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आखिर, बांग्लादेश के निर्माण में पाकिस्तान चुनाव महत्वपूर्ण क्यूँ ?

Bangladesh
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पाकिस्तान की चालाकियों की वजह से भारतीय सैनिकों को शुरुआत से ही युद्ध का आगाज करना पड़ा। जबकि, 1965 में भारत-पाकिस्तान के बीच लड़ा गया युद्ध अनिर्णायक साबित हुआ। पाकिस्तान हमेंशा से अपनी नापाक साजिशों का स्वयं ही शिकार रहा है। वहीं 1971 का युद्ध भी पाकिस्तान के नापाक इरादों का ही कारण रहा है। फिर चाहे वो काश्मीर पर कब्जा करना हो, या फिर जेसलमर पर कब्जा करना हो या भारतीय सीमा को लांघना, घुसपैठियों पनाह देना जैसे कई नापाक इरादों का पाकिस्तान ने सहारा लिया।

बंगाल की अस्मिता का खंडन: 

1971 में पाकिस्तान ने बंगबंधु के नेतृत्व का विरोध किया था, और बंगाल की अस्मिता को बहरेमी से कुचल दिया था। 1 करोड़ से जादा शरणार्थियों के काफिले को देख भारतीय सैन्य पाकिस्तान के खिलाफ कार्यवाही करने पर मजबूर हो गई थी। पाकिस्तान की रचना के साथ ही शेख मुजीबुर रहमान उर्फ बंगबंधुओं ने पूर्व पाकिस्तानी स्वायत्ता के लिए विद्रोह शुरू कर दिया था। इस विद्रोह को दबाने के लिए बंगबंधु और अन्य बंगाली नेताओ पर बँटवारे का आंदोलन चलाने केस थोप दिया। बगबंधुओं द्वारा छः सूत्रीय कार्यक्रम पकिस्तानियों की आँखों में विद्रोह खटक रहा था। शेख मुजीबुर रहमान पूर्व पकिस्तानी लोगों के लिए हीरो बन चुके थे, इस वजह से पाकिस्तान खुद ही अपनी चाल में फस गया, बगबंधु के खिलाफ उनकी अस्मिता का खंडन का षडयन्त्र नाकाम साबित हुआ। बंगबंधुओं के खिलाफ किए गए केस को वापस लेना पड़ा।

यह वीडियो जरूर देखें: शेख मुजीबुर रहमान और भारतीय हस्तकक्षेप

मुजीबुर रहमान की पार्टी ने पूर्वी पाकिस्तान में 169 में से 167 बेठकों पर जीत हाँसील की थी। 313 बैठकों वाली पाकिस्तानी संसद में मुजीबुर के पास खुद की सरकार बनाने के लिए अत्यधिक बहुमती थी। इस तरह 1970 में हुई पाकिस्तानी चुनाव बांग्ला देश के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई। लेकिन पाकिस्तान के शासकों ने इसका विरोध किया, विद्रोह को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना टुकड़ी के साथ टूट पड़ी। उसी दौरान 26 मार्च 1971 में मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं पाकिस्तानी सेना द्वारा चलाए गए इस दमन चक्र में कई बेगुनाह शहीद हुए। काम से काम एक वर्ष समय अंतराल में करोड़ों शरणार्थी पाकिस्तान छोड़कर पश्चिम बंगाल की गमन शुरू कर दिया। पाकिस्तानियों की ऐसी शर्मनाक हरकतों को देखकर भारतीय सेना- पाकिस्तान के खिलाफ कार्यवाही करने पर मजबूर हो चुकी थी।

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भारतीय संसद द्वारा पूर्व बंगाल को मदद की घोषणा

शरणार्थीयों की ऐसी दयनीय स्थिति को देख 31 मार्च 1971 के दिन संसदीय भाषण में इंदिरागांधी ने पूर्व बंगालियों की मदद का जिक्र किया गया और 29 जुलाई 1971 के दिन भारतीय संसदने सार्वजनिक रूप से पूर्व बंगाल के लोगों की मदद का एलान किया। घोषणा पत्र जाहिर होते ही भारतीय सेना ने युद्ध की तैयारियां शुरू कर दी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरागांधी ने ऑक्टोबर-नवंबर, 1971 में अपने सलाहकारों के साथ यूरोप और अमेरिका का दौरा लिया, अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निकसन्न के साथ मुलाकात में काफी चर्चाएं हुई। इंदिरागांधी ने बात-चीत में पाकिस्तान की विस्फोटक स्थिति का जिक्र किया। अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ देते हुए सैन्य सरकार को दो साल का वक्त देने की चर्चा की। लेकिन इंदिरागांधी ने पाकिस्तान में मुजीबुर रहमान की गिरफ़्तारी और वहाँ चल रहे विद्रोह को ध्यान में रखते हुए बताया कि ऐसी परिस्थतियों को देख एक साल का समय काफी लंबा है, और अगर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो भारतीय सेना कार्यवाही करने में पीछे नहीं हटेगी। क्यूंकी पश्चिमी पाकिस्तान में रेलियाँ और भारत के सामने सैन्य कार्यवाही की मांग की जा रही थी। भारतीय सेना पश्चिमी बॉर्डर पर एलर्ट थी। 1971 के दिन पाकिस्तान के उम्मेदवारों ने अपनी सेनाओं को युद्ध के लिए चौकन्ना कर दिया था, और युद्ध का आदेश जारी कर दिया था। भारतीय सेना द्वारा शुरू बंगाल की सुरक्षा की व्यस्था शुरू हुई, और उनके हक की लड़ाई का आगाज हो गया। 

मुद्दे की बात: वैसे तो पाकिस्तान खुद अपनी ही चालों  में युद्ध का आगाज कर  फँसता गया। आगे की ऐसे रोचक मिशन, ऑपरेशनों और भारतीय जवानों के बलिदानो की गाथा को जानने के लिए बने रहें OTT India के साथ..  

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