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जानिए भारत में कब हुई पटाखों की शुरुआत, इस राज्य में होता है पटाखों का निर्माण

Find out when firecrackers started in India, firecrackers are made in this state
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Firecrackers Origin: दीवाली और पटाखे इन दोनों शब्दों का इस्तेमाल हमेशा एक साथ किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पटाखों की शुरुआत कब हुई. और कहां से हुई और ये  भारत कैसे पहुंचे, तो आइये दीवली के मौके पर जानते हैं पटाखों के भारत पहुंचने की कहानी?

इतिहासकारों की मानें तो पटाखों की शुरुआत चीन में हुई थी. छठी सदी में पटाखों की शुरुआत हुई. लेकिन पटाखों की खोज के पीछे एक दुर्घटना बताई जाती है. सालों पहले चीन में एक ऐसी घटना हुई जिसपर यकीन कर पाना थोड़ा मुश्किल था . दरअसल चीन में एक रसोई में खाना बनाने वाले ने जब आग में सॉल्टपीटर यानी पोटाशियम नाइट्रेट फेंका तो आग की लपटें और फिर इसके साथ को सल्फर और कोयला मिलाने से यहां धमाका हुआ. तबही वो मौका था जब पटाखों की शुरुआत हुई थी.

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13 सदी के बाद पटाखे चन से बाहर निकले और 15वीं सदी तक पटाखों ने भारत में एंट्री ली. इसलिए पटाखों का इतिहास भारत में 15वीं सदी से भी पुराना बताया जाता है.

इसलिए भारत पटाखे (Firecrackers Origin) बनाने में दूसरे नंबर पर आता है. आपने हमेशा पटाखों के पैकेट्स  में शिवाकाशी प्रिंटेड बना देखा होगा. चलिए आपको बताते हैं कि पटाखों के पैकेट्स पर शिवाकाशी क्यों लिखा होता है।

दरअसल शिवाकाशी है दक्षिण भारत में तामिलनाडू के एक शहर का नाम. जो चेन्नई से महज 500 किलोमीटर की दूरी पर है. भारत के सबसे ज्यादा पटाखे इसी शहर में  बनाएं जाते हैं. तामिलनाडू के इस शहर में पटाखों की करीब 800 फैक्ट्रियां हैं. जहां से देश के कुल उत्पादन का 80 प्रतिशत हिस्सा तैयार होता है. पटाखों के कारोबार से यहां लाखों लोगों का कारोबार जुड़ा है।

इसलिए हर दीवाली के मौके पर पटाखों का एक खास महत्तव रहा है. पटाखे इस त्योहार में रौनक लाते हैं बच्चे हो या बड़े हर कोई पटाखों के जरिए इस त्योहार को मनाता है.

 

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