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भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणी जी द्वारा की गई थी इस मंदिर की स्थापना!

Bhootnath mandir
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BHOOTNATH MAHADEV: भूतनाथ मंदिर सावरकुंडला ज़िले की सरहद पर शैल नदी के किनारे बसा हुआ है। भूतनाथ मंदिर सावरकुंडला से 12 किलोमीटर और नेसदी गांव से 2 KM दूर स्थित है। मंदिर की चौखट तक पहुंचने के लिए कच्चे रास्ते का सहारा लिया जाता है। भोलेनाथ के द्वार पर जाते वक्त रास्ते में कई मनमोहक नज़ारे और पशु-पक्षी देखने को मिलते हैं। भूतनाथ मंदिर एक ऐसा शिवालय है, जिसकी स्थापना श्री कृष्ण और रुक्मणी जी के हाथों की गई थी। 

छठी शताब्दी में बसा था अमरेली शहर:- 

गुजरात का एक पौराणिक शहर स्थित है अमरेली। यह शहर अपनी भव्य विरासत और प्रसिद्ध मंदिरों के लिए प्रख्यात है। छठी शताब्दी में बसा शहर एक वक़्त में महाराष्ट्र में मौजूद था। मध्यकालीन से आज तक यह शहर अधिक प्रसिद्ध है। कई प्रख्यात लेखक और कवियों ने इस पवित्र स्थान पर जन्म लिया है। प्रख्यात मंदिरों और प्राचीन विरासत की वजह से अमरेली शहर विख्यात है। 

देखें यह वीडियो : भूतनाथ मंदिर का रहस्य ‘

भारत देश किसी भी स्थान के ऐतिहासिक मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों के बिना अधूरा है। अमरेली का पौराणिक इतिहास के अलावा उस युग के दौरान प्रचलित संस्कृति, परंपराओं और जीवन शैली के बारे में कई विरासत आज भी मौजूद है। 

इस स्थान का रोचक इतिहास यहां के मंदिरों और शिल्पकलाओं से पता चलता है। अमरेली में 100 से अधिक मंदिर हैं जिनमें  त्रिमंदिर, नागनाथ, स्वामीनारायण मंदिर, सिद्धिविनायक मंदिर और गुरु दत्त मंदिर सबसे ज़्यादा प्रख्यात है।  

यहां पढ़ें: शिवालय के गर्भगृह में गुंबद पर की गई आकर्षित चित्रकारी है आकर्षण का केंद्र!

भगवान कृष्ण और रुक्मणी जी द्वारा की गई मंदिर की स्थापना:- 

इन्हीं मंदिरों में से एक मंदिर मौजूद है, जिसे भूतनाथ मंदिर (Bhutnath Mahadev) के नाम से जाना जाता है। शिवालय सावरकुंडला ज़िले की सरहद पर शैल नदी के किनारे बसा है। कथाओं के अनुसार, जब श्री कृष्ण रुक्मणीजी का हरण कर भरूच से पसार हो रहे थे, तभी उन्होंने जंगल में रुककर विश्राम किया। जैसे ही आसपास के गांव वालों को पता चला के स्वयं श्री कृष्ण और रुक्मणी जी यहां आए हैं, तो सभी जंगल में एकत्रित हो गए और कान्हा जी से प्रार्थना करते हुए कहा कि “भगवान हम सभी गांव वाले इस जंगल में भूत- प्रेत से बहुत परेशान रहते हैं और यहां से आने जाने वाले हमेशा भयभीत रहते हैं, तो कृपया हमारी सहायता करें “।

उसी क्षण श्री कृष्ण ने उनकी परेशानी सुनते हुए पत्नी के साथ मिलकर भूतनाथ मंदिर की स्थापना की। यह वरदान दिया कि कोई भी व्यक्ति यहां आकार श्रद्धा भावना से प्रार्थना करेगा, उसे कभी कोई डर नहीं लगेगा। तब से भोलेनाथ सबकी रक्षा करते आ रहे हैं। 

500 सालों से मंदिर की देखभाल एक अखाड़े के द्वारा की जा रही है:- (Bhootnath Mahadev)

लगभग 500 सालों से इस मंदिर की देखभाल उदासीन अखाड़ा कर रहा है। उदासीन अखाड़ा के भगवान श्री चंद्र जी यहां आए थे। उन्होंने अपना जीवन इसी मंदिर की देखभाल में व्यतीत कर दिया था। मान्यताएं ये भी है कि श्री चंद्र जी स्वयं भोलेनाथ का ही एक स्वरूप थे। उस वक्त से लेकर आज तक ये मंदिर उदासीन पंथ के अधिकृत है। इसलिए भूतनाथ मंदिर की देखरेख आज भी उदासीन अखाड़े द्वारा की जा रही है। 

मंदिर की आभा इतनी पवित्र है कि प्रवेश करते ही मंत्रमुग्ध हो जाएंगे, पवित्र स्थान पर पहुंचते ही भक्तजन शांति की अनुभूति करते है। देश विदेश से कई श्रद्धालु यहां आकार पूरी श्रद्धा से पूजा पाठ करते हैं। मंदिर के भीतर एक बेहद सुन्दर शिवलिंग विराजित है। मंदिर में माता पार्वती, हनुमान जी, गणपति जी और भगवान श्री चंद्र जी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। 

मंदिर के आस-पास के गांव और शहर के श्रद्धालु भूतनाथ मंदिर में आकर अपनी सभी मनोकामना पूरी करते हैं। 

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