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कौन सा प्राणी माना जाता है रनिंग मशीन?

Cheetah: The Running Machine
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रफ्तार क्या होती है ? दौड़ना क्या होता है ? जानना है तो प्रकृति के सबसे जानदार दौड़ने वाले जीव से पूछिए. कैसे हर एक दौड जान पर खेलकर दौड़ी जाती है. और यह दौड़ने वाला जीव है, चीता. रफ्तार ही चीता की पहचान है. जो प्राकृतिक दौड़ने की मशीन हैं. चीता जमीन पर विश्व का सबसे तेज और स्फूर्तिला जीव हैं. जो एक 110 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ता है. सिर्फ तीन सेकंड में अपनी टोप स्पीड पर पहुंच जाता हैं. जो इंसान की बनाई हुई स्पोर्ट्स कार्स से बेहतर हैं.

कैसे चीता यह रफ्तार पा लेता है? चीता की यह दौड़ने की क्षमता उसके स्नायु से मिलती है. चीता के मसल्स फाइबर बहुत तेजी से प्रतिक्रिया करते है. जो अद्भुत ऊर्जा प्रदान करते है. अगर विश्व के सबसे बेहतरीन दौड़वीर उसेन बोल्ट के साथ चीता की दौड़ करवाये तो चीता 100 मीटर की दौड़ 5.8 सेकंड में खत्म कर देगा. जबकि बोल्ट का रिकॉर्ड 9.58 सेकंड का है. जो पलभर में चीता तोड सकता है.

यह शानदार रफ्तार हासिल करने में चीते के फेफड़े बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, कड़ी मेहनत करने वाली मांसपेशियों को तेजी से ऑक्सीजन देने के लिए. यह क्रिया के समय पूरे श्वसन पथ को बड़ा किया जाता है. दौड़ने के दौरान यह बिल्ली एक मिनट में 150 सांस लेती है. जब की सामान्य तौर पर आराम करते हुए 60 श्वास प्रति मिनट लेती है. बिल्ली कुल में से चीता की रीड की हड्डी सबसे बड़ी होती है जो एक कॉइल स्प्रिंग के जैसे प्रतिक्रिया देती है. जब यह स्प्रिंग खुलती है तब एक आर्चर के धनुष से निकले हुई बाण जैसी रफ्तार हासिल करने में मदद करती है. जिससे चीता को गजब की स्फूर्ति मिलती है. चीता दौड़ते वक्त उडता है. जो अपनी पूरी ताकत लगाकर दौड़ता है. अगर वक्त आने पर दौड़ते हुए चीता खुद को ना रोके तो उसकी वहा ही मोत हो जायेंगी. ऐसे अद्भुत जानवर अब खतरे में हैं. जिसकी आबादी अफ्रीका में 7100 जितनी है.

The running machine

चीता के पैर लंबे होते है जब की पंजे में वेबिंग कम होने के कारण पंजे से शानदार ग्रिप मिलती है. जब चीता दौड़ता है तब उसका सिर सीधा रहता है. चीता की नजर सिर्फ अपने शिकार पर रहती है. यह शानदार दौड़ में लंबे और हल्के पैर बहुत मदद करते हैं. फ़ेलिडाए कुल के हर एक शिकारी के पंजे में वेब होता है. लेकिन फ़ेलिडाए कुल के एसिनोनिक्स वंश में आने वाले चीते  के पंजों में वेब नहीं होता. और एसिनोनिक्स मतलब बाहर निकलने वाले पंजे नहीं. यह ग्रीक भाषा में से लिया गया शब्द है. जिससे फ़ेलिडाए कुल की दूसरी बड़ी बिल्लियों का वर्गीकरण करते हुए यह प्रजाति को अलग एक अलग वंश के तौर पर रखा गया.

देखें यह वीडियो: 


यह जन्मजात शिकारी को शिकार करने में उसकी पूंछ बहुत बड़ा रोल अदा करती है.  जो चीते की रफ्तार को काउंटर बैलेंस और दिशा देने में सहायता करती है. यह पूंछ की बदोलत ही थॉमसन गजैल जैसे तेज हिरण को भी मार गिराते है. अफ्रीका के मैदानों में जब जब एसिनोनिक्स जुबेटस दौड़ता है, तब तब उसकी टीयर लाइन उसे मदद करती हैं. जो आँख से होती हुई मुख तक आती है. जब चीता शिकार के लिए दौड़ता है तब सूर्य के किरण आँख में पडते नहीं और नजर सिर्फ शिकार पर रहती है. यह एसिनोनिक्स प्रजाति में आने वाला एकमात्र जीवित सदस्य है, जो कि अपने पंजों की बनावट के रूपांतरण के कारण पहचाने जाते है. इसी कारण, यह इकलौता विडाल वंशी है जिसके पंजे बंद नहीं होते है और जिसकी वजह से इसकी पकड़ कमज़ोर रहती है लेकिन स्फूर्ति गजब की होती है. दूसरी बड़ी बिल्लियों की तरह चीते भारी नहीं होते.  77 से 143 पाउंड तक चीता भारी हो सकता है. शरीर की बात करे तो यह सुंदर शिकारी पांच फुट तक लंबा हो सकता है.

Cheetah animal

मादा चीता जब गर्भधारण करती है तब एक बार में 2 से 8 बच्चों को जन्म देती हैं. यह छोटे बच्चे काफी बार शिकार बन जाते हैं. काफी बच्चे एक साल तक जिंदा नहीं रह सकते. चीते के बच्चे प्राणी जगत में सबसे सुंदर दिखनेवाले जीव में से एक होते है. चीते के बच्चों को सिर से लेकर पूंछ तक घने और लंबे बाल होते है. यह बालों को  मैनटल कहा जाता है. यह बाल बच्चों को ऊंची घास में हनी बैजर की तरह दिखाता है. जिससे यह बच्चे शेर और लकड़बग्घे जैसे शिकारीयों से सुरक्षित रहते है. बिल्ली कुल के अन्य शिकारीयों की तरह चीता गर्जना नही करता बल्कि गुर्राता है. जब चीते  के बच्चों पर खतरा होता है तब मादा चीता गुर्राके बच्चों को ढूंढती हैं.

Cheetah fattest running animal

चीता शब्द संस्कृत से लिया गया है जिसका मतलब होता है, चित्रय. जो कि चीते के  घब्बे को देखते हुए कहा जाता है. भूतकाल में चीते को शिकारी तेंदुआ कहा जाता था. क्यूकी चीते को बांधकर भारत और अन्य देशों में हिरणों का शिकार किया जाता था. यह भी भारत में से चीते लुप्त होने का कारण हैं. क्यूकी जंगल में चीते का अंग्रेजो और राजा महाराजाओंने अंधाधुंध शिकार किया था. जिससे प्राकृतिक आवास में चीते रहे नहीं. और चीते को पालतू बनाकर शिकार करवाया जाता था, इससे थोड़े बचे हुए चीते भी लुप्त हुए. विशेषज्ञों के मुताबिक देश में चीता को अंतिम बार 1947 में देखा गया, जब सरगुजा महाराज ने देश में बाकी बचे तीन चीतों को एक शिकार में मार दिया था. एशियाई चीते की बात करे तो ईरान में तकरीबन 50 जितने चीते बचे है. यह रनिंग मशीन को बचाना जरूरी है ताकि ग्रासलैंड बचे रहे. प्राकृतिक संतुलन बना रहे. और इंसान की बनाई हर एक फास्ट मशीन को कुदरत का जवाब मिलता रहे.

चीते के जीवन का सफर कैसा लगा हमें हमारे कमेंट बॉक्स में बताएं.

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