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जानें पुत्रदा एकादशी का महत्व, पूजा विधि और व्रत कथा, आखिर क्यों कहते हैं इसे पुत्रदा एकादशी

ekadashi in january 2022
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Ekadashi In January 2022: साल के 12 महीने में यूं तो 24 एकादशी के व्रत होते हैं, हर व्रत का अपना अलग महत्व होता है. एक ऐसी ही एकादशी है पुत्रदा एकादशी, जिसके नाम में ही इस व्रत का फल छिपा है. मतलब ये कि पौराणिक मान्यताओं की मानें तो इस व्रत के प्रभाव से संतान की प्राप्ति होती है. इसे पुत्रदा एकादशी(Putrada Ekadashi) क्यों कहा जाता है और इसकी व्रत कथा क्या है और इस बार ये व्रत कब रखा जाएगा, इस बारे में जानते हैं.

पुत्रदा एकादशी का व्रत इस बार 13 जनवरी 2022 को रखा जाएगा. पौष माह(Paush Month) की शुक्ल पक्ष की एकादशी(Ekadashi) तिथि को ये व्रत पड़ता है. इस बार एकादशी तिथि की शुरुआत 12 जनवरी शाम 4.49 बजे से हो रही है और अगले दिन 13 जनवरी शाम 7.32 तक रहेगी. मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि कर विष्णु भगवान(Lord Vishnu) की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए. वहीं दूसरे दिन यानि 14 जनवरी सुबह 7 बजे के बाद श्रद्धालु पारण कर सकते हैं, साथ ही पुत्रदा एकादशी पर इस कथा को पढ़ना या सुनना चाहिए.

purnima in january 2022

Image Courtesy: Canva.com

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

द्वापर युग में महिष्मती नाम के राज्य में शासन करने वाले राजा के पास समस्त धन-वैभव था लेकिन संतान न होन की वजह से राजा और उनकी रानी बेहद दुखी रहते थे. हालांकि खुद उदास होने के बावजूद भी वह प्रजा का बेहद ख्याल रखते थे. हालांकि एक समय ऐसा भी आया जब राजा को लगा कि वंश न होने की वजह से समस्त साम्राज्य खत्म हो जाएगा, राजा के सामने उत्तराधिकार की समस्या खड़ी हो गई. उसके बाद राजा ने ऋषि-मुनियों से इसका उपाय पूछने के बारे में सोचा.

ऋषि ने पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की दी सलाह

ऐसा विचार कर राजा ऋषि के पास पहुंचे और उन्हें अपनी परेशानी बताई. जिसके बाद ऋषि ने कहा हे राजन्, पौष माह की शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि का व्रत करने से आपकी समस्या दूर हो जाएगी और साथ ही भगवान आपको संतान प्रदान करेंगे.

cry infront of god

Image Courtesy: Google.com

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ऋषि की बात मानकर राजा ने एकादशी(Putrada Ekadashi 2022) तिथि का नियमपूर्वक व्रत किया और पारण किया. इसके कुछ ही दिनों बाद रानी गर्भवती हुई और 9 महीने बाद राजा को पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई. कहते हैं कि नियम पूर्वक यह व्रत करने से न सिर्फ संतान की प्राप्ति होती है बल्कि भगवान सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण करते हैं.

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