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Col Ravindranath: कारगिल युद्ध के ऐसे हीरो, जिनके नेतृत्व ने दिलाई तोलोलिंग हिल पर जीत – कर्नल रवीन्द्रनाथ

Col Ravindranath Kargil War (6)
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ज़रा सोचिए, अगर आज भारत के पास तोलोलिंग हिल (Battle of Tololing) नही होता, तो क्या होता? श्रीनगर-कारगिल – लेह हाई वे पाकिस्तान के कब्जे में होता। नतीजा होता-पाकिस्तान का भारत मे घुसने का सीधा रास्ता। फिर तो देश मे क्या तबाही मचाई जा सकती थी, इसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। यह सब हो सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। क्यूंकी कारगिल के युद्ध(Kargil War) में न मात्र सैनिक(Indian Sodiers) लड़ रहे थे, बल्कि लड़ रहे थे देश के वह जाँबाज बेटे, जो अपनी जान हथेली पर लेकर निकल पड़े थे अपनी माँ (India) को इस संकट से निकाल ने के लिए।

देश की गरदन दुश्मन के हाथ में 

जब तोलोलिंग हिल पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लीआ था तब जैसे देश की गरदन दुश्मन के हाथ में थी। कारगिल के युद्ध को जीतने के लिए तोलोलिंग को जितना बेहद ज़रूरी था। जब भारतीय सेना ने तोलोलिंग पर भारत का तिरंगा लहराया, तब शुरू हुई भारत की कारगिल के युद्ध में जीत की दास्तान।

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Col Ravindranath Kargil War

Image : Clicks and tales

यह सब संभव हुआ देश के उन वीरों की वजह से और खास करके उनको मिले सही मार्गदर्शन और नेतृत्व की वजह से। इस सही मार्गदर्शन और सामरिक नेतृत्व का श्रेय जाता है –  कर्नल मगोद बसप्पा रवींद्रनाथ यानि कर्नल रवींद्रनाथ (Col Ravindranath) को।

टोलोलिंग पर जीत में Col Ravindranath की भूमिका 

कारगिल युद्ध (Kargil War)के दौरान कर्नल रवीन्द्रनाथ (Col Ravindranath) पर ज़िम्मेदारी थी 2 राजपूताना राइफल्स की। जिनहे फतेह करनी थी तोलोलिंग हिल। इस बहादुर और बुध्धिवान कर्नल एक नेतृत्व मे उन 2 राजपूताना राइफल्स (2 RAJ RIF) ने न मात्र द्रास सेक्टर में टोलोलिंग पर जीत हांसील की। बल्कि साथ ही में प्वाइंट 4590 और ब्लैक रॉक की रणनीतिक ऊंचाइयों पर सफलतापूर्वक त्रिरंगा भी लहराया। 

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Col Ravindranath Kargil War 

रवीन्द्रनाथ ऐसे बने ‘कर्नल’ रवीन्द्रनाथ 

15 May 1959 को कर्नाटक के कुंदुरु मे जन्मे रवीन्द्रनाथ बचपन से ही देश की सेवा करना चाहते थे। पिता मागोद बसप्पा और माता सरोजम्मा बसप्पा भी अपने बेटे के इस देशप्रेम से काफी खुश थे। विजयपुरा की सैनिक स्कूल से स्कूली शिक्षा खत्म करने के बाद उन्होने 1976-1979 तक राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (National Defence Academy) मे पढ़ाई की। 1980 में वह भारतीय सैन्य अकादमी(Indian Military Academy) से पास हुए और शुरू हुआ उनका देशसेवा का सफर। 

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कश्मीर में आतंक की सफाई 

रवींद्रनाथ जी को 17 मद्रास रेजिमेंट में नियुक्त किया गया था। जिसके बाद उन्हे फरवरी १९८५ में उन्हें २१ राजरिफ में स्थानांतरित कर दिया गया। बाद में उन्होंने कारगिल ऑपरेशन के दौरान २ राजपूताना राइफल्स की कमान संभाली। उन्हें पहले अरुणाचल प्रदेश में तैनात किया गया था, और फिर महू में सैन्य प्रशिक्षण स्कूल (military training school) में प्रशिक्षक के रूप में 5 साल तक सेवा दी। जिसके बाद उन्होने 1999 तक कई बार जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) में आतंकवाद विरोधी अभियानों में वीरता दिखाई। 

Col Ravindranath Kargil War (1)

1999 में उनके कंधो पर आई कारगिल युद्ध (Kargil War) में 2 राजपूताना राइफल्स संभालने की ज़िम्मेदारी। वक़्त काफी मुश्किल था। मई के महीने में पाकिस्तानीओ ने कारगिल-श्रीनगर-लेह हाइवे के तोलोलिंग टॉप पर कब्जा कर लीआ था। तोलोलिंग टॉप जितना काफी जरूरी था। अगर वह युद्ध सेना हार जाती तो एक तरफ देश की गरदन दुश्मन के हाथ में आ जाती और दूसरी तरफ सेना का मनोबल टूट जाता, और शायद फिर कारगिल की लड़ाई भी हम हार जाते। 32 दिनों तक चली तोलोलिंग की लड़ाई (tololing kargil)कारगिल युद्ध की सबसे लंबी और सबसे भीषण लड़ाई मानी जाती है। 

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यह पूरी लड़ाई लड़ने के लिए कर्नल रवीन्द्रनाथ के पास थे मात्र 90 सिपाही। लेकिन उन सबके मन में जो जोश था और जो हिम्मत थी वह 90,000 सिपाहीओ से भी ज़्यादा थी। बस इसी जोश और हिम्मत से वह चढ़ बैठे दुश्मन पर। धनधान बरस रही गोलियों के बीच यह जवान भी दुश्मन की हर एक गोली का मुंह तोड़ जवाब दे रहे थे।

Tololing hill

 

एक कुशल नेतृत्व की मिसाल 

12 जून, 1999 को वक़्त ऐसा था की 2 RAJ RIF (Rajputana Rifles)के जवान दुश्मन की तरफ से बरस रही लगातार गोलाबारी से थोड़े मुश्किल में थे। तभी स्थिति की गंभीरता को महसूस करते हुए, रवींद्रनाथ खुद मौके पर पहुंचे और दुश्मन पर धावा बोल दिया। जिससे फिर जवानो में वापस से जोश आया और उन्होने दुशमनों पर गोलियों की बोछार की। परिस्थिति पर भारतीय सेना की पकड़ मजबूत हुई। एक लंबे और भीषण युद्ध के बाद 13 जून,1999 की सुबह 4.10 मिनिट पर कर्नल रवीन्द्रनाथ की टीम ने तोलोलिंग पर त्रिरंगा लहराया। हिंदुस्तान पर कब्जा करना चाहते दुश्मन के मुह पर यह करारा तमाचा था। 

कर्नल रवीन्द्रनाथ के मन में लड़ाई जीतने की खुशी तो थी लेकिन साथ ही में उनके मन में एक भारी बोज भी था। बोज था अपने एक ऑफिसर, 2 JCO (junior commanding officers) , और 7 जवानो को खो देने का। लेकिन दुख से ज़्यादा उन्हे गर्व था उन जवानो पर। 

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Tololinh hill victory

वीरचक्र से सनमानित 

कर्नल रवीन्द्रनाथ को युद्ध के दौरान दिखाई समजदारी और कुशल नेतृत्व की वजह से 15 अगस्त 1999 को वीर चक्र (Vir Chakra) से सनमानित किया गया। 

 2001 में रवींद्रनाथ सेना से सेवानिवृत्त हुए। जिसके बाद वह बंगलौर में अपना जीवन बिताने लगे। उन्होने कई प्राइवेट कंपनी की कमान संभाली। उन्होने मैगोड फ्यूजन टेक्नोलॉजीज, मैगोड लेजर मशीनिंग, प्रीयूस इंडिया और टाइकून सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज सहित कई कंपनी के बोर्ड ऑफ डिरेक्टर्स में रह कर सेवा दी। 

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Magod Basappa Ravindranath

सेवानिवृति के बाद भी देश के लिए प्रेम 

कर्नल आर्मी से तो सेवानिवृत हो चुके थे, लेकिन उनका दिल अभी भी आर्मी में ही था। रिटायरमेंट के बाद भी जब भी देश में दुश्मन द्वारा किसी आतंकी साजिश का पता चलत था तब कर्नल का खून खौल उठता था। उनका मन करता था की कब वह जाए और उन दुश्मनों को मार गिराए। 

अप्रैल 8, 2018 को सुबह कर्नल (Col Ravindranath) रोज़ की तरह अपने घर के पास वाले गार्डन मे जॉगिंग कर रहे थे। तभी उनको दिल का दौरा पड़ा और देश ने अपना एक वीर बेटा खो दिया। 

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Vir chakra Col Ravindranath

देश के लिए प्रेरणास्त्रोत 

लेकिन उन्होने देश की सबसे बड़ी लड़ाई में से एक कारगिल युद्ध में अपनी सूझ बुझ से जिस तरह युद्ध को जिताने में मदद की थी, उसको देश आज भी नहीं भुला, ना ही कभी भूलेगा। ऐसे वीर एक ही बार पैदा होते है, लेकिन उनके कर्म आनेवाली पीढ़ी को सदा प्रेरणा देते है। वैसे ही आज भी कर्नल रवीन्द्रनाथ को याद करते ही एक आदर्श नेतृत्व और साहस की प्रतिभा दिखती है। 

हिंदुस्तान के इस बेटे को OTT India का शत शत नमन। 

देखें वीडियो: जिनके कुशल नेतृत्व से भारत ने जीता तोलोलिंग हिल – कर्नल रवीन्द्रनाथ 

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