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इजरायल में गठबंधन सरकार, 12 साल प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू अब प्रधानमंत्री नहीं रहे

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ISRAEL ELECTION : GOOGLE IMAGE

इजरायल और फिलिस्तिन के बीच चल रहे विवाद के शांत होने के बाद शायद किसिने नहीं सोचा होगा की इजरायल में चुनाव का माहोल इतना दिलचस्पद होगा। करीब दो हफ्ते पहले जब इजरायल सबसे बुरे सांप्रदायिक तनाव से जूझ रहा था, गाजा से रॉकेटों की बौछार हो रही थी, तब कौन सोच सकता था कि वामपंथी, दक्षिणपंथी और मध्यमार्गी जैसी विरोधी विचारधाराओं वाले दल अरब पार्टी के साथ मिलकर एक राष्ट्रीय एकता की सरकार बनाने के लिए सहमत होंगे, जो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करेगी।

इजराइल 2 साल में पांचवें चुनाव की तरफ जाने से फिलहाल बच गया है। 12 साल प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू अब प्रधानमंत्री नहीं रहे। उनका स्थान गठबंधन सरकार के मुखिया नेफ्टाली बेनेट लेंगे, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। इसका दिलचस्प पहलू ये है कि बेनेट 26 अगस्त 2023 तक ही कुर्सी पर रहेंगे। इसके बाद येश एटिड पार्टी के चीफ येर लेपिड प्रधानमंत्री बनेंगे। लेकिन, एक्सपर्ट मानते हैं कि इस गठबंधन सरकार का लंबा चलना मुश्किल है। इनमें विचारधारा का टकराव रहेगा।

देखें यह वीडीओ: इजरायल में गठबंधन सरकार

यहाँ पढेगौतम गंभीर फाउंडेशन करता था फैबिफ्लू की जमाखोरी

इजराइल में भारत की तरह कई राजनीतिक दल

ISRAEL ELECTION 2021 : GOOGLE IMAGE

इजराइल में भारत की तरह कई राजनीतिक दल हैं। यानी बहुदलीय व्यवस्था है। इनकी विचारधारा भी अलग-अलग है। नेफ्टाली बेनेट जिस यामिना पार्टी के नेता हैं, उसे आप राइट विंगर, दक्षिण पंथी या बहुत सामान्य तौर पर कट्टरपंथी पार्टी कह सकते हैं। 8 दलों के गठबंधन में येश एटिड पार्टी और राम पार्टी भी है। मजे की बात ये है कि येश मध्यमार्गी या स्पष्ट विचारधारा वाली पार्टी है। वो ज्यादा कट्टरपंथी भी नहीं और ज्यादा नर्म भी नहीं है। अरब-मुस्लिमों की राम पार्टी भी कोएलिशन का हिस्सा है। ये इजराइल में रह रहे अरब मूल के मुस्लिमों की कई पार्टियों में से एक है, और उनके ही हक-हकूक को तवज्जो देती है। हालांकि, एक बिल्कुल ही अलग अंदाज में जिस व्यक्ति को सरकार बनाने की विपक्षी कवायद के पटरी से उतरने से सबसे ज्यादा फायदा होता दिख रहा था वही इन ताकतों को एकजुट करने में सबसे अहम कड़ी भी बनकर उभरा। इजरायल के डिवाइडर इन चीफ के तौर पर देखे जाने वाले 71 वर्षीय नेतन्याहू ही एक अलग अंदाज में अपने विरोधियों को एकजुट करने वाले भी साबित हुए, जिनके कारण इजरायल के इतिहास में जिन लोगों के एक साथ आने की कल्पना भी नहीं की गई थी वे राष्ट्रीय एकता की सरकार बनाने के लिए मिल गए।

पहली बार इजरायल में बनी गठबंधन सरकार

VOTE FOR NATION – GOOGLE IMAGE

हालांकि, इस नए गठबंधन में लेफ्ट विंग की मेरेटज से लेकर बेनेट की दक्षिणपंथी यामिना पार्टी हिस्सा है। साथ ही इसमें इस्लामिस्ट पार्टी यूनाइटेड अरब भी शामिल है। ऐसा पहली बार है, जब अरब इजरायल पार्टी किसी गठबंधन का हिस्सा है। अगर विपक्ष भी सरकार बनाने में नाकाम होता तो तय था कि इजरायल में 5वीं बार चुनाव कराए जाते। यहां पिछले दो साल से राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई थी। मार्च में हुए आम चुनाव में नेतन्याहू की पार्टी बहुमत जुटाने में कामयाब नहीं हो पाई थी और सहयोगी पार्टियों का समर्थन भी उन्हें नहीं मिला था। उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 120 में 61 सीट की जरूरत थी। इसके बाद विपक्ष के नेताओं को सरकार बनाने के लिए 28 दिन का समय दिया गया था, लेकिन गाजा में संघर्ष के चलते प्रोसेस में देरी होती रही।

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