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महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण तो सारथी थे फिर उनके बड़े भइया बलराम कहां थे, क्या जानते हैं आप

Balram
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महाभारत के युद्ध(Mahabharat Yudh) में श्रीकृष्ण भगवान तो अर्जुन के सारथी थे फिर उनके बड़े भइया जिन्हे प्यार से दाऊजी भी कहते हैं, वह बलराम(Balram) कहां थे. क्या आपके जेहन में कभी ये सवाल उठा कि आखिर महाभारत के युद्ध में बलराम ने हिस्सा क्यों नहीं लिया. जब कुरुक्षेत्र में कौरव और पांडव आमने-सामने थे, रणभूमि में शंख और धनुष की टंकार के सिवा कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था उस वक्त बलराम जी तीर्थयात्रा(Tirthyatra) पर थे.

आखिरी समय में भीम को दंड देने की बात क्यों

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इसके पीछे भी वजह थी, लेकिन इस वजह को लेकर चर्चा ज्यादा तेज तब होने लगती है, जब दाऊजी दुर्योधन और भीम के गदायुद्ध के वक्त भीम(Bhim) को दंड देने की बात करने लगते हैं. ऐसे में ये दाऊजी(Dauji) का ये किस्सा काफी रोचक है कि अगर उन्होंने महाभारत के युद्ध में हिस्सा क्यों नहीं लिया और अगर नहीं लिया तो आखिरी समय में भीम को दंड देने की बात क्यों करने लगे.

Balram Krishna

Image Courtesy: Google.com

पांडवों के शिविर में बलराम

इस कहानी की शुरुआत होती है महाभारत युद्ध(Mahabharat Yudh) के शुरुआत से. जब पांडव और कौरव अपने-अपने शिविर में युदध की तैयारियां कर रहे होते हैं, जब हर किसी के तुणीर(बाण रखने वाला) में बाणों की श्रृंखला सजाई जा रही होती है, धनुष की टंकार और युद्ध की तैयारियां चरम पर होती हैं, तब अचानक से दाऊजी पांडवों(Pandav) के शिविर में प्रवेश करते हैं. धर्मराज युधिष्ठिर समेत सभी पांडव उन्हें ससम्मान शिविर में लेकर आते हैं.

Balram Mahabharat

Image Courtesy: Google.com

महाभारत के युद्ध के वक्त तीर्थयात्रा पर थे बलराम

शिविर में पहुंचते ही बलराम(Balram) कहते हैं कि मुझे पांडव और कौरव दोनों अति प्रिय हैं, मैंने श्रीकृष्ण को समझाया कि युद्ध में हिस्सा न ले, लेकिन अर्जुन के प्रति प्रेम और अन्य वजहों से वह खुद को युद्ध में शामिल होने से रोक नहीं पाया. लेकिन मैं इस युद्ध में शामिल नहीं हो सकता, क्योंकि अपने प्रियजनों को मैं युद्ध में लड़ता नहीं देख सकता और खासकर दुर्योधन और भीम तो मेरे शिष्य हैं, बता दें कि दुर्योधन और भीम ने बलराम से गदायुद्ध सीखा था. ऐसा कहकर बलराम तीर्थयात्रा पर चले गए.

दुर्योधन और भीम के गदायुद्ध के बीच पहुंचे थे बलराम

तीर्थयात्रा से जब बलराम(Balram) लौटे तो उस वक्त भी ये युद्ध खत्म नहीं हुआ था, बल्कि खत्म होने की कगार पर था. पांडवों को पांच गांव भी न देने की बात करने वाला दुर्योधन भीम से गदा युद्ध कर रहा था. इसी दौरान श्रीकृष्ण ने भीम को दुर्योधन(Duryodhana) की जांघ पर प्रहार करने का इशारा किया, चूंकि दुर्योधन को अगर उसके अलावा गदे से वार होता तो उसका कुछ नहीं होता क्योंकि उसका पूरा शरीर वज्र की तरह कठोर हो गया था. इसके पीछे भी एक कहानी है, खैर अभी इसी कहानी पर आते हैं.

bhim duryodhana yudh

Image Courtesy: Google,com

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श्रीकृष्ण के समझाने के बाद शांत हुआ था गुस्सा

श्रीकृष्ण(Shri Krishna) के इशारे के बाद भीम ने दुर्योधन को परास्त कर दिया लेकिन बलराम इसे देखकर गुस्से से आग बबूला हो उठे. उन्होंने कहा कि भीम ने छल से दुर्योधन को मारा है, इसलिए भीम को दंड दूंगा. तब श्रीकृष्ण ने कहा कि भइया बलराम, जब धर्म और अधर्म का युद्ध लड़ा जा रहा था तो आप तीर्थयात्रा पर चले गए थे, इसलिए अब आखिरी समय में जब आप पहुंचे हैं तो अधर्म के खिलाफ धर्म की जीत के फैसले को न बदलें. जिसके बाद बलराम मान गए.   

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