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HomeकहानियांDelhi High Court Blast: 7 सितंबर 2011 ब्लास्ट के काले दिन की पूरी दास्तां

Delhi High Court Blast: 7 सितंबर 2011 ब्लास्ट के काले दिन की पूरी दास्तां

delhi high court blast
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7 सिंतबर 2011 का वो दिन जिसको कई परिवार कभी नहीं भूल सकते. आज इस हमले को पूरे 10 साल बीत चुके हैं लेकिन उन परिवारों का दर्द आज भी ताजा है. अपनों को खोने का गम भला कोई भूल भी कैसे सकता है. ये दिन इन परिवारों की जिंदगी में वो काली रात लेकर आया जब इन्होंने अपनों को अपनी आंखों के सामने एक बम ब्लास्ट में अलविदा कह दिया. दरअसल हम बात कर रहे हैं दिल्ली हाई कोर्ट बम ब्लास्ट 2011 की. आज हमारे इस खास सेग्मेंट आपको इसी काले की दिन की कहानी सुनाएंगे. इस दिन और उन रोते बिलखते परिवारों की कहानी जिनकी चीखें आज भी लोगों के कानों में सुनाई देती हैं.

हाईकोर्ट परिसर में नहीं थे सीसीटीवी कैमरे

11 सितंबर 2011 सुबह के 10 बजकर 14 मिनट दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court Blast) के गेट नंबर 4 और 5 बम धमाकों से दहल उठे. हाईकोर्ट के परिसर में एंट्री करने के लिए इंतजार कर रहे 100 से 200 लोग और उनके साथ कई वकील भी मौजूद थे. बम विस्फोट के बाद अचानक से कोर्ट परिसर में चल रही चहल पहल भगदड़ में तब्दील हो गई. चारों तरफ एंबुलेंस, मीडिया के कैमरे और खाकी वर्दी में सिर्फ पुलिस वाले नजर आ रहे थे.

इस बम विस्फोट में 17 लोगों की मौत और 80 लोग घायल हुए. शुरुआत में ही लोगों के मारे जाने की खबर आ चुकी थी और इस खबर से राजधानी का माहौल एकदम बदल गया लेकिन धीरे-धीरे मौत का ये आंकड़ा बढ़ने लगा और जल्द ही मरने वालों की संख्या 17 हो गई. धमाकों की प्लानिंग इस तरफ इशारा कर रही थी कि ये काफी सोची समझी साजिश है क्योंकि उस दिन बुधवार था और बुधवार को पीआईएल दाखिल करने का दिन होता है तो इस दिन बाकी दिनों से ज्यादा भीड़ थी. हाई सुरक्षा क्षेत्र होते हुए भी वहां उस समय तक कोई सीसीटीवी कैमरे भी नहीं थे.

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ये एक हाई इंटेंसिटी ब्लास्ट था. पहली नजर में ये एक आतंकी संगठन द्वारा स्थापित किया गया आईडी लग रहा था. राजधानी दिल्ली में 2008 के बाद हुआ ये सबसे खतरनाक आतंकी हमला था. ये विस्फोट इतना भीषण था कि धमाके की जगह पर लोगों के शरीर के आतंरिक हिस्से भी पड़े हुए नजर आ रहे थे. धमाके के बाद कई लोगों ने उन्हें सुनाई ना देने की भी शिकायत की. तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिंदबरम ने इसे आतंकवादी हमला बताया. इसके बाद हमले वाली जगह पर तीन से चार फुट गहरा गड्ढा हो गया था. पी.चिदंबरम ने कहा कि हमले के पीछे किस गुट का हाथ है ये पहचान करना मुमकिन नहीं है. इस विस्फोट के बाद खून से लथपथ कपडों में वकील और मुक्किल इधर-उधर भागते हुए दिखाई दिए. 

इस विस्फोट को देखने वाले एक चश्मदीद ने दावा किया विस्फोट के चंद पहले व्हाइट शर्ट में एक शख्स एक ब्रीफकेस में हाथ में लिए हुए नजर आया था. धमाके की जांच एनआईए यानि नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी को सौंप दी गई. इस धमाके की जांच के लिए एक 20 सदस्यीय टीम बनाई गई. हालांकि आज तक भी ये पता नहीं चल पाया कि इस विस्फोट में किस संगठन या किस व्यक्ति का हाथ था. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह देर शाम घायलों से मिलने बांगलादेश से वापस लौटते हुए एयरपोर्ट से सीधे अस्पताल पहुंचे और उनका हाल जाना.

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