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शौर्य, वीरता और पराक्रम यानी बीएसएफ!

Indian Armed Forces
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जीवन पर्यन्त कर्तव्य – सीमा सुरक्षा बल

जहां शौर्य, वीरता और पराक्रम की बात आती है, वहां बीएसएफ की बात पहले आती है। बीएसएफ यानी कि बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स, जो 0 से 50 डिग्री टेंपरेचर में भी अपनी मातृभूमि की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। बीएसएफ के जवान हमेशा बार्डर पर तैनात रहते हैं, ताकि हमारे देश में घुसने के सपने देखने वालों के बॉर्डर पर ही छक्के छुड़ा सकें। तपते रेगिस्तान की भयानक गर्मी में भी जिनके पैर नहीं डगमगाते, 0 डिग्री टेंपरेचर में भी जो चट्टान की तरह खड़े रहते हैं, वह हमारे बीएसएफ के जवान है। बीएसएफ भारत का अर्धसैनिक और विश्व का सबसे बड़ा सीमा रक्षक बल है, जिसका गठन 1 दिसंबर 1965 में हुआ था. श्री केएफ रूस्तमजी इसके पहले प्रमुख और संस्थापक थे. वर्तमान में श्री राकेश अस्थाना सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक हैं। बीएसएफ का मुख्य कार्य शांति के समय सीमा पर निगरानी रखने का है. इस समय बीएसएफ की 188 बटालियन है और यह 6,385 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा करती है. जो कि पवित्र, दुर्गम रेगिस्तानों, नदी-घाटियों और हिमाच्छादित प्रदेशों तक फैली है.

Border Security Force

Image Credit: Indian Army Website

कई सुरक्षा कामों को अंजाम तक पहुंचाती है बीएसएफ

सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बीएसएफ को दी है। इसके अलावा तस्करी, घुसपैठ और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकने की जवाबदारी भी बीएसएफ की है। इसके अलावा भी बीएसएफ कई सुरक्षा कामों को अंजाम तक पहुंचाती है, जिसमें चुनाव में शांति व्यवस्था बनाए रखना, वीवीआईपी को सुरक्षा प्रदान करना, सीमावर्ती गांवों के लोगों की सुरक्षा करना और उनको व्यवस्था उपलब्ध कराना शामिल है. पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी भारत की सीमा पर बीएसएफ हमेशा चौकसी करती है. वहीं अब बीएसएफ को विद्रोह रोधी और आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी के लिए भी तैनात किया जाने लगा है. नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाने में भी बीएसएफ अपनी अहम भूमिका निभाती है.

देखिए ये विडियो: https://ottindia.tv/watch/border-security-force-69643d353638

युद्ध क्षेत्रों में भी डटी रहती है बीएसएफ

बात की जाए युद्ध के दौरान बीएसएफ के कार्य की तो युद्ध की स्थिति में बीएसएफ कम खतरे वाले क्षेत्रों में डटे रहती है, जब तक कि हमला एक विशेष क्षेत्र में नहीं होता. जब यह जरूरत महसूस होती है कि स्थानीय स्थिति से निपटने के लिए सीमा सुरक्षा बल सक्षम है, तो बीएसएफ को हालात पर काबू पाने के लिए भेजा जाता है. वहीं सेना को युद्ध के दौरान आक्रामक से छूट प्रदान करने के लिए भी बीएसएफ को तैनात किया जाता है. जब किसी बड़े हमले का अंदेशा होता है और यह प्रतीत होता है कि बीएसएफ इस हमले से निपटने में सक्षम नहीं हैं, तो बीएसएफ को तोपखाने सहित अन्य सहायता देकर मजबूत किया जाता है.

Indian Army

Image Credit: Indian Army Website

कोई भी जिम्मेदारी, किसी भी समय, कहीं भी…

अब आपके मन में एक सवाल आ रहा होगा कि बीएसएफ की जरूरत क्यों पड़ी. तो आपको बता दें कि 1965 तक पाकिस्तान के साथ भारत की सीमाओं की सुरक्षा राज्य सशस्त्र पुलिस बटालियन द्वारा की जाती थी. जिसे 28 दिसंबर 1949 के बाद से सीआरपीएफ के नाम से जाना जाता है. पाकिस्तान ने कच्छ में 09 अप्रैल 1965 को सरदार पोस्ट, चाहर बेट और बेरिया बेट पर हमला कर दिया. इस हमले के बाद एक विशेष सीमा सुरक्षा बल की जरूरत महसूस हुई, जो पाकिस्तान सीमा के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी करेगा. 54 साल के इतिहास में बीएसएफ एक विशिष्ट बल के रूप में उभरा है, जिसने 1971 और कारगिल युद्ध में उत्कृष्ट भूमिका निभाई है. बीएसएफ का लक्ष्य है “कोई भी जिम्मेदारी, किसी भी समय, कहीं भी”. इस बल के अधिकारियों और जवानों ने इसके आदर्श वाक्य “जीवन पर्यन्त कत्र्तव्य” पर खरा उतरने के लिए अपना खून और पसीना बहाया है.

Indian Army War operations

Image Credit: Indian Army Website

युद्धकाल में बढ़ जाती है बीएसएफ की भूमिका

बीएसएफ के जवान हमेशा सक्रिय रहते हैं, चाहे युद्ध का समय हो या फिर शांति का समय. शांति के समय में इसकी मुख्य जिम्मेदारी हमारी सीमाओं की रक्षा, सीमा पार से होने वाले अपराधों और किसी अवैध गतिविधि को रोकना होता है. घुसपैठ को रोकने और सीमा पार से खुफिया सूचना जुटाना की जिम्मेदारी को भी यह सक्षम तरीके से अंजाम देता है. युद्धकाल में उनकी भूमिका और बढ़ जाती है। जहां कहीं भी सैनिकों की जरूरत पड़ती है, उनको भेजा जाता है।

 

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