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Homeनेचर एंड वाइल्ड लाइफक्यों कम हो रहे हैं शिकारी पक्षी, घर का कौन सा जहर मार रहा है पक्षियों को

क्यों कम हो रहे हैं शिकारी पक्षी, घर का कौन सा जहर मार रहा है पक्षियों को

Bird of prey
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दुनिया में लोगों को लगता है पक्षियों की आबादी बढ़ रही हैं. काफी  जगहों पर से पक्षियों के लिए अच्छी खबर भी मिल रही है. गिद्ध और बाज जैसे (Bird of prey) शिकारी पक्षी संकट से जूझ रहे हैं. एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि दुनियाभर में शिकारी बाज, चील और गिद्धों की आबादी तेजी से घट रही है.

Bird of prey

इंटरनेशनल यूनियन फॉर द कंजरवेशन ऑफ नेचर और बर्डलाइफ इंटरनेशनल के एक विश्लेषण में पता चला है कि (Bird of prey) शिकारी पक्षियों की 557 प्रजातियों में से 30 प्रतिशत खतरे में हैं.18 प्रजातियां ऐसी हैं जो बहुत ज्यादा खतरे में हैं. इनमें फिलीपाइन ईगल और annobon scops owl जैसे पक्षी शामिल हैं.

क्यो कम हो रहे है पक्षी

ऐसी कई प्रजातियां हैं जो स्थानीय स्तर पर विलुप्त हो रही हैं यानी उन जगहों के पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी कोई भूमिका नहीं रह गई है. तेजी से पक्षियों के आवास नष्ट हो रहे है. यह पक्षियों के कम होने का मुख्य कारण है.

एक शोधकर्ता के मुताबिक सुनहरा बाज मेक्सिको का राष्ट्रीय पक्षी है. लेकिन मेक्सिकों में अब  बहुत कम सुनहरे बाज बचे हैं. 2016 में हुई गणना का अनुमान था कि मेक्सिको में 100 से भी कम ऐसे जोड़े बचे हैं जो नए बच्चे पैदा कर सकें. कभी ये बाज दक्षिणी मेक्सिको के अलावा मध्य और दक्षिण अमेरिका में भी दूर-दूर तक पाए जाते थे. लेकिन पेड़ों की कटाई के चलते इनकी आबादी में भारी कमी देखी गई है.

कई तरह के खतरे

जिन-जिन प्रजातियों पर विलुप्ति का खतरा मंडरा रहा है वो आमतौर पर दिन में सक्रिय रहनेवाले पक्षी हैं. खोज के मुताबिक उनकी आबादी 54 प्रतिशत कम हुई है.रात में एक्टिव रहनेवाले (Bird of prey) शिकार पक्षियों जैसे कि उल्लू. रात के शिकारी पक्षियों की आबादी 47 फीसदी कम हो गई हैं.

Bird of prey

नॉर्थ टेक्सस यूनिवर्सिटी के जीव विज्ञानी के मुताबिक पक्षियों की आबादी को प्रभावित कर रहे कारणों को दूर नहीं किया गया है और फौरन इस तरफ ध्यान नहीं दिया तो सारे शिकार पक्षी विलुप्त हो सकते हैं. दूसरे एक पक्षी विज्ञानी के मुताबिक दुनियाभर में ये पक्षी अपने प्राकृतिक आवास के कम होने के संकट से जूझ रहे हैं.

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ऐंडियन गिद्ध की आबादी कीटनाशकों, लेड और अन्य जहरीले रसायनों के कारण घट रही है. दक्षिण एशिया में भी रसायनों के बढ़ते इस्तेमाल ने शिकारी पक्षियों की आबादी को प्रभावित किया है. कुछ पक्षियों की संख्या तो 95 प्रतिशत तक कम हो गई है. DDT जैसी हानिकारक चीजों से  शिकारी पक्षियों की आबादी लगादार घट रही हैं. DDT से पक्षियों के अंंड़ो पर खतरनाक प्रभाव पड़ता है. इस जहर के प्रभाव से पक्षियों के अंड़ो से बच्चे नहीं निकलते. इस तरह पक्षियों की आबादी कम हो रही है.

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