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भावनगर के इस मंदिर में है खंडित त्रिशूल का अधिक महत्व, जानिए क्या है रहस्य?

chamunda mandir
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Chamunda Temple: ऐसा एक राज्य है जहां मां समुद्र के तट पर रहकर सबकी रक्षा करती हैं। विश्व विख्यात मां चामुंडा मंदिर भावनगर जिले में समुद्र किनारे स्थित है।तीनों लोक में विराजित आध्यशक्ति मां चामुंडा माता का पौराणिक मंदिर गुजरात में स्थित है। भावनगर जिले के ऊंचा कोटड़ा में मां साक्षात मौजूद हैं। 

ऊंचाई पर स्थति चामुंडा मंदिर से कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं, जगत जननी के चमत्कार विश्व विख्यात है। प्रचीन मंदिर में नतमस्तक करने समग्र विश्व से भक्त दर्शन करने आते हैं। माता की मुखाकृति के दर्शन कर सभी भक्तों को धन्यता की अनुभूति होती है। मंदिर के गुंबद को लाल रंग की ध्वजाओं से सुसज्जित किया गया है। माता के मंदिर में ध्वजा हमेंशा लहराती रहती है। 

मां चामुंडा मंदिर में खंडित त्रिशूल का अधिक महत्व है:-

मंदिर में स्थापित खंडित त्रिशूल का अधिक महत्व है। मां चामुंडा की मूर्ति के समीप खंडित त्रिशूल से एक लोककथा जुड़ी है, त्रिशूल से माता ने असुरों का वध किया था, उस दौरान त्रिशूल खंडित हुआ। तभी से रक्षा शस्त्र के समान त्रिशूल की भी पूजा की जाती है।  

आने वाले सभी भक्त मान्यता पूरी होने पर मां को त्रिशूल की भेंट चढ़ाते हैं, श्रद्धालु मां के चरणों में नतमस्तक होकर त्रिशूल की पूजा करते हैं। मां चामुंडा यहाँ स्वयं प्रकट हुय थे, मंदिर का पुन:निर्माण करके, पुरातन मंदिर के निकट बड़े से भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर में माता के मुखआकृति समान मूर्ति स्थापित है भक्तजन तेजस्वी मुखआकृति को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। भक्तों की मान्यता है खंडित त्रिशूल 15 दिन चोटिला पर्वत पर शस्त्र समान और शेष 15 दिन ऊंचा कोटड़ा मां चामुंडा के समीप रहता।

भील समुदायों द्वारा कुलदेवी के रूप में मां चामुंडा की पूजा-अर्चना की जाती है। नवनिर्माण भव्यमंदिर में भील समुदाय ने आध्यशक्ति की नई मूर्ति को चांदी के सिंहासन पर स्थापित किया है। ऐसा प्रतीत होता है मानो सिंहासन पर विराजमान मां चामुंडा मंदिर की शोभा को और भी बढ़ा रही हैं। 

शक्ति स्वरुपा मां चामुंडा अपने भक्त कालिया भील को बचाकर ऊंचा कोटड़ा,

एक लोककथा यह भी है कि शक्ति स्वरुपा मां चामुंडा अपने भक्त कालिया भील को बचाकर ऊंचा कोटड़ा लाई थी। (Chamunda Temple) कालिया भील दुश्मनों के जहाजों लुटता रहता था। समुद्र किनारे खजानों को लुटकर को टेकरी पर छिपा दिया करता था। टेकरी पर स्थित कोठियां आज भी मौजूद हैं। 

यहां पढ़ें: गोहीलवाण की चारों दिशाओं में मां भवानी हैं विराजमान, जानिए पौराणिक गाथा!

दुर्गा स्वरुपा मां चामुंडा का वाहन शेर है, मंदिर में शेर की आकर्षित मूर्ति स्थापित की गई है। मां की चौखट पर आने वाले श्रद्धालुओं को बिना प्रसाद लिए जाने की अनुमति नहीं है। मंदिर द्वारा भक्तजनों को अन्नक्षेत्र से भोजन की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। ट्रस्ट की ओर से भोजन के साथ, भक्तों को ठहरने की व्यवस्था भी करवाई गई है।

बजरंगदास बापू हर पूनम शक्ति स्वरुपा मां चामुंडा के दर्शन करने आया करते थे। चैत्र महीने की पूनम के दिन मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मान्यताएं है जिन दंपतियों को संतान नहीं है, मां से मन्नत मांगते ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। मां के मंदिर के रहस्य जानने के लिए देखें यह वीडियो। 

देखें यह वीडियो: जानिए क्यों है इस मंदिर में खंडित त्रिशूल का अधिक महत्व 

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