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क्या भारतीय सीमा से गुजरेगी चीन की इलेक्ट्रिक बुलेट ट्रेन?

Bullet Train
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बीजिंग: चीन द्वारा बनी इलेक्ट्रिक बुलेट ट्रेन का परिचालन आज से शुरू हो चुका है। यह सुपरफास्ट बुलेट ट्रेन भारतीय सीमा से होकर गुजरेगी। चीन की सुपर फास्ट इलेक्ट्रिक बुलेट ट्रेन भारतीय सीमा के पास स्थित तिब्बत से गुजरेगी। यह बुलेट ट्रेन प्रांतीय राजधानी लहासा और नियंगची को जोड़ेगी। और दोनों जगहों तक जाने के लंबे समय को कम समय में तय करेगी। India -China सीमा रेखा संघर्ष पर इसका असर पड़ सकता है। क्यूंकि, नियंगची अरुणाचल प्रदेश के करीब स्थित तिब्बत का सीमाई नगर है।

खबरों के मुताबिक, वर्ष 2020 के नवंबर महीने में, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अधिकारियों को सिचुआन प्रांत को तिब्बत में नियंगची से जोड़ने वाली नई रेलवे परियोजना का काम तेज गति से करने का निर्देश दिया था और कहा था कि नई रेल लाइन सीमा स्थिरता को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगी। 

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Fuxing हाई स्पीड इलेक्ट्रिक बुलेट ट्रेन का आज से परिचालन 

इस ट्रेन को (फूक्सिंग) Fuxing हाई स्पीड इलेक्ट्रिक बुलेट ट्रेन नाम दिया गया है। यह ट्रेक लगभग 435.5 किमी लंबे सेक्शन ल्हासा से न्यिंगची को जोड़ेगा। बुलेट ट्रेन के ट्रेक का उद्घाटन चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC-The Communist Party of China) के समारोह के छ: दिन पहले किया गया है। जबकि CPC का समारोह 1 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। बुलेट ट्रेन की यह रेलवे लाइन किंगहई-तिब्बत (Tibet) पठार के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र से होकर गुजरेगी। लहासा (Lhasa) से नियंगची (Nyingchi) के बीच से गुजरेगी फूक्सिंग बुलेट ट्रेन। किंगहई-तिब्बत रेलवे के बाद सिचुआन-तिब्बत रेलवे तिब्बत में दूसरी रेलवे होगी। यह भाग भूगर्भीय रूप से सबसे सक्रिय क्षेत्रों में से एक है।  

China president xi jinping

Xi Jinping President of China

48 घंटे का सफर तय होगा सिर्फ 13 घंटों में:- Chengdu-Lhasa

सिचुआन-तिब्बत रेलवे की शुरुआत सिचुआन (Sichuan) प्रांत की राजधानी, चेंगदू (Chengdu) से लहासा की यात्रा 48 घंटे का सफर 13 घंटे में पूरा होगा। और Fuxing ट्रेन यान से गुजरते हुए कामदो के जरिए तिब्बत में प्रवेश करेगी। 

खबरों के मुताबिक, शिंगहुआ यनिवर्सिटी में नेशनल स्ट्रेटजी इंस्टीट्यूट के शोध विभाग के निदेशक कियान फेंग ने सरकारी दैनिक ‘ग्लोबल टाइम्स’ को पूर्व में बताया था कि, ‘चीन-भारत सीमा पर अगर संकट का कोई परिदृश्य बनता है तो रेलवे चीन को रणनीतिक सामग्रियां पहुंचाने में बहुत सुविधा देगी।’

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चीन शुरुआत से ही अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता आ रहा है, जिसे भारत द्वारा खारिज किया गया है। गौरतलब है कि, भारत-चीन (China- India) का सीमा विवाद 3,488 किलोमीटर लंबी (Line of Actual Control-LC) को लेकर संघर्ष चल रहा है। और ऐसे वक्त पर चीन द्वारा बुलेट ट्रेन परिचालन को शुरू करना एक चुनौती को ललकारना जैसा नजर आ रहा है। 

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