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दिल्ली की ‘जहरीली हवा’ स्मॉग टावर से होगी शुद्ध, जानिए कैसे करेगा काम

SMOG TOWER
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कनॉट प्लेस में “देश के पहले स्मॉग टावर”  (Smog Tower) का उद्घाटन किया. हालांकि इस बात को लेकर सवाल खड़े होने भी शुरू हो गए कि ये देश का पहला स्मॉग टावर नहीं है, बल्कि इससे पहले बीजेपी सांसद गौतम गंभीर इस तरह के टावर लगवा चुके हैं.

 

हालांकि इन विवादों से परे ये बता दें कि स्मॉग से निपटने के लिए दिल्ली और देश का पहला स्मॉग टावर कनॉट प्लेस के बाबा खड़गपुर मार्ग, नई दिल्ली में शुरू हुआ है. आइए समझने की कोशिश करते हैं कि स्मॉग कितना खतरनाक है, स्मॉग में होता क्या है और ये स्मॉग टावर (Smog Tower) हवा को कैसे साफ करेगा.

स्मॉग के बनने के कारण क्या हैं

दरअसल स्मॉग दो भागों से मिलकर बना होता है. पहला भाग है, PM 10 और दूसरा PM 2.5 . इसके अलावा ओजोन, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड और धुंआ स्मॉग में होता है. PM 10  से PM 2.5 तक के कण (Particulate Matter) ही वायु को प्रदूषित करने और स्मॉग के प्रमुख कारण होते हैं. यही सांस लेने में फेफड़े के लिए सबसे खतरनाक होते हैं. PM यानी पार्टिकुलेट मैटर को हिन्दी में कणिका तत्व कहते हैं. सरल भाषा में कहें तो हवा में उपस्थित पानी की छोटी-छोटी बूंदों में जब कुछ धूल या कण मिल जाते हैं, तो उसे पार्टिकुलेट मैटर कहते हैं. फैक्ट्रियां, कोयले, पराली, वाहनों से निकलने वाले धुआं स्मॉग के प्रमुख कारण हैं.

क्या है PM 2.5 और PM 10

PM 2.5 और PM 10 जो संख्या है वह पार्टिकल का डायमीटर यानि व्यास है. अगर व्यास नहीं समझते तो ये जानिए पार्टिकल मैटर का ये साइज बताता है. PM 2.5 का अर्थ हुआ 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले पार्टिकल. ठीक इसी तरह 10 माइक्रोन या 10 माइक्रोमीटर से कम व्यास वाले पार्टिकल को PM 10 कहते हैं. अब ये आपके फेफड़े और सांस के लिए इतना खतरा उत्पन्न करता है कि हाई बीपी यानि उच्च रक्तचाप,  धूम्रपान से होने वाले फेफड़े को नुकसान, डायबिटीज यानि  मधुमेह और मोटापे का खतरा होने लगता है.

कैसै काम करेगा स्मॉग टावर

अब बात करते हैं उस स्मॉग टावर (Smog Tower) की जिसे इस तरह की दिक्कतों को दूर करने के लिए लगाया गया है. दरअसल स्मॉग टावर अपनी चिमनी के माध्यम से हवा को सोखता है और नीचे कई फिल्टर करने वाली छन्नियों से हवा को गुजारने के बाद उसमें से पार्टिकुलेट मैटर को अपनी अलग-अलग छन्नियों में रोक लेता है, जिससे हवा शुद्ध हो जाती है. प्रदूषित हवा को ऊपर से सोखने और स्वच्छ हवा को नीचे लोगों के लिए उपलब्ध कराने के लिए बड़े पंखे लगे होते हैं, जिससे वायु ऊपर चिमनी से खींची जाती है और स्मॉग टावर के निचले हिस्से से बाहर निकाली जाती है.

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दिल्ली में लगने वाले स्मॉग टावर (Smog Tower) में ऐसे पंखों की संख्या 40 है और स्मॉग टावर के निचले हिस्से से स्वच्छ वायु निकलने के लिए 30×30 फीट की संरचना बनाई गई है. यह स्मॉग टावर लगभग 80 फीट ऊंचा है. यह टावर लगभग 1 KM तक के रेडियस में हवा को शुद्ध करेगा. इसकी कुल लागत 20 करोड़ रुपये हैं. मतलब अगर आप सोच रहे हैं कि इसे पूरी दिल्ली में लगाकर दिल्ली की आबोहवा को बिल्कुल शुद्ध कर दिया जाएगा तो ये इतना आसान नहीं है, क्योंकि इसकी लागत ज्यादा है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हुआ है निर्माण

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल जनवरी में केंद्र सरकार को आनंद विहार में एक स्मॉग टावर और दिल्ली सरकार को कनॉट प्लेस में इस तरह के एक और टावर स्थापित करने के लिए तीन महीने का समय दिया था. अगस्त में शीर्ष अदालत ने समय पर पूरा न करने पर केंद्र और राज्य सरकार को फटकार भी लगाई थी.

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