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क्रिप्टोकरेंसी को क्या सरकार ने कानूनी करार दे दिया है, आसान भाषा में समझिए 30 फीसदी टैक्स के क्या हैं मायने

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केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण(Nirmala Sitharaman) ने संसद भवन में दूसरी बार पेपरेलस बजट पेश किया. करीब 90 मिनट के भाषण में निर्मला सीतारमण ने वर्चुअल करेंसी(Virtual Currency) और डिजिटल रुपया का जिक्र किया, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर हर जगह ये चर्चा होने लगी कि सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी(Crypto Latest News)  को कानूनी करार दे दिया है. अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो 30 फीसदी टैक्स की वजह से ये समझ रहे हैं कि यह वैध हो गया है तो पूरी जानकारी पहले ले लीजिए फिर किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं.

रिजर्व बैंक लाएगा डिजिटल रुपया

सबसे पहली बात ये है कि निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में क्या कहा. उन्होंने कहा कि सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी लेकर आएगा. यानि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया(RBI) ब्लॉकचेन पर आधारित डिजिटल करेंसी (Digital Currency) लेकर आएगा. साथ ही सरकार डिजिटल करेंसी के लेन-देन पर नजर रखेगी, उस पर 30 फीसदी टैक्स देना होगा और लेनदेन पर एक प्रतिशत टीडीएस(TDS) भी लगेगा. हालांकि 30 फीसदी टैक्स वाली बात को भी आसान भाषा में समझने की जरूरत है.

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Image Courtesy: Google.om

क्या है 30 फीसदी टैक्स का मतलब

दरअसल वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि डिजिटल करेंसी जो कमाई होगी उस पर टैक्स लिया जाएगा. मतलब ये है कि अगर आपने दस हजार रुपये क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया और उस पर कमाई पांच हजार रुपये हुई. मतलब 15 हजार रुपये आपका पूरा पैसा हुआ तो आपको जो पांच हजार फायदा हुआ है, उस पर 30 फीसदी टैक्स देना होगा. इसके अलावा अगर आप डिजिटल करेंसी का लेनदेन करेंगे तो एक प्रतिशत टीडीएस भी देना होगा. सरकार ने ये भी साफ किया है फायदा हो नुकसान 30 फीसदी टैक्स देना ही पड़ेगा. 

क्या सरकार ने इसे वैध करार दे दिया है

इसके अलावा 75 जिलों में 75 डिजिटिल बैंक(Digital Bank) स्थापित करने की योजना है. अब सवाल ये उठ रहा है कि आरबीआई जो डिजिटल करेंसी लेकर उसका नाम क्या होगा, फिलहाल के लिए उसे डिजिटल रुपया कहा जा रहा है लेकिन नाम अभी तय नहीं है. मतलब ये हुआ कि सरकार ने इसे पूरी तरह वैध नहीं किया है, बल्कि अभी सरकार इस पर नजर रखेगी. ऐसे में अगर आप भी ये सोच रहे हैं कि टैक्स देने का मतलब कानूनी रूप से वैध होना है तो आप गलत हैं, क्योंकि बेहिसाब संपत्ति पर जो सरकार टैक्स के रूप में पेनाल्टी लेती है उसका मतलब ये नहीं हो जाता कि वह संपत्ति वैध हो गई. पूरी तरह से सरकार जब तक इसका ऐलान न कर दे तब तक इसे सीधे शब्दों में लीगल नहीं कहा जा सकता. हालांकि इसे एक्सपर्ट बैक डोर एंट्री जरूर बता रहे हैं. 

लोगों का कैसा है रिएक्शन

वित्त मंत्री के इस ऐलान के बाद से सोशल मीडिया पर लोगों के अलग-अलग रिएक्शन सामने आ रहे हैं. क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वाले लोगों ने इसे लेकर हाय-तौबा मचाना शुरू कर दिया है. क्योंकि अब तक इससे होने वाली कमाई पर सरकार कोई टैक्स नहीं लेती थी. लोगों ने लूट गया, बर्बाद हो गया और सबमें हिस्सा चाहिए जैसे मीम्स शेयर कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें: बजट से बेरोजगारों को क्या मिला, किसानों, क्रिप्टोकरेंसी और रेल यात्रियों के लिए क्या बड़े ऐलान हुए

जानकारी की बात ये है कि क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करने के लिए सरकार बीते दिनों जो बिल लेकर आई थी वह अभी लंबित है. ऐसे में उस बिल के पास होने और कानून बनने के बाद ही डिजिटिल करेंसी के कानूनी होने या न होने और इसकी वैधता को लेकर रास्ता साफ हो पाएगा.

क्या है क्रिप्टोकरेंसी

क्रिप्टोकरेंसी(Cryptocurrency) को आसान भाषा में समझने के लिए आपको इसका मतलब जानना जरूरी है कि आखिर इस शब्द का मतलब क्या है. यह दो शब्दों से मिलकर बना है, क्रिप्टो और करेंसी. क्रिप्टो एक लैटिन शब्द है जिसका मतलब सीक्रेट यानि गुप्त और करेंसी का मतलब तो हम सब जानते ही हैं कि मुद्रा या रुपया. अब चूंकि ये करेंसी दिखाई नहीं देती, इसलिए इसे रेगुलेट करना इतना आसान नहीं है. एक बार को इसमें उछाल देखन को मिलता है तो निवेशकों की संख्या बढ़ जाती है लेकिन गिरावट होने पर निवेशकों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है.

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