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मेडिसिन के क्षेत्र में नोबेल पाने वाले इन दो वैज्ञानिकों ने आखिर कौन सी गुत्थी सुलझाई है, आसान भाषा में समझिए

Discoveries Of Receptors
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Discoveries Of Receptors: बचपन से हम पढ़ते आ रहे हैं कि हमारे शरीर में पांच ज्ञानेंद्रियां हैं, जिसमें आंख, नाक, कान, जीभ और त्वचा शामिल है. इनमें से हर किसी का काम अलग-अलग है. आंख का काम देखना, नाक का काम सुंघना, कान का काम सुनना, जीभ का काम स्वाद का पता लगाना और त्वचा का काम महसूस करना है. अब इसी त्वचा को लेकर अमेरिका के दो वैज्ञानिकों ने रिसर्च की है और उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला है, तो समझते हैं कि आखिर उनकी रिसर्च में ऐसी क्या जानकारी सामने आई है.

दो अमेरिकी वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार

दरअसल अमेरिकी वैज्ञानिक डेविड जूलियस (David Julius) और अरडेम पैटापूटियन (Ardem Patapoutian) को मेडिसिन के क्षेत्र में साल 2021 का नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize 2021) मिला है. संयुक्त रूप से इन दोनों को ये पुरस्कार मिला है. इन्होंने शोध में इस बात का खुलासा किया है कि हमारी त्वचा जो गरम-ठंड का अनुभव करती है, वो कैसे काम करती है. आखिर उस त्वचा के महसूस होने के बाद शरीर में क्या प्रतिक्रिया होती है, दिमाग तक ये सूचनाएं कौन ले जाता है.

रिसेप्टर्स की खोज के लिए नोबेल

लंबे रिसर्च के बाद इन दोनों वैज्ञानिकों को ये पता चला कि हमारे शरीर में रिसेप्टर्स (Discoveries Of Receptors) होते हैं, जो जब भी त्वचा को कुछ महसूस होता है तो वह सूचनाएं आदान-प्रदान करते हैं. इसके साथ ही इन्होंने ये भी पता लगाया कि सर्दी-गर्मी से लेकर दर्द तक की पहचान कैसे होती है. मतलब कुल मिलाकर इन्होंने ये पता लगा लिया कि आखिर हमारी त्वचा जब किसी चीज को महसूस करती है तो उसकी जानकारी दिमाग तक कैसे पहुंचती है.

Perceptors

Image Courtesy: Google.com

मिर्च को लेकर किया रिसर्च 

अब ये जानकारी उन्हें मिली कैसे तो इसके लिए उन्होंने एक मिर्च का इस्तेमाल किया, हो सकता है आप जानते हैं कि मिर्च में कैप्साइन नाम का कैमिकल होता है, जिससे इसे खाने पर जलन महसूस होती है, ये तीखी होती है. इसमें रिसेप्टर के जरिए ये पता लगाया गया कि जलन होने पर कैसी प्रतिक्रिया होती है, इसके बाद ऐसे ही ठंड को लेकर कैसी प्रतिक्रिया होती है, उसे लेकर खोज सामने आई.

Touch Skin

Image Courtesy: Twitter..com

रिसर्च से ये हो सकते हैं फायदे

अब रिसेप्टर्स (Discoveries Of Receptors) की जानकारी मिलने से कई मामलों में आसानी होगी. इसिलिए इसे काफी अहम खोज माना जा रहा है, ऐसे में ये जानना भी जरूरी है कि आखिर इस खोज के क्या फायदे होंगे. सबसे बड़ी बात तो ये है कि जब हम दर्द महसूस करते हैं तो भी रिसेप्टर्स काम करते हैं तो दर्द निवारक दवा बनाने में भी इसकी मदद से काफी सहूलियत होने वाली है, इसके अलावा शरीर का तापमान तो हम थर्मामीटर से नाप लेते हैं लेकिन शरीर के अंदर के तापमान या दबाव वगैरह के बारे में इससे जानकारी मिल सकती है.

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दावा ये भी किया जा रहा है कि इससे कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियों के इलाज ढूंढने में भी मदद मिलेगी और सबसे खास बात ये है कि मानव शरीर के कार्य करने के तरीके के बारे में वैज्ञानिक समझ विकसित होगी. मतलब हमारा शरीर कैसे काम करता है इस बारे में और भी रिसर्च अभी बाकी हैं.

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