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चमत्कारी गायत्री मंत्र का अर्थ और उसके फायदे क्या आप जानते है ?

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गायत्री मंत्र को वेदों में बड़ा ही चमत्कारी और फायदेमंद बताया गया है। वेदों की कुल संख्या चार है। इन चारों वेदों में गायत्री मंत्र का उल्लेख किया गया है। इस मंत्र के ऋषि विश्वामित्र हैं और देवता सविता हैं। माना जाता है कि इस मंत्र में इतनी शक्ति है कि नियमित तीन बार इसका जप करने वाले व्यक्ति के आस-पास नकारात्मक शक्तियां यानी भूत-प्रेत और ऊपरी बाधाएं नहीं फटकती हैं।

गायत्री मंत्र 

ॐ भूर् भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो योनः प्रचोदयात्।

 गायत्री मंत्र का अर्थ

ॐ – ईश्वर , भू: – प्राणस्वरूप , भुव: – दु:खनाशक, स्व: – सुख स्वरूप, तत् – उस , सवितु: – तेजस्वी, वरेण्यं – श्रेष्ठ, भर्ग: – पापनाशक, देवस्य – दिव्य, धीमहि – धारण करे, धियो – बुद्धि ,यो – जो, न: – हमारी , प्रचोदयात् – प्रेरित करे. इसे अगर जोड़कर देखा जाए तो इसका अर्थ होगा- ‘उस, प्राणस्वरूप, दुखनाशक, सुख स्वरुप, तेजस्वी, श्रेष्ठ, पापनाशक, दिव्य परमात्मा (ईश्वर) को हम अपनी अंतरात्मा में धारण करें. जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे.

image : google

 

गायत्री मंत्र जाप का तरीका

मां गायत्री की पूजा के बाद गायत्री मंत्र का जाप करते समय रीढ़ की हड्डी सीढ़ी करके कुश के आसन के आसन पर पालथी मारकर बैठने की मुद्रा में जाप करना चाहिए. गायत्री मंत्र का जाप करने से पहले शरीर की शुद्धि कर लेनी चाहिए. इसके लिए सुबह नहाने धोने के बाद ही जाप करना चाहिए. मंत्रों का जप करते समय उच्चारण का काफी महत्व होता है. इसलिए आहिस्ता आहिस्ता मंत्र का जाप करना चाहिए.अगर आप माला से जाप करना चाहते हैं तो तुलसी के 108 मानकों की माला से भी गायत्री मंत्र का जाप कर सकते हैं.

 गायत्री मंत्र के अर्थ पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि इस मंत्र के जप से कई प्रकार का लाभ मिलता है। यह मंत्र कहता है ‘उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।’ यानी इस मंत्र के जप से बौद्धिक क्षमता और मेधा शक्ति यानी स्मरण की क्षमता बढ़ती है। इससे व्यक्ति का तेज बढ़ता है साथ ही दुःखों से छूटने का रास्ता मिलता है।

गायत्री मंत्र में चौबीस अक्षर हैं। यह चौबीस अक्षर चौबीस शक्तियों-सिद्धियों के प्रतीक हैं। यही कारण है कि ऋषियों ने गायत्री मंत्र को भौतिक जगत में सभी प्रकार की मनोकामना को पूर्ण करने वाला बताया है।

image : google

गायत्री मंत्र जाप के फायदे

आर्थिक मामलों परेशानी आने पर गायत्री मंत्र के साथ श्रीं का संपुट लगाकर जप करने से आर्थिक बाधा दूर होती है। जैसे,

‘श्रीं ॐ भूर्भव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् श्री’

छात्रों के लिए यह मंत्र बहुत ही फायदेमंद है। नियमित 108 बार गायत्री मंत्र का जप करने से बुध्धि प्रखर और किसी भी विषय को लंबे समय तक याद रखने की क्षमता बढ़ जाती है। यह व्यक्ति की बुध्धि और विवेक को निखारने का भी काम करता है।

गायत्री मंत्र के उच्चारण से हम अपने क्रोध को शांत कर सकते है। शरीर की अनेक बिमारियों से भी छुटकारा मिल सकता है। एसा माना गया है कि इसके उच्चारण से रक्त का संचार अच्छे से होता है। अस्थमा के रोगियों के लिये भी इसका जाप बेहद लाभकारी बताया है।

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ज्योतिष की द्रष्टि से देखा जाये तो गायत्री मंत्र विशेषकर सूर्य देव के लिये होता है, इसके उच्चारण से कुंडली मे सूर्य ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और सूर्य मजबूत होने से मान सम्मान बढता है। सरकारी काम जल्दी होते है। इसलिये माना जाता है कि सूर्य को प्रसन्न करने के लिये गायत्री मंत्र का उच्चारण अवश्य करे। कीसी शुभ दिन दूध, घी, और शेहद मिलाकर 1000 बार गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ हवन करें, एसा करने से आंखो का रोग एवं पेट का रोग खत्म हो जायेगा। आंखो की रोशनी अच्छी होती है।

कीसी दंपत्ति को संतान प्राप्ति मे समस्या हो रही है या फिर संतान बिमार रहेता है तो पति-पत्नि को श्वेत रंग के कपडे पहेनकर यौं बीज मंत्र के साथ गायत्री मंत्र का उच्चारण करना चाहिये, एसा करने से संतान प्राप्ति होती है और संतान को रोगो से मुक्ति मिलती है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार, जहां कही वास्तुदोष होता है वहां नकारात्मक उर्जा भी होती है जो हमारे दिमाग पर बूरा असर डालती है। एसे मे रोज गायत्री मंत्र का जाप करने से नकारात्मक उर्जा का प्रभाव खत्म होता है।

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