजह भी है. एक अनुमान के मुताबिक मध्य प्रदेश में 20 फीसदी से ज्यादा आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं. हाल के दिनों में केन्द्र सरकार ने 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस(Janjatiya Gaurav Divas) मनाने का ऐलान किया था तो वहीं मध्य प्रदेश में जनजातीय गौरव सप्ताह मनाया जा रहा है, इसी कड़ी में शिवराज सिंह चौहान ने ये ऐलान किया है.

Heritage Liquora

Image Courtesy: Google.com

ये भी पढ़ें: MP में यहां ‘वैक्सीन नहीं तो शराब नहीं की नीति’, ‘दारू’ के लिए दोनों डोज जरूरी

कैसे बनाई जाती है देसी दारू

देसी दारू का जिक्र होते ही महुआ से बनाई जाने वाली शराब(Alcohol Made From Mahua) के साथ-साथ पुलिस की छापेमारी की तस्वीरें भी जेहन में आ जाती हैं. हालांकि छापेमारी वाली बात मध्य प्रदेश में अब बीते दिनों की बात हो जाएगी जब नई आबकारी नीति आ जाएगी. देसी दारू जिससे बनाई जाती है उसे महुआ कहते हैं, उसका पेड़ होता है, जिससे पके हुए महुआ का फल गिरता है. पेड़ से गिरने के बाद इसे पूरी तरह से सुखाया जाता है और फिर पानी में भिगोकर कई दिनों तक रख दिया जाता है, उसके बाद उस बर्तन को जब गरम करते हैं तो उसी से देसी दारू बनती हैं. जिसे लेकर कई बार ऐसे भी मामले सामने आ चुके हैं कि उसे पीने से कई लोगों की मौत हो गई. हालांकि वजह कुछ और बताई जाती है. खासकर आदिवासी समुदाय में देसी दारू का काफी प्रचलन है.

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