Ott India News Logo
Recent Posts
Connect with:
Tuesday / May 17.
Homeकहानियांआइए जानते हैं, हिन्दी के सुप्रसिद्ध व्यंगकार की कहानी!

आइए जानते हैं, हिन्दी के सुप्रसिद्ध व्यंगकार की कहानी!

हरिशंकर परसाई जी
Share Now

जब भी व्यंग की बात आती है हर किसी के जुबां पर सबसे पहला नाम हरिशंकर परसाई (Harishankar Parsai) जी का आता है। फिर वे चाहे आज के नौजवान हों या फिर बड़े बुजुर्ग, हर वर्ग के लोगों ने परसाई जी के कार्य को सराहनीय मानकर उनके पदचिन्हों पर चलने की कोशिश की है। आज का युग व्यंग को लेकर अत्यधिक उत्सुक रहता है। और बहोत से लोग व्यंग को चतुरता भी बताते हैं- सही शब्दों में कहें तो Intellectual व्यक्तियों में गिनती करते हैं। वैसे हो भी क्यूँ ना क्यूंकि परसाई जी अपने व्यंग (Sarcasm) में समाज का वह चेहरा सामने लाकर खड़ा किया है, जो मुह पर कुछ और असली मायनों में कुछ और होता है। उस समय के दौरान परसाई जी द्वारा किए गए व्यंग आज के समय में बिल्कुल सही बैठते हैं। 

आइए जानते हैं हरिशंकर परसाई जी के जीवन के बारे में और साथ ही जानेंगे उनके द्वारा व्यंग के रूप में पेश की गई समाज की समस्याएं और सच्चाई!

Image Credit: Google Image

हरिशंकर परसाई जी का परिचय-(Introduction of Harishankar Parsai)

हरिशंकर परसाई (Harishankar Parsai) हिंदी के प्रसिद्ध कवि और लेखक थे। हरिशंकर परसाई ने हिंदी साहित्य में मनोरंजन हसी मजाक से लेकर समाज की समस्याओं और और बुराइयों को बहुत ही बखूबी पेश किया है। परसाई जी ने 18 वर्ष की उम्र में जंगल विभाग में नौकरी की। उसके बाद खण्डवा में 6 महीने अध्यापक की नौकरी की। दो वर्ष (1941–43 में) जबलपुर में स्पेस ट्रेनिंग कालिज में शिक्षण कार्य का अध्ययन किया। 1943 से वहीं माडल हाई स्कूल में अध्यापक भी बने। 1952 में यह सरकारी नौकरी को छोड़ दिया।

  • जन्म: 22 अगस्त 1924, स्थान-जमानी (इटारसी के पास, मध्य प्रदेश)
  • मृत्यु: 10 अगस्त, 1995, जबलपुर)

एक और रोचक कहानी: आखिर क्यूँ, दिन प्रतिदिन बढ़ता गया ब्राह्मण का लोभ!

Image Credit: pustak.org

1957 में नौकरी छोड़कर स्वतन्त्र लेखन की शुरूआत

परसाई जी ने 1957 में नौकरी छोड़कर स्वतन्त्र लेखन की शुरूआत की। और फिर उन्होंने जबलपुर से ‘वसुधा’ नाम की साहित्यिक मेगेजीन पब्लिश की। नई दुनिया में ‘सुनो भइ साधो’, नयी कहानियों में ‘पाँचवाँ कालम’, और ‘उलझी–उलझी’ तथा कल्पना में ‘और अन्त में’ इत्यादि की रचना की। कई सारी कहानियाँ, उपन्यास एवं निबन्ध–लेखन के बावजूद वे मुख्यत: व्यंग्यकार के रूप में विश्व विख्यात हुए। वर्ष 1982 में उन्हें उनकी व्यंग्य रचना ‘विकलांग श्रृद्धा का दौर’ के लिए साहित्य अकादमी सम्मान से सम्मानित किया गया। परसाई जी एक जगह लिखते हुए कहते हैं कि, उन पर जिम्मेदारियाँ कई थी, लेकिन फिर भी वे डटकर कठिनाइयों का सामना करते। 

“गैर ज़िम्मेदारी इतनी कि बहन की शादी करने जा रहा हूं। रेल में जेब कट गई, मगर अगले स्टेशन पर पूरी-साग खाकर मज़े में बैठा हूं कि चिंता नहीं। कुछ हो ही जाएगा। और हो गया”। परसाई ने स्वयं अविवाहित रहते हुए अपने सभी भाई-बहनों की ज़िम्मेदारी का निर्वाह किया, पर उनके स्वयं का जीवन भी यातना-गर्भित व्यंग्य है। 

हरिशंकर परसाई जी सुप्रसिद्ध व्यंगकार:-‘पूछिये पारसाई से’

पूछो परशाई से Image Credit: pustak.org

विश्व विख्यात हरिशंकर परसाई जी के लिए ‘देशबंधू’ नाम के अख़बार में एक कॉलम बनाया गया था। वे हाज़िर जवाब थे और पाठकों के सवालों का जवाब भी मज़ेदार तरीके से देते थे। और उनके कॉलम का नाम था – ‘पूछिये पारसाई से’। जिसमें वो पाठकों के सवालों के मज़ेदार जवाब दिया करते थे। इसके अलावा हरिशंकर परसाई जी ने दूसरे विश्व युद्ध में पायलट के तौर पर सेवाएं दी थीं और ये वो वक्त था जब वो खाली बचे वक्त में लिखने का काम करते थे।

परसाई जी ने खोखली हो रही हमारी सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में लुटे-पिटे से खड़े नागरिक के सवालों को कहानी और किस्से की शक्ल दी। परसाई हिंदी के पहले साहित्यकार हैं, जिन्होंने व्यंग्य को विधा का दरजा दिलाया और मनोरंजन की परंपरागत परिधि से उबारकर समाज के व्यापक प्रश्नों से जोड़ा है। उनकी व्यंग्य रचनाएँ हमें उन सामाजिक वास्तविकताओं से रूबरू कराती हैं, जिनसे किसी भी व्यक्ति को लग रह पाना संभव नहीं है।

“कहानी लिखते हुए मुझे यह कठिनाई बराबर आती है कि जो मैं कहना चाहता हूं, वह मेरे इन पात्रों में से कोई नहीं कह सकता। तो क्या करूं? क्या कहानी के बीच में निबंध का एक टुकड़ा डाल दूं? पर इससे कथा प्रवाह रुकेगा”। 

उनके इसी अंदाज की वजह से परसाई जी को सबसे अधिक सफलता निबंध लेखन में ही मिली, न कि कहानियों में। हालांकि भोलाराम का जीव, कहानी हिन्दी की उत्कृष्ट व्यंग्य कहानियों में से एक है, जिसमें परसाई ने सरकारी कार्यालयों और लालफीताशाही पर अच्छा व्यंग प्रस्तुत किया है। 

आइए जानते हैं उनकी कुछ व्यंग रचनाओं के बारे में:-

हरिशंकर परसाई जी (Harishankar Parsai) की उसके दिन फिरे, दो नाकवाले लोग, हँसते हैं रोते हैं, भोलाराम का जीव जैसी कहानियाँ लिखी हैं। कहानी के अलावा परसाई जी ने तट की खोज, रानी नागफनी की कहानी, ज्वाला और जल जैसे उपन्यासों की रचना भी की। हमारे सामाजिक और राजनैतिक व्यवस्था में मध्यमवर्गीय लोगों की परिस्थिति को मन की सच्चाइयों को बहुत ही निकटता से प्रस्तुत किया है। 

एक और रोचक कहानी: वाणी कौए और हंस की – एक कहानी

आगे हम हरिशंकर परसाई जी की कृतियों, रचनाओं और कहानियों के बारे में विस्तृत से चर्चा करेंगें। तब तक के लिए बने रहें OTT India के साथ। 

देश दुनिया की खबरों को देखते रहें, पढ़ते रहें.. और OTT INDIA App डाउनलोड अवश्य करें..  स्वस्थ रहें.. 

अधिक रोचक जानकारी के लिए डाउनलोड करें:- OTT INDIA App

Android: http://bit.ly/3ajxBk4

iOS: http://apple.co/2ZeQjTt

No comments

leave a comment