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Homeभक्तिDhanteras 2021: इस मुहूर्त में करें पूजा-अर्चना, होगी सुख समृद्धि में वृद्धि

Dhanteras 2021: इस मुहूर्त में करें पूजा-अर्चना, होगी सुख समृद्धि में वृद्धि

Dhanteras 2021
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भारत देश में दिवाली सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है, देश के सभी राज्यों में त्योहार धूम-धाम से मनाया जाता है। दिवाली का त्योहार 5 दिनों तक मनाया जाता है- धनतेरस, कालीचौदस, दिवाली, नववर्ष, भाई दूज और लाभ पाँचम इस तरह से पाँच दिनों तक मनाया जाता है। आइए जानते हैं धनतेरस का महत्व क्या है? इस वर्ष किस मुहूर्त में करें पूजा?

धनतेरस का महत्व:- (Importance of Dhanteras)

धनतेरस का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन मनाया जाता है। धनतेरस का अर्थ है- धन यानी सुख-समृद्धि पूंजी और तेरस यानी तेरह, अर्थात धन की तेरह गुना वृद्धि। धनतेरस के दिन कुबेर भण्डारी, धन्वंतरि, माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धनतेरस संपत्ति में वृद्धि का दिन माना जाता है। इस दिन सोने चांदी के गहने और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है और घर का भंडार हमेंशा भरा रहे ऐसे सुख समृद्धि की पूजा की जाती है। 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कृष्ण त्रयोदशी के दिन ही समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरी अपने हाथों में कमल लेकर प्रकट हुए थे। परंपराओं के अनुसार धनतेरस के दिन सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन , वाहन और प्रॉपर्टी आदि चीजें खरीदने की परंपरा चली आ रही है। दिवाली से 2 दिन पहले धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन 13 दिपक प्रज्वलित किया जाते हैं। 

Dhanteras 2021

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Dhanteras 2021: (शुभ मुहूर्त) 

इस वर्ष धनतेरस 2 नवंबर 2021 मनाया जाएगा, धन्वंतरि की पूजा करने का शुभ मुहूर्त शाम 5:42 से शाम 7:31 बजे तक रहेगा।

  •  त्रयोदशी यानी धनतेरस सुबह 11.31 से शुरू होकर 3 नवंबर, 2021 को सुबह 9.02 बजे तक रहेगा,
  • प्रदोष काल- शाम 4:58 से 7:31 बजे तक रहेगा,
  • वृषभ काल- शाम 5:42 से शाम 7:41 बजे तक रहेगा।

यहां पढ़ें: अरावली की पर्वत श्रेणियों पर स्थित देवराजधाम का बड़ा रोचक है इतिहास, ऐसे पड़ा धाम का नाम

kuber bhandari

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इन विधियों से करें पूजा:- (How to do Dhanteras Pooja)

  • नित्यकर्म की पूजा निपटाकर धनतेरस की पूजा में लग जाएं,
  • घर की ईशान दिशा में ही पूजा आसान तैयार करें,
  • सूर्यदेव, श्रीगणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु भगवान की स्थापना करें
  • शांति और शुद्ध मन से पूजा करें
  • धन्वंतरि देव की षोडशोपचार या 16 क्रियाओं से पूजा करें, 
  • जिनमें पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नेवैद्य, आचमन, ताम्बुल, स्तवपाठ, तर्पण और नमस्कार.
  • पूजन सामग्री में चंदन, कुमकुम, अबीर, गुलाल, हल्दी, तुलसी के पान सभी सामग्रियों का उपयोग करें
  •  धन्वं‍तरि देव के सामने धूप, दीप प्रज्ज्वलित कर हल्दी, कुमकुम, चंदन और चावल का तिलक लगाएं,  
  • फूल हार की मला चढ़ाएं, भगवान को घर के बना शुद्ध खान और मिठाई का भोग चढ़ाएं, 
  • घर को तोरण और रंगोली से सजायें, लक्ष्मी के प्रवेश के लिए घर के खिलड़ी दरवाजे खुले रखें।  

देखें यह वीडियो: कुबेर भण्डारी मंदिर का रोचक इतिहास 

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