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Durand Cup 2021: एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट का आगाज

Durand Cup Trophies
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एशिया का सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट  वापसी आ रहा है. कोलकाता में 5 सितंबर से शुरू होने वाले डूरंड कप (Durand Cup)2021 का 130वां संस्करण होगा जिसमें कुल 16 टीमों हिस्सा लेंगी. इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) कि पांच क्लब- बेंगलुरु एफसी, जमशेदपुर एफसी, केरला ब्लास्टर्स एफसी, हैदराबाद एफसी और एफसी गोवा – आई-लीग कि गोकुलम केरला एफसी, मोहम्मडन स्पोर्टिंग और सुदेवा दिल्ली एफसी के साथ प्रतिस्पर्धा करते नजर आएंगे. एफसी बेंगलुरू यूनाइटेड और दिल्ली एफसी भारतीय फुटबॉल के दूसरे डिवीजन का प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि भारतीय सेना की दो टीमें (रेड और ग्रीन) के साथ साथ भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना, सीआरपीएफ और असम राइफल्स की एक-एक टीम टूर्नामेंट की 16 टीमों को पूरा करेंगीं. इस साल का संस्करण हाल के सालों में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धा में से एक होगा. हालांकि कुछ बड़े नाम जैसे एटीके मोहन बागान, पूर्वी बंगाल और मुंबई सिटी एफसी गायब हैं.

दुनिया के सबसे पुराने सक्रिय फुटबॉल टूर्नामेंट इंग्लैंड में पहली बार एफए कप के केवल 17 साल बाद शुरू हुआ डूरंड कप एक सदी से भी अधिक समय से भारतीय फुटबॉल का एक अभिन्न स्तंभ रहा है. डूरंड कप में कुछ ऐतिहासिक पल देखे गए हैं. सर मार्टिमर डूरंड ने इस टूर्नामेंट को ब्रिटिश ट्रूप्स के मनोरंजन के लिए शुरू किया था. पहले साल में 6 ब्रिटिश रेजीमेंट और 2 स्कॉटिश रेजिमेंट ने इसमें भाग लिया था. उसके बाद अगले 52 सालों तक इस टूर्नामेंट को शिमला में खेला गया. आर्मी के बीच खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट में पहली बार 1922 में मोहन बगान ने ज्वाइन किया. किसी सिविलियन क्लब ने ये ट्रॉफी पचास साल बाद जीती. लेकिन साल 1940 में मोहम्मडनस्पोर्टिंग क्लब ने रॉयल वारविकशायर रेजिमेंट को 2-1 से हराया और ये ऐतिहासिक जीत इंडियन फुटबॉल के भविष्य में एक बड़ा मोड़ साबित हुई. कोलकाता की दो दिग्गज टीम ईस्ट बंगाल और मोहन बागान प्रतियोगिता में सबसे प्रमुख टीमें रही हैं, जिन्होंने अबतक 16 खिताब जीते हैं. इस टूर्नामेंट ने भारतीय फुटबॉल के कुछ खिलाड़ीयों को स्टार बनने का मौका दिया है जिसमें युवा बाईचुंग भूटिया सबसे बड़े नामों में से एक हैं, जिन्होंने 1993 के डूरंड कप सेमीफाइनल में बीएसएफ के खिलाफ पूर्वी बंगाल के लिए एक विजेता के तौर पर शीर्ष स्तरीय भारतीय फुटबॉल में अपने शामिल होने की घोषणा की थी. हालाँकि, ये टूर्नामेंट, 2000 के दशक के मध्य से धीरे-धीरे अपनी चमक खोने लगा, जिसका कारण था बड़े क्लब का भाग ना लेना या अपनी कमजोर टीम भेजना.

2015 से 2018 के बीच केवल एक बार 2016 संस्करण काआयोजन किया गया . इससे पहले, डूरंड कप को केवल युद्धों और बड़े राजनीतिक प्रभावों की घटनाओं के कारण ही स्थगीत किया गया था. (विश्व युद्ध 1 के लिए 1914-1919, द्वितीय विश्व युद्ध के लिए 1939, द्वितीय विश्व युद्ध के कारण 1941-1949 और भारत के विभाजन दौरान और 1962 में भारत -चीन युद्ध के कारण इसका आयोजन नहीं हो सका था.

कुछ खास बातें

डूरांड कप इकलौता ऐसा टूर्नामेंट है जहां विनर को 3 ट्रॉफी मिलते हैं. डूरंड कप, वाइस-रोय ट्रॉफी और शिमला ट्रॉफी. 2016 में आखिरी बार खेले गए इस कप को ‘नो सूटेबल डेट्स’ के कारण बंद कर दिया गया था.टूर्नामेंट की मेजबानी पश्चिम बंगाल सरकार संयुक्त रूप से कर रही है. मेजबानी राज्य के तीन प्रमुख फुटबॉल मैदान करेंगें .

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2019 में आखिरकार इसकी वापसी हुई. डूरंड कप को उसका खोया हुआ गौरव वापस लौटाने और एक सक्रिय प्रयास के तहत यह टूर्नामेंट गोकुलम केरल एफसी के साथ उम्मीदों पर खरा उतरा, जिसने कई आईएसएल क्लबों के साथ-साथ कोलकाता के दो दिग्गजों को हराकर एक बेहद मनोरंजक प्रतियोगिता के बाद इस खिताब को जीता. COVID-19 महामारी के कारण 2020 संस्करण को रद्द करने के बाद, 2021 संस्करण डूरंड कप की खोई हुई विरासत को पुनः प्राप्त करने की तलाश में होगा.

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