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Homeभक्तिसाल 2022 की पहली विनायक चतुर्थी को लेकर न हों कंफ्यूज, जानें व्रत की तारीख और पूजा विधि

साल 2022 की पहली विनायक चतुर्थी को लेकर न हों कंफ्यूज, जानें व्रत की तारीख और पूजा विधि

chaturthi 2022
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सुमुखश्च एकदंतश्च कपिलोगजकर्णक:

लंबोदरश्च विकटो, विघ्ननाशो विनायक:

धूम्रकेतु गणाध्यक्षो, भालचंद्रो गजानन:

द्वादैशातनि नामानि य पठेशु: श्रृणुयादपि

विद्यारंभे, विवाहे च, प्रवेशे निर्गमे तथा

संग्रामे, संकटे चैव विघ्नस्तस्या न जायते

Vinayaka Chaturthi 2022: भगवान गणेश(Lord Ganesha) को समर्पित इस मंत्र में उनके 12 नामों (सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्ननाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र और गजानन) का उल्लेख हैं. चतुर्थी(Chaturthi) तिथि और बुधवार को इस मंत्र के पढ़ने से मनुष्य की हर तरह की मनोकामना पूरी होती है.

चतुर्थी तिथि को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति 

हर साल कई व्रत-त्यौहार(Festival) ऐसे होते हैं, जिन्हें लेकर कंफ्यूजन(Confusion) की स्थिति बनी रहती है. इस बार साल के शुरुआत में ही विनायक चतुर्थी(Vinayak Chaturthi 2022) को लेकर लोगों के मन में कंफ्यूजन की स्थिति पैदा हो गई है. कंफ्यूजन इसलिए क्योंकि चतुर्थी तिथि दोनों दिन है. ऐसे में ये जानना बेहद जरूरी कि किस दिन आप व्रत और पूजन करें कि आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो और भगवान गणेश(Lord Ganesha) का आशीर्वाद आपके ऊपर बना रहे.

chaturthi 2022

Image Courtesy: Google.com

ये है चतुर्थी व्रत का सही समय 

दरअसल हिंदू पंचांग के मुताबिक हर महीने दो चतुर्थी होती है. कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी(Sankashti Chaturthi) जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है. इस साल 5 जनवरी को दोपहर 2 बजकर 34 मिनट से चतुर्थी तिथि की शुरुआत हो रही है, जो रात 12 बजकर 39 मिनट पर खत्म होगा. मतलब ये कि दोपहर के बाद से चतुर्थी तिथि की शुरुआत हो रही है.

पूजा में इन बातों का रखें विशेष ध्यान 

आम तौर पर पंचांग के मुताबिक जब किसी विशेष तिथि की शुरुआत दोपहर के बाद हो तो उसके अगले दिन व्रत मनाया जाता है. मतलब इस बार पौष माह(Paush Month) की शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली विनायक चतुर्थी का व्रत 6 जनवरी 2022 को रखा जाएगा. हालांकि तारीख को लेकर कंफ्यूजन दूर होने के बाद ये भी जानना जरूरी है कि आखिर पूजा-अर्चना कैसे करें.

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व्रत वाले दिन सुबह उठकर स्नानादि से निवृत होकर भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करें. उपरोक्त मंत्र का जाप करें. संभव हो तो फल का सेवन करें, सेंधा नमक वाले खान-पान का सेवन बिल्कुल न करें. साथ ही इस बात विशेष ख्याल रखें कि चांद निकलने से पहले भगवान गणेश पूजा(Ganesh Puja) करें. भगवान गणेश की पूजा से जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.     

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