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Homeभक्तिसभी साधु एक समान नहीं होते क्या आप ऋषि, मुनि, महर्षि और साधुओं में अंतर जानते हैं

सभी साधु एक समान नहीं होते क्या आप ऋषि, मुनि, महर्षि और साधुओं में अंतर जानते हैं

rishi muni
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धर्मशास्त्र में अगर आपकी रूचि हो तो आपने ऋषि(Rishi), मुनि(Muni), महर्षि(Maharshi) और साधुओं(Sadhus) के बारे में पढ़ा होगा. अगर आपने नहीं पढ़ा तो ऋषि वशिष्ठ, भृगु ऋषि, महर्षि विश्वामित्र, नारद मुनि और संत तुलसीदास का नाम जरूर सुना होगा. क्या कभी आपने ये सोचने की कोशिश की कि आखिर जब सभी साधु हैं तो इनके नाम के आगे अलग-अलग उपनाम क्यों हैं. दरअसल इसके पीछे भी वजह हैं, आज उसी वजह के बारे में आपको बताएंगे और ये समझने की कोशिश करेंगे कि आखिऱ इनमें क्या अंतर है.

ऋषि का मतलब क्या है

सबसे पहले जानते हैं कि ऋषि(Rishi) किन्हें कहा जाता है. ऋषि का मतलब वैसे व्यक्ति से है जिसने सैकड़ों सालों की तपस्य कर खुद को परमात्मा में लीन कर लिया हो, सभी तरह का ज्ञान हासिल कर लिया हो. लोभ, क्रोध और मोह जैसी चीजों पर विजय प्राप्त कर लिया हो और सबसे बड़ी बात यह ऋचाओं की रचना करना जानते हों. इन्हें वर्तमान के साथ-साथ भूत, भविष्य का ज्ञान होता था. यह गृहस्थ आश्रम में रहते हुए सभी चीजों को संतुलित रखना जानते थे. भृगु ऋषि(Bhrigu Rashi) ने कई श्लोकों की रचना की है.

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Image Courtesy: Google.com

महर्षि और मुनि कौन हैं

अब जानते हैं कि महर्षि कौन हैं. महर्षि का मतलब महा ऋषि से है. मतलब इन्हें ऋषियों की तुलना में अलग ज्ञान होता था. जहां ऋषि का ज्ञान चक्षु जाग्रत होता था तो वहीं महर्षियों का दिव्य चक्षु जाग्रत हो जाता था. यह अपने जीवन काल में मोह-माया से पूरी तरह से विरक्त होते थे. मतलब यह गृहस्थ आश्रम से नहीं आते थे.

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ऋषि और महर्षि(Maharshi) के बाद अब जानते हैं कि आखिर मुनि कौन हैं. मुनि(Muni) का मतलब मौन रहने है, वेदों और ग्रंथों का ज्ञान प्राप्त करने वाले ऐसे ऋषि जो या तो मौन रहते हों या कम बोलते हुए भगवान के भजन में लीन रहते हों उन्हें मुनि कहा जाता था.

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Image Courtesy: Google.com

साधु-संत और योगी का क्या मतलब है

इनके अलावा साधु(Sadhu), संत और योगी(Yogi) शब्द का भी ठीक इसी तरह अलग-अलग मतलब है. साधु वह है जो साधना में लीन है, इसके लिए किसी वेद के पाठ की जरूरत नहीं है. वहीं संत वह है जो सत्य का आचरण करता है. जबकि योगी वह है जो योग का आचरण करता है. मतलब अलग-अलग साधु-संतों के लिए इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग शब्दों के अपने मतलब हैं, इसलिए कभी भी एक ही शब्द हर किसी के लिए इस्तेमाल न करें. 

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