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HomeकहानियांBhavina Patel: हौसले को सलाम, पहले ही पैरालंपिक में इतिहास रचने वाली महिला की कहानी

Bhavina Patel: हौसले को सलाम, पहले ही पैरालंपिक में इतिहास रचने वाली महिला की कहानी

bhavinaben patel
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टोक्यो पैरालंपिक में भाविनाबेन पटेल (Bhavina Patel) ने इतिहास रच दिया है. भाविनाबेन पटेल आज वो नाम बन चुकी हैं जिन पर देश फक्र महसूस कर रहा है. भाविनाबेन पटेल पैरालंपिक में टेबल टेनिस में गोल्ड जीतने से महज एक कदम की दूरी पर हैं. भाविनाबेन पटेल वो काम करने जा रही हैं जो आजतक ओलंपिक और पैरालंपिक में कोई भी भारतीय महिला नहीं कर सकी है. ऐसे में भाविना के पास ये एक सुनहरा अवसर है. इस सफर को तय करना भाविनाबेन पटेल के लिए उतना आसान ना था.

गुजरात के वडनगर में जन्मीं भाविनाबेन महज 12 महीने की उम्र में पोलियो का शिकार हो गईं थी और इस गंभीर बीमारी को मात देते हुए उन्होंने इस मुकाम को तय किया है. एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली भाविनाबेन जब चौथी कक्षा में थी तभी उनके पिता उन्हें इलाज के लिए विशाखापट्टनम ले गए. भारतीय खेल प्राधिकरण के मुताबिक शुरुआत में पोलियो की गंभीरता की अनदेखी ने उनकी बीमारी को और बदतर बना दिया.

गुजरात यूनिवर्सिटी से किया स्नातक

इसके बाद उन्होंने अपने ही गांव में रहकर 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी की और फिर साल 2004 में उनके पिता ने अहमदाबाद के ब्लाइंड पीपुल्स एसोसिएशन में उनका दाखिला करवा दिया और यहां से उन्होंने तेजलबेन लाखिया की ट्रेनिंग में कंप्यूटर कोर्स किया. लेकिन इसके बाद भी उनकी पढ़ाई का सिलसिला यही नहीं थमा. उन्होंने स्नातक की पढ़ाई गुजरात यूनिवर्सिटी से पत्राचार में पूरी की. गुजरात यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने के बाद भाविनाबेन पटेल का खेलों की तरफ रुझान बढ़ने लगा.

यहां उन्हें पता चला कि उनके संगठन में स्पोर्ट्स एक्टिविटीज भी होती हैं तो उन्होंने कोच ललन दोषी की देखरेख में फिटनेस ट्रेनिंग से शुरुआत की और इसके बाद टेबल टेनिस की तरफ भाविनाबेन का जुनून बढ़ने लगा और फिर आया साल 2007 जब भाविनाबेन अपने सफलता के शिखर की पहली सीढ़ी चढ़ी और बेंगलुरु के पैरा टेबल टेनिस में अपना पहला गोल्ड मेडल जीता. नेशनल लेवल पर गोल्ड जीतने के बाद भाविनाबेन पटेल ने इंटरनेशनल लेवल की तरफ रुख किया और अपने करियर की शुरुआत जॉर्डन से की.

ये भी पढ़ें: पैरालंपिक टेबल टेनिस सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनीं भाविना पटेल

उन्होंने साल 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लिया लेकिन दुर्भाग्यवश वे क्वार्टर फाइनल में हार गईं. थाइलैंड ओपन में उन्होंने पहला अंतरराष्ट्रीय सिल्वर मेडल जीता और इसके बाद 2013 में पहली बार एशियाई क्षेत्रीय चैंपियनशिप में भी सिल्वर मेडल जीता. भाविनाबेन पटेल की कामयाबी का सफर यहीं नहीं रुका और इसके बाद उन्होंने अपना हाथ डबल्स में आजमाया. इसके लिए उन्होंने सोनलबेन पटेल के साथ अपनी जोड़ी बनाई. 2019 में बैंकॉक में सिंगल्स के साथ डबल्स में भी उन्होंने गोल्ड जीता.

2018 में भी एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने मेडल अपने नाम किया. 2020 में टोक्यो पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली वे पहली भारतीय महिला बनीं.  ऐसे में भाविनाबेन पैरालंपिक में गोल्ड जीतने से महज एक कदम दूर हैं. सेमिफाइनल में  फाइनल में उनका मुकाबला चीन झोउ यिंग से होगा. 29 अगस्त की सुबह 7.15 पर भाविनाबेन पटेल इस फाइनल मुकाबले के लिए मैदान में उतरेंगी.

 

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