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Homeहेल्थआइए जानते हैं, कैसे भारतीय रसोई है हमारा आधा चिकित्सालय!

आइए जानते हैं, कैसे भारतीय रसोई है हमारा आधा चिकित्सालय!

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आयुर्वेद में कहा गया है कि हमारी रसोई हमारा आधा चिकित्सालय या अस्पताल है । क्योंकि रसोई में उपयोग में लाए जाने वाले मसालों में ऐसे औषधीय गुण हैं जिनका सेवन हमें सेहत रूपी धन प्रदान करता है।  जी हां दोस्तों,  ऐसा ही एक मसाला है-  अजवाइन या कैरम सीड। (Carom Seed)

अजवाइन का कद काफी छोटा लेकिन गुणों में कई गुना ऊंचा  

अजवाइन का कद 60 से 90 मीटर

वैसे तो यह मिस्र से आया है , लेकिन यह  भारत ,पाकिस्तान,  अफगानिस्तान,  इराक में भी पाया जाता है । भारत में मध्य प्रदेश. गुजरात.  राजस्थान और महाराष्ट्र में इसकी खेती की जाती है। यह  ऐसा पौधा है जिसे हर साल बोना पड़ता है,  इसका  कद 60 से 90 मीटर तक ही है , लेकिन गुणों में यह अपने कद से कई गुना ऊंचा है।  यह ऐसा मसाला है जिसमें थाईमोल नाम का रसायन पाया जाता है,  जिससे इसका स्वाद तीखा होता है, और यही रसायन इसे सर्दी -जुकाम, अस्थमा को दूर करने वाला वैद्य बना देता है।

अजवाइन में पाया जाता है ‘थाईमोल (thymol) नाम का रसायन’ 

अजवाइन में थाईमोल नाम का रसायन पाया जाता है, जिस वजह से यह स्वाद में तीखा होता है। यही रसायन हमें सर्दी जुकाम से बचाता है। वर्तमान समय में कोरोना वायरस  के संक्रमण  में अजवाइन के साथ तुलसी, अदरक, दालचीनी, लौंग और काली मरी डालकर बनाया गया काढा सबसे बड़ा इम्यूनिटी बूस्टर अर्थात रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला साबित हुआ है। यह  पोषक और रोग निवारक इसलिए है क्योंकि इसमें फाइबर, कार्बोहाइड्रेट,  ग्लाइकोसाइड,  प्रोटीन,  वसा,  फास्फोरस, कैल्शियम , आयरन,  निकोटिन एसिड युक्त खनिज पदार्थ , सोडियम,  पोटेशियम आदि तत्व पाए जाते हैं।

एंटी एजिंग गुण है मौजूद

इम्यूनिटी बूस्टर (Immunity Booster) अर्थात रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में असरकारक 

 इसमें कई एंटी एजिंग (Anti-aging) गुण मौजूद है। साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट (anti oxidants), एंटी कैंसर (anti cancer), एंटीबायोटिक (antibiotic), एंटी इन्फ्लेमेट्री गुण जहां फेफड़ों को स्वस्थ रखते हैं वहीं  त्वचा संबंधी रोग, चेहरे पर कील मुंहासे,  दाद जैसे त्वचा संक्रमण को दूर करने में भी मदद करते हैं, जिसके लिए अजवाइन के तेल में नींबू का रस (Lemon Juice) मिलाकर कुछ देर तक लगाकर सामान्य पानी से चेहरा धो लेना पड़ता है।

 आर्थराइटिस, गठिया,  हड्डियों की सूजन अजवाइन का पानी या इसकी पत्तियों का रस पीने से दूर हो जाते हैं।

प्रसव के बाद अजवाइन के सेवन से कई फायदें 

अजवाइन के पानी का सेवन करना है जरूरी

अजवाइन को यदि रात भर भिगोकर सुबह खाली पेट वह पानी पिया जाए या यदि अजवाइन की पत्तियों को पानी में डालकर नहाया जाए तो  यह शरीर के सभी  दूषित तत्वों को निकालकर डिटॉक्स का काम करता है । यही कारण है कि प्रसव के बाद  (AFTER DELIVERY)  महिलाओं को गाय के गोबर से बनाएं कंडों या उपलों  के अंगारों पर अजवाइन डालकर उसका सेंक दिया जाता है , इससे उनकी मांसपेशियों का दर्द कम हो जाता है।

अजवाइन का सेवन अवश्य करें- किसी भी रूप में 

  •  वही यह धुआं श्वासनली और  नासिका छिद्रों को साफ कर देता है ।
  • स्तनपान( FEEDING)  कराने वाली स्त्रियों को नारियल , गुड और उसमें अजवाइन मिलाकर खिलाया जाए तो दूध -स्राव बढ़ता है और यह पोष्टिक दूध बच्चे के लिए बहुत ही लाभदायक होता है।
  •  मासिक धर्म (PERIODS)  के दौरान होने वाले दर्द में यह काफी लाभदायक है। क्योंकि  यह रक्तशोधक और रक्त प्रवाह को नियोजित कर देता है।
  • सरसों के तेल में अजवाइन और लहसुन डालकर थोड़ा गर्म कर ठंडा होने पर छानकर यदि कान में डाला जाए तो किसी भी प्रकार का दर्द एक ही पल में छूमंतर हो जाता है।
  •  अजवाइन के पानी में गुड़ डालकर गर्म कर गुनगुना होने पर पीने से गुर्दे की समस्या,  पथरी, यूरिन संबंधी समस्या,  अस्थमा से राहत मिलती है
  •  आज मोटापा सबसे बड़ी समस्या बनता जा रहा है , यदि रात भर आधा चम्मच अजवाइन भिगोकर सुबह गर्म कर शहद के साथ या केवल वही पानी खाली पेट पीने से वजन घटता है।
  •  यही अजवाइन शहद के साथ खट्टी डकार का शमन करता है,  वही काले नमक और नींबू के साथ गैस, अपच ,कब्ज आदि समस्याओं को दूर करता है।
  •  अजवाइन के बीजों  के जितने फायदे हैं वही फायदे  इसके पत्तों के भी  हैं।

 भारतीय रसोई में उन सभी पकवानों में अजवाइन का उपयोग किया जाता है जो पचाने में भारी होते हैं।  अजवाइन के पत्तों की पकौड़ी अति स्वादिष्ट होती है।

 पर्यावरणीय दृष्टि से देखा जाए तो अजवाइन का पौधा हवा को शुद्ध करने और आसपास भीनी खुशबू प्रवाहित करने में सक्षम है । इसके होने से आसपास का वातावरण बैक्टीरिया फ्री अर्थात रोगाणु मुक्त हो जाता है।

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इन सब के बाद आपको अपने बचपन की याद जरूर आ गई होगी जब दादी – नानी हमें बाहर जाने से पहले अजवाइन की पोटली जेब में रख देती थी।  हमारे बुजुर्ग हमसे ज्यादा शक्तिशाली हैं क्योंकि उन्होंने प्रकृति के हर तत्व को उसी रूप में स्वीकार किया जिस रूप में वह प्रकृति द्वारा दिया गया।

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