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Homeभक्तिगुजरात के कच्छ में विराजमान हैं मां आशापुरा, सभी भक्तों की करती हैं मनोकामनाएं पूर्ण

गुजरात के कच्छ में विराजमान हैं मां आशापुरा, सभी भक्तों की करती हैं मनोकामनाएं पूर्ण

ashapura
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आध्यशक्ति माँ आशापुरा (ashapura devi) गुजरात राज्य के कच्छ में विराजमान है, माँ आशापुरा की महिमा अपरंपार है, माँ अपने नाम के अनुसार अपने भक्तों की आशाओं को पूर्ण करती हैं. माता के मंदिर से अनेको दंतकथाएँ जुड़ी हुई हैं.

पौराणिक कथाओं के अनुसार 2000 वर्ष पहले माँ आशापुरा देवी स्वयंभू प्रकट हुई थी.ऐसा कहा जाता है नारायण सरोवर कोटेश्वर जाते वक्त प्रभु श्री राम ने भी यहाँ विश्राम किया था और माँ आशापुरा की पूजा अर्चना की थी.

माता ने बनिए को सपने बताई थी बात

एक दिन शेठ देवचंद गाँव से गुजर रहे थे, बनिए ने रात जंगल में बिताई. माता आशापुरा ने स्वप्न में दर्शन दिए और जंगल में मूर्ति स्थापित करने को कहा. माता ने चुनरी और श्री फल का संकेत दिया. देवचंद बनिए ने मंदिर का निर्माण करवाया. मंदिर के द्वार को 6 महीनों तक बंद रखा गया. कुछ महीनों पश्चात मंदिर से वाद्ययंत्रों, मंत्रों के उच्चारण की ध्वनि सुनाई देने लगी. देवचंद शेठ ने मंदिर के द्वार खोल दिए, और माँ की अर्धमूर्ति प्रकट हुई, माँ ने बनिए से मनचाहा वरदान माँगने को कहा, बनिए ने अपनी सभी इच्छाएँ व्यक्त की. माता ने सभी आशाएँ पूरी की तभी से माता का मंदिर आशापूरी के नाम से जाना जाने लगा. मंदिर में आज भी माँ की अर्धमूर्ति के दर्शन होते है.

वर्ष 1965 से वर्तमान समय में भी पदयात्रा परंपरा चली आ रही है. हर साल चैत्र नवरात्री में दूर दूर से लोग पगयात्रा कर दर्शन करने आते है. नवरात्रि के दिनों में माँ के दर्शन के लिए दूर- दूर से भक्तों का ताँता बँधा रहता है.

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नवरात्रि महोत्सव दौरान माता के गढ़ पर जाकर दर्शन करने का धार्मिक महत्व है. माँ आशापुरा सम्पूर्ण कच्छ वासियों की कुल देवी मानी जाती है. नवरात्रि के दिनों में श्रद्धालु माँ के रथ को समग्र गाँव में भ्रमण कराते हैँ. माँ के गरबों को बजाते हुए डीजे की ताल में नाचते गाते माँ की ध्वजा को मंदिर के शिखर पर चढ़ाते हैँ.

माँ आशापुरा के दरबार में हर साल मुंबई, गुजरात, राजस्थान समेत अन्य राज्यों से भी लोग दर्शन करने आते है.समग्र देश से आने वाले सभी भक्तों को ठहरने के लिए कच्छ में 400  कैंप लगाए जाते हैं.

पूरे साल लगा रहता है भक्तों का तांता

नवरात्रि के प्रारंभ में के दिनों से ही मंदिर में भजन-कीर्तन, गरबे, आरती की जाती है, मंदिर परिसर जय माँ आशापुरा के नाद से कच्छ शहर गूंज उठता है. मंदिर के द्वार पर पूरे वर्ष भक्तों का तांता लगा रहता है. नौ दिनों तक मां की मूर्ति को अलग अलग स्वरूपों में सुसज्जित किया जाता है.

स्वयंसेवकों द्वारा सभी तरह की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं, ओधवजी राम सेवा समिति द्वारा पिछले 26 सालों से संचालन किया जा रहा है. लगभग 50,000 भक्त माँ के प्रसाद का लाभ लेते है. माँ आशापुरा सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती है.

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