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Homeकहानियांपरमवीर शेरशाह की कहानी: कारगिल युद्ध का वो हीरो जिसने लिखी वीरता की गाथा

परमवीर शेरशाह की कहानी: कारगिल युद्ध का वो हीरो जिसने लिखी वीरता की गाथा

Captain Vikram Batra
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भारत माता का वो वीर सपूत जिसने कारगील युद्ध में दुश्मनों को धूल चटाई थी, आज उस वीर सपूत की जयंती है. भले ही कारगिल युद्ध को 20 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी इस युद्ध के हीरो की वीरता की कहानियां हमारी रगों में जोश भर देती हैं और उन्हीं हीरोज में से एक थे कैप्टन विक्रम बत्रा (Captain Vikram Batra) जो शेरशाह के नाम से भी जाने जाते हैं.

हिमाचल प्रदेश के पालमपुर की खूबसूरत वादियों में 9 सितंबर 1974 को जी.एल. बत्रा और कमलकांता बत्रा के घर एक बहादूर बच्चे का जन्म हुआ जिनका नाम रखा गया विक्रम. विक्रम बत्रा बचपन से ही निडर और जिंदादिल रहे. उनका बचपन भी सेना के जवानों के बीत गुजरा. विक्रम बत्रा ने अपनी स्कूल की पढ़ाई पालमपुर में की और सेना छावनी का इलाका होने के नाते उनका लगाव सेना के प्रति भी बढ़ता गया. स्कूल की पढ़ाई खत्म करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए वे चंडीगढ़ रवाना हो गए.

जहां उन्होंने अंग्रेजी में एमए के लिए दाखिला लिया और विक्रम बत्रा सेना में शामिल हुए. वहीं 1999 में करगिल युद्ध शुरू हो गया था. उस वक्त विक्रम सेना की जम्मू-कश्मीर राइफल्स में तैनात थे. जिसके बाद विक्रम बत्रा के नेतृत्व में टुकड़ी ने हम्प व राकी नाब जगहों को जीता और जिसके बाद उन्हें कैप्टन बना दिया गया.

 

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शेरशाह विक्रम बत्रा की वीरगाथा

  • विक्रम बत्रा ने इंडियन मिलिटरी अकादमी में 1996 में दाखिला लिया.
  • कैप्टन बत्रा जम्मू और कश्मीर राइफल्स की 13वीं बटालियन में 6 दिसंबर 1997 को लेफ्टिनेंट के तौर पर शामिल हो गए.
  • कारगिल युद्ध के दौरान विक्रम बत्रा ने जम्मू-कश्मीर राइफल्स की 13वीं बटालियन का नेतृत्व किया.
  • कैप्टन बत्रा ने 20 जून 1999 को कारगिल की प्वाइंट 5140 चोटी से दुश्मनों को खदेड़ने के लिए एक अभियान छेड़ा.
  • कई घंटों की जंग के बाद मिशन जब कामयाब हुआ तो उन्होंने जीत का एक कोड कहा, कहा ये दिल मांगे मोर.
  • 5140 चोटी को कब्जे में लेने का ऑर्डर मिला तो विक्रम अपने पांच साथियों को लेकर निकल पड़े.
  • 4875 प्वांइट पर कब्जे के दौरान बत्रा ने बहादुरी दिखाई और परमवीर विक्रम बत्रा ने सैनिक को यह कहकर पीछे कर दिया कि ‘तू बाल-बच्चेदार है, पीछे हट जा.’
  • खुद आगे बढ़कर बत्रा ने दुश्मनों की गोलियां खाईं और देश की रक्षा करते हुए देश पर कुर्बान हो गए.
  • इसके दूसरे दिन ही चोटी 5140 में भारतीय झंडे के साथ विक्रम बत्रा और उनकी टीम का फोटो मीडिया में आ गई
  • वहीं ऐसे साहस और पराक्रम के लिए कैप्टन विक्रम बत्रा को 15 अगस्त 1999 में भारत सरकार ने परमवीर चक्र से सम्मानित किया.

 

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