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चीन ने वीडियो गेम्स को लेकर जारी किए नियम, भारत में भी उठी मांग

Online Video Games
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चीन की नेशनल प्रेस & पब्लीकेशन एडमिनिस्ट्रेशन (National Press and Publication Administration) ने सोमवार को यानि 30 अगस्त को फिर एक बार Online video games को लेकर नए नियम जारी किये हैं. जारी किए गए नियमों में कहा गया है कि 18 साल से कम उम्र वाले बच्चों को एक हफ्ते में अब केवल 3 घंटे ऑनलाइन वीडियो गेम्स खेलने दिया जाएगा. इस घटना के बाद भारत के कुछ लोग भी ऐसे नियम भारत सरकार को लागु करने की मांग कर रहे है.

गेमिंग कम्पनी को लगे झटके

यह कदम चीन देश की गेमिंग कम्पनीयां जैसे Tencent और NetEase के लिए बड़ा झटका है, जिन्होंने इस साल एकाधिकार विरोधी से लेकर डेटा सुरक्षा तक के क्षेत्रों में अलग-अलग नियमों का सामना किया है. इस खबर ने निवेशकों को हिला दिया है और चीनी तकनीकी शेयरों के मूल्य पर भी आक्रमण किया है.

क्या हैं नए नियम

नए नियमों की नोटिस के अनुसार 18 साल से कम उम्र के लोगों को दिन में एक घंटे रात 8 बजे से 9 बजे के बीच वीडियो गेम खेलने की अनुमति होगी. एक हफ्ते में बच्चे केवल 3 घंटे वीडियो गेम खेल सकेंगे. ये अनुमती भी सिर्फ शुक्रवार, सप्ताहांत और कानूनी छुट्टियों तक सीमीत है. बता दें की यह नीति 1 सितंबर से प्रभावी है. एजेंसी ने इन नियमों को बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के तरीके के रूप में पेश किया.

भारत में भी उठी मांग

पड़ोसी देश की ये खबर सुनने के बाद ट्विटर पर नेटिज़न्स ने भी मांग की कि भारत में ऐसा निर्णय लिया जाना चाहिए क्योंकि इससे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण लगेगा.

एक्सपर्ट की राय 

हालांकि, देश भर के मनोचिकित्सकों यानि साइकेट्रिस्ट्स का कहना है कि अगर सरकार इस तरह के बड़े और जबरदस्ती कदम उठाती है तो इसका असर खासकर बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य पर भारी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

ये नियम उन कपंनियों पर लागु होंगे जो नाबालिगों को ऑनलाइन गेमींग सेवाएं प्रदान करती है. कंपनियों को उन उपयोगकर्ताओं को भी सेवाएं प्रदान करने की अनुमति नहीं होगी, जिन्होंने वास्तविक नाम रजिस्ट्रेशन के साथ लॉग इन नहीं किया है. इससे उन्हें अपने उपयोगकर्ताओं की पृष्ठभूमि से अनजान रहने से रोका जा सकेगा.

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अब बात ये है कि जिन कारणों से लोग टिप्पणी में उल्लेख कर रहे हैं, इस तरह ऐसा करना काफी मूर्खतापूर्ण कदम होगा. गेमिंग बहुत लोगों के लिए एक तनाव दूर करने वाला तंत्र है, शायद सभी में सबसे कम हानिकारक और सबसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है और भारतीय शिक्षा प्रणाली, चीनी की तरह काफी तनावपूर्ण है. समाधान अच्छे पालन-पोषण से लेकर शिक्षा प्रणाली में सुधार तक का है और ये दोनों भारत जैसे देश में काफी कठिन हैं. लेकिन क्या हम वास्तव में बच्चों को किसी और चीज के आदी होने का जोखिम उठाना चाहते हैं और उन्हें बेकाबू बनाना चाहते है?

 

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