Ott India News Logo
Recent Posts
Connect with:
Friday / October 15.
Homeन्यूजरक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंहने डेयर टू ड्रीम 2.0 प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंहने डेयर टू ड्रीम 2.0 प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया

RAJNATH SINH
Share Now

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 04 अक्टूबर, 2021 को नई दिल्ली में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की डेयर टू ड्रीम 2.0 प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने 40 विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए, जिनमें 22 व्यक्तिगत श्रेणी और 18 स्टार्टअप श्रेणी के विजेता शामिल थे। उन्होंने इनोवेटर्स और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और देश में उत्साही युवाओं के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए डेयर टू ड्रीम 3.0 भी लॉन्च किया।

डेयर टू ड्रीम डीआरडीओ की अखिल भारतीय प्रतियोगिता है, जो भारतीय शिक्षाविदों, व्यक्तियों और स्टार्टअप्स को उभरती रक्षा और एयरोस्पेस तकनीकियों / प्रणालियों को विकसित करने के लिए प्रेरणा देती है। डीआरडीओ तकनीकी विकास कोष (टीडीएफ) योजना के तहत विजेताओं को उनके आविष्कारों के लिए

तकनीकी और वित्तीय सहायता भी प्रदान करता है। श्री राजनाथ सिंह ने वर्ष 2019 के लिए डीआरडीओ युवा वैज्ञानिक पुरस्कार भी प्रदान किए। 35 वर्ष

से कम आयु के 16 डीआरडीओ वैज्ञानिकों को उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। डेयर टू ड्रीमऔर डीआरडीओ यंग साइंटिस्ट्स पुरस्कारों के विजेताओं को बधाई देते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा, ये पुरस्कार कुछ नया करने के लिए देश के युवाओं की ऊर्जा, उत्साह और प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

DRDO उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये युवा विजेता नए आविष्कार, डिजाइन और विकास के क्षेत्र में अन्य युवाओं को प्रेरित करेंगे और भविष्य में पथ-प्रदर्शक बनकर उन्हें नए आविष्कार करने के लिए प्रेरित करेंगे।उन्होंने कहा कि डेयर टू ड्रीम प्रतियोगिता सरकार के विजन और मिशन के साथ-साथ डीआरडीओ के

जनादेश का भी प्रतिनिधित्व करती है।रक्षा मंत्री ने एक मजबूत और आत्मनिर्भर न्यू इंडिया बनाने के सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि यह केवल आपसी सहयोग के प्रयास से ही प्राप्त कया जा सकता है। उन्होंने न केवल इच्छा को, बल्कि  प्रयास को व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को सफलता प्राप्त करने की कुंजी बताया। यह कहते हुए कि भारत अनुभव और संस्कृति में सबसे पुराने देशों में से एक है और लगभग 60 प्रतिशत युवा आबादी के साथसबसे युवा है, उन्होंने युवाओं को नए आविष्कार को देखने, सीखने और बनाने के साथ देश को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

यह बताते हुए कि वैश्विक सुरक्षा चिंताओं, सीमा विवादों और समुद्री मामलों ने दुनिया को सैन्यआधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित करने पर मजबूर कर दिया है। श्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और उन्हें किसी भी चुनौती से निपटने के लिए नवीनतम मशीनरी से लैस करने की सरकार की प्रतिबद्धता की जानकारी दी। उन्होंने युवा शक्ति को देश की आशा कहा और उत्साही युवाओं का आह्वान किया कि वे मन से आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को प्राप्त करने में सरकार की मदद करें। रक्षा मंत्री ने कहा कि नई तकनीक को स्वदेश में विकसित करना समय की आवश्यकता है। आत्मनिर्भर भारत के तहत हमें यह सुनिश्चित करना है कि उन्नत तकनीक को घरेलू स्तर पर विकसित किया जाएं। यह न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बल्कि देश के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।निजी क्षेत्र की भागीदारी को आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए, श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने रक्षा क्षेत्र में निजी उद्योग की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। नए सृजित कदमों से एक उपयुक्त विकास वातावरण और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कुछ विशेष बातों की जानकारी दी, जिसके तहत रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 में अधिग्रहण की नई श्रेणियां शामिल करना, रक्षा आधुनिकीकरण के लिए एक विशिष्ट बजट का प्रावधान, दो सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों को अधिसूचित करना, रक्षा क्षेत्र में एफडीआई बढ़ाना, रक्षा उपकरणों के स्वदेशी डिजाइन और विकास को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत खरीद {इसमें स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित (आईडीडीएम)} को सर्वोच्च प्राथमिकता देना; सामरिक साझेदारी मॉडल के माध्यम से लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक और पनडुब्बियों सहित एक मेगा रक्षा कार्यक्रम बनाने के अवसर पैदा करना, डीआरडीओ के माध्यम से प्रौद्योगिकी के मुफ्त हस्तांतरण (टीओटी) और रक्षा उत्कृष्टता के लिए आविष्कार (आईडेक्स) और प्रौद्योगिकी विकास कोष जैसी पहल के लिए रास्ते खोलना शामिल है। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि इन उपायों के कारण, रक्षा उद्योग में अब अनुबंधों की संख्या में वृद्धि हुई है। नए एमएसएमई और स्टार्टअप उभरे हैं और अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि अब हम न केवल अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि विदेशों में नई तकनीक और उपकरणों का निर्यात भी कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें:लखीमपुर खीरी में कैसे हुई हिंसा, जानें रविवार से अबतक क्या-क्या हुआ?

श्री राजनाथ सिंह ने रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के सरकार के प्रयासों में केंद्रीय भूमिकानिभाने और तेजी से बदलती भू-राजनीतिक स्थिति में भी सशस्त्र बलों की क्षमता को बढ़ाने में अत्यधिक योगदान देने के लिए डीआरडीओ की सराहना की। उन्होंने कहा कि हाल ही में अनुबंध और हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) एमके-1ए, मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन एमके-1ए और मध्यम दूरी पर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली को शामिल करना डीआरडीओ के कुछ उल्लेखनीय योगदान हैं।रक्षामंत्री ने आशा व्यक्त की कि डीआरडीओ न केवल तकनीकी रूप से उन्नत देशों की क्षमताओं से मेल खाने की कोशिश कर रहा है, बल्कि नई तकनीक के आविष्कार में भी लगातार लगा हुआ है। डीआरडीओ की नई पीढ़ी के कार्यक्रम भविष्य में भी हमारे सशस्त्र बलों को और उन्नत करेंगे। रक्षा मंत्री ने नैनो टेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मानव रहित और रोबोटिक तकनीक जैसी भविष्य की तकनीक में काम करने के लिए डीआरडीओ युवा वैज्ञानिकों की प्रयोगशाला और उन्नत तकनीक केंद्रों की भी सराहना की। इसे नए भारत का नया आयाम बताते हुए उन्होंने भविष्य की तकनीक के लिए अनुसंधान एवं विकास प्रयासों को बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने दोहरे उपयोग वाली तकनीक को विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो सशस्त्र बलों के कर्मियों और नागरिकों दोनों के लिए फायदेमंद हो सकती हैं। उन्होंने सभी हितधारकों से सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक उपकरण प्रदान करने के लिए अनुसंधान और विकास पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में देश की पहचान स्थापित करने और मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड के विजन को हासिल करने में मदद मिलेगी।

RAJNATH SINH श्री राजनाथ सिंह ने उद्योग प्रतिनिधियों से सरकार की नीतियों का पूरा लाभ उठाने और डीआरडीओ और अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ एक जीवंत तालमेल बनाने का आह्वान किया। यह कहते हुए कि डीआरडीओ से नई तकनीकी का हस्तांतरण फल दे रहा है, उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में रक्षा उद्योग अपने दम पर इन-हाउस आर एंड डी सिस्टम भी विकसित कर लेगा। लंबे समय तक काम करने के खिलाफ सावधानी बरतते हुए और लागत तथा समय से अधिक चलने वाली परियोजनाओं की पहचान करने और उन्हें समयबद्ध तरीके से कुशलतापूर्वक पूरा करने पर विशेष जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने शिक्षा, उद्योग और डीआरडीओ के बीच संबंधों को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग समग्र विकास सुनिश्चित करेगा। इस अवसर पर डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित तीन उत्पादों/प्रणालियों को भी सशस्त्र बलों को सौंपा गया। ये हैं- ARINC818 वीडियो प्रोसेसिंग और स्विचिंग मॉड्यूल: भारतीय वायु सेना के लिए विकसित मॉड्यूल को वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल संदीप सिंह को सौंपा गया। यह उच्च बैंडविड्थ, कम विलंबता, चैनल बॉन्डिंग, आसान नेटवर्किंग के साथ एक अत्याधुनिक मॉड्यूल है और 5वीं पीढ़ी के विमान के विकास को पूरा करने में मदद करेगा। प्रोग्राम्स- सोनार परफॉर्मेंस मॉडलिंग सिस्टम: भारतीय नौसेना के लिए विकसित इस सिस्टम को वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ वाइस एडमिरल सतीश नामदेव घोरमड़े को सौंपा गया। यह भारतीय नौसेना के जहाजों, पनडुब्बियों और पानी के नीचे निगरानी स्टेशनों के लिए उपयोगी है।बंड ब्लास्टिंग डिवाइस Mk-II: भारतीय सेना के लिए विकसित इस डिवाइस को वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती को सौंपा गया। इसका उपयोग युद्ध के दौरान मशीनीकृत पैदल सेना की गतिशीलता को बढ़ाने के लिए खाई के साथ बांध की बाधाओं की ऊंचाई को कम करने के लिए किया जाता है

गुजरात विश्वविद्यालय में साइबर सुरक्षा में रिसर्च करने के लिए एक उन्नत तकनीक केंद्र सरदार वल्लभभाई पटेल सेंटर फॉर साइबर-सिक्योरिटी रिसर्च की स्थापना के लिए गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एचए पंड्या और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। श्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के दो नीति दस्तावेज – निर्देशित अनुसंधान नीति और रिकॉर्ड प्रबंधन नीति 2021 भी जारी की। निर्देशित अनुसंधान नीति भविष्य की निगरानी और रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं जैसे पहचाने गए विषयों पर केंद्रित अनुसंधान के लिए शैक्षणिक संस्थानों में उन्नत तकनीक केंद्रों और अनुसंधान प्रकोष्ठों की स्थापना के लिए रूपरेखा प्रदान करती है। शिक्षाविदों के सहयोग से परिणाम और अनुप्रयोग उन्मुख निर्देशित अनुसंधान को समर्थन और प्रोत्साहन देने के लिए हाल ही सरकार द्वारा दीर्घकालिक निर्देशित अनुसंधान नीति को मंजूरी दी गई थी। रिकॉर्ड प्रबंधन नीति का उद्देश्य डीआरडीओ की रिकॉर्ड प्रबंधन गतिविधियों को और मजबूत करना है। दो दिवसीय वार्षिक डीआरडीओ डायरेक्टर्स कॉन्क्लेव 2021 का समापन आज होगा। यह कॉन्क्लेव

03 अक्टूबर, 2021 से शुरू हुई।  कॉन्क्लेव का विषय राष्ट्रीय आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रक्रियाओं को नया स्वरूप देना है।अपने संबोधन में, डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ जी. सतीश रेड्डी ने डीआरडीओ की हालिया उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्नत तकनीकियों के तेजी से विकास और उद्योग तथा शिक्षाविदों के साथ काम करने में आसानी के लिए तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर रक्षा और उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारी उपस्थित

अधिक रोचक जानकारी के लिए डाउनलोड करें:- OTT INDIA App

Android: http://bit.ly/3ajxBk4

iOS: http://apple.co/2ZeQjTt 

No comments

leave a comment