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अंधेरे में आता है शिकार करके चला जाता है, और कहलाता हैः THE MASTER OF SILENT FLIGHT

Barn owl
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एक शिकारी जो आता है और चले जाता है लेकिन किसी को भनक भी नहीं लगती. जो आपके कान के पास से निकलेगा फिर भी आप को पता नहीं लगेगा.  जो उडता है तेज लेकिन आवाज नहीं करता और यह शांत शिकारी है बार्न आउल(Barn owl).

Barn owl with kill

(Barn owl) बार्न आउल निशाचर पक्षी है. जो रात के घुप अंधेरे में शिकार करता है. एक दम तेजी से आता है लेकिन एक आवाज नहीं होती. पंख नहीं फळफळाता.  काफी वैज्ञानिको ने बार्न आउल फी फ्लाईट पर टेस्ट किए. वैज्ञानिको ने  रफ्तार के राजा कहे जाने वाले पेरेग्रिन फाल्कन की उड़ान और बार्न आउल की उड़ान पर काफी संशोधन किए.

जिसमे नतीजा आया की फाल्कन के शरीर के साथ उसके पंख भी बड़े होते और तेजी से उड़ने के लिए बहुत जोर से पंख को फळफळाता है. जिससे जोर-जोर से आवाज होती लेकिन जब बार्न आउल उडता है तब कोई आवाज नहीं होती. इसके पीछे कारण है की बार्न आउल के पंखों का फैलाव ज्यादा होता है. और शरीर का वजन कम होता है. जिससे (Barn owl) बार्न आउल उड़ान में कोई आवाज नहीं होती.

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यह तेज लेकिन शांत शिकारी रण,ग्रासलेन्ड, कोस्टल प्लेन,खाली बिल्डींग, गांव के खेतों एवं पेड़ों पर दिख सकता है. भारत, साउथ-ईस्ट एशिया,  नोर्थ-ईस्ट अफ्रिका,  युरोप तक देखा जा सकता है. आँखे ब्राउनिश-ब्लेक होती है. क्रिम वाईट कलर या वाईटिस पिंक कलर की चोंच होती है.

एक मीडियम साइज का यह आउल होता है. जिसका मुंह दिल के आकार का होता है. लंबे पैर होते है. कान ऊपर पर नहीं होते. आंखे छोटी और काली होती है.  शरीर के ऊपर का भाग यलोइस-ब्राउन होता है. शरीर में छोटे-छोटे धब्बे होते है.

Barn owl with moon

Image – facebook

कुछ उल्लू की प्रजाति दिन में भी एक्टिव होती है. बार्न आउल काफी समय शाम को एक्टिव दिखता है. दिन में अपनी ब़खोल में रुस्टिग करते देखा जा सकता है. (Barn owl) बार्न आउल बखोल में बेठकर पंजे को साफ करते रहते है.

आउल समय समय पर नाहते रहते है. सभी आउल पानी के पास जाकर नाहते है. पानी के पास शिर हिलाकर नाहते है तो साथ में पंख और पर को भी पानी से भीगोते है.  बारिश में भी उल्लू नाहना पसंद करते है. आउल मांसाहारी होते है. बार्न आउल चूहे, छोटे किटक और छोटे स्तनपायी,मछली, छोटे सरीसृप और छोटे पंछी का शिकार करके खाते है. छछूंदर और वोल्स बार्न आउल का प्रिय आहार है.

रात का यह शिकारी. गहरी काली रात में एक उँची जगह या फिर पेड़ पर बैठकर ज़मीन पर होती सभी हरकतों पर नज़र रखते है. नीचे चूहे या छछूंदर की हरकत को देखते है और तेजी से उडान के साथ अपने तीक्ष्ण पंजों से झपट्टा मारके शिकार को पकड़ लेते है. उड़ान में धुप अंधेरे की तरह शांत होती है पता भी नही लगता है और  शिकार हो जाता है. जब बार्न आउल कोई जगह पर बैठकर अपने शिकार को खाता है तब पता चलता है कि हां शिकार हो गया.

जब (Barn owl) बार्न आउल गाते है या कॉल करता है तब रिप्रोडक्शन सायकल चालू हो जाती है. (Male Barn owl) नर बार्न आउल टेरेटरी और पोटेन्शियल नेस्टिग का हक जताते है. फिमेल भी गाती है.  नर और मादा मिल  जाने के बाद फिमेल गाना बंध कर देती है. बाद में कॉल करती है नर और बच्चों को बुलाने के लिए.

जिसकी जोड़ी नहीं बनी होती ऐसे नर या मादा गाते रहते है जब तक कोई पार्टनर नहीं मिलता. जब आउल गाते है तब अपनी चोंच ख़ोलते नहीं है.और जब कॉल करते या फिर रोते है तब चोंच पुरी खुली होती है. जब बार्न आउल उड़ते हुए और घात लगाते हुए चिरररर जैसी आवाज करके कोर्ट शिप के दौरान दूसरे बार्न आउल को आवाज करके भगाते है.

मेटिंग के बाद बार्न आउल 4 से लेकर 7 अंडे देते हैं.  पुरे सफेद रंग के अंडे देते है. बार्न आउल कोई खास घोंसला नहीं बनाते. खाली मकान, पेड़ के होल, नदी के किनारे की बखोल जैसी जगह पर घोसला बनाते है. मादा अंडों को इन्क्युबिट करती है यह समय पर नर मादा को खिलाता हैं.

barn owl with prey

इन्क्युबेशन पहले अंडे से शुरू होता है और 30- 35 दिनों तक चलता है. 8 से 11 दिनों के बाद बच्चों की आंखे खुलती है. तीन हप्ते के बाद बार्न आउल के बच्चें घोंसले के फ्लोर से खाना उठाने लगते है. 5 से 6 हप्ते के बाद चलकर बार्न आउल के बच्चे माता-पिता के पास चलकर आते है और शिकार को निकलते है.

जब खाने की कमी होती है तब छोटे बच्चें मर जाते है या फिर बड़े हुए बच्चे मर जाते है.  44 दिन के बच्चें नेस्ट के आसपास चलते है.  जब 60 दिन के बच्चें हो जाते है तब घोसला छोडे के चले जाते है. जब तक शिकार करना नहीं सिख लेते तब तक माता-पिता ही खाना खिलाते है. एक साल के हो जाने के बाद सेक्सुअल मेटोरीटी आ जाती है. बार्न आउल साल में एक ही बार बच्चें देते है.

यह शांत शिकारी रात को जब आपके घर के आसपास उड़ता तब पता भी नहीं चलता. बरसो लोगों के घरो के आसपास खाली खंडर में रहते है लेकिन लोगों को पता भी नहीं चलता. पता न चलने का कारण है कि यह अकल्पनीय शिकारी रात को निकलता है और दिन में अपने नेस्ट में रुस्टिंग करते है इसलिए बार्न आउल के दर्शन बहुत कम होते है.

तो साथ में यह शिकारी कॉलिंग और सिंगिग करता है जिसे बहुत कम लोग समजते है. इसलिए भी उनका ठिकाना बहुत कम लोगों को पता होता है. उनकी उड़ान जो सबसे शानदार होती है. बिना कोई आवाज़ किए यह पक्षी उड सकता है. जिससे बार्न आउल को ढूंढना बहुत कठिन होता है. 

Barn owl on branch 

आज भारत में यह silent predator खतरे  में है.  और खतरे का कारण है जाडभूक, अंधश्रद्धा के कारण यह पक्षी की संख्या बहुत कम हो गई.  तांत्रिक विधि में यह पक्षी की हड्डियों का इस्तेमाल करते है. जो कि गलत है, जिससे बहुत सारे बार्न आउल को मौत के घाट उतार दिया गया.

तो साथ में भी एक और कारण है की यह पक्षी की हड्डियों से दवाइ बनाई जाती है. जिससे छोटे बच्चों को दम की बीमारी में से राहत मिलती है. इस प्रकार की दवाई के पीछे कोई वैज्ञानिक तत्थ नहीं है और ना ही कोई सत्य है. यह जीव देशभर में अंधश्रद्धा के नाम पर बली चढ रहा है. जिससे अब इनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है.

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देश में इस पक्षी को संकटग्रस्त पक्षी धोषित किया गया है. जिससे इस पक्षी को बचाया जा सके. शांत शिकारी को नामशेष होने से बचाने के जरूरत है. जिससे आने वाली पेढी यह अदभुत पक्षी को देख सके. जिससे इको सिस्टम भी संतुलित रहे. बार्न आउल पक्षी महज 500 ग्राम से भी कम का होता है लेकिन हमारी इको सिस्टम की एक अहम कडी है.

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