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Homeनेचर एंड वाइल्ड लाइफक्या इंसान डाल रहे है जुगनुओ पर प्रभाव

क्या इंसान डाल रहे है जुगनुओ पर प्रभाव

firefly
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समग्र विश्व में जुगनुओ की लगभग 2000 प्रजाति पाए जाती है.  उसमे से सिर्फ भारत में 7 प्रजाति पाए जाती है. जुगनू(firefly) कीटकों की दुनिया का एक लोक प्रिय जीव माना जाता है. ज्यादातर बारिश के पहले ही जुगनू(firefly) दिखने की सम्भावना रहती है.अगर आप पहाड़ो पर, जंगलो में, तालाब के किनारे जायेंगे तो आपको जरूर ही जुगनू(firefly) दिखेंगे.

ज्यातर जुनगुओ(firefly) का आकार ज्यादा बड़ा नहीं होता. वे लगभग 15 MM से 25MM तक के होते है.  2000 से ज्यादा प्रजाति होने के कारण, एक से दूसरे प्रजाति में उनका व्यवहार, चमकने की शैली, रौशनी के रंग इत्यादि परिवर्तित होते रहते है. 

firefly

Image-WIKIPEDIA

रोशनी का प्रयोग जुगनू(firefly) अपने साथी को आकर्षित करने के लिए करते हैं. नर और मादा जुगनुओं(firefly) से निकलने वाले प्रकाश के रंग, चमक और उनके दिपदिपाने के समय में थोड़ा-सा अंतर होता है. इनमें ख़ास बात यह है कि मादा जुगनू (firefly) के पंख नहीं होते. मादा एक स्थान पर ही बैठकर चमकती रहती हैं. जबकि नर जुगनू उड़ते हुए चमकते हैं.

जुगनुओं (firefly)  के चमकने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य अपने साथी को आकर्षित करना, अपने लिए भोजन तलाशना होता है. जुगनू शहरों में कम ही दिखते हैं. इन्हें ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में देखा जा सकता है.

वर्ष 1667 में इस चमकने वाले कीट की खोज हुई थी. पहले यह माना जाता था कि जुगनुओ के शरीर में फास्फोरस (Phosphorus) होता है. जिसकी वजह से यह चमकते हैं. परंतु इटली के वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया कि जुगनू की चमक फास्फोरस से नहीं, बल्कि ल्युसिफेरेस नामक प्रोटीनों के कारण होता है.

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firefly

Image-Nepalitimes

जिनमें से कुछ प्रजातियां पृथ्वी के ऊपर और कुछ समुद्र की गहराइयों में पाई जाती हैं. अंटार्टिका को छोड़कर जुगनू पूरी दुनिया में पाए जाते है. ज्यादातर वे उष्णकटिबंधीय क्षेत्र (Tropical Region) में पाए जाते है. और उस हर स्थान पर देखे जा सकते है जहा पर नमीं रहती है जैसे की जंगलो में, तालाबों के किनारे इत्यादि. भारत उष्णकटिबंधीय देश होने के कारण, यहां जुगनू भरपूर मात्रा में पाए जाते है .

जुगनुओ (firefly) के शरीर के अंदर लुसिफेरा नामक एक रसायन होता है. जो ऑक्सीजन के साथ क्रिया करता है. क्रिया करने के दौरान लुसिफेरा नामक उत्प्रेरक मौजूद होता है और उसी के उपस्थिति में ही क्रिया होती है. उस अभिक्रिया में उच्च ऊर्जा निकलती है और वह ऊर्जा लाइट (Light) के रूप में बाहर आती है.

इस प्रकार हमें जुगनू चमकते हुए दिखते है. इस पूरी प्रक्रिया को बायोलुममिनेसेन्स (bioluminescence) कहते है. इस प्रक्रिया का ऑक्सीजन पर निर्भर होने के कारण जुगनुओ का चमक पर पूरा नियंत्रण होता है अर्थात जितनी मात्रा में वे ऑक्सीजन लेते है उसी के अनुसार चमक उत्सर्जित होती है.

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इंसान ने पृथ्वी पर कीटको की दुनिया को तबाह करना शुरू कर दिया. इससे कीटो के पारिस्थिति की तंत्र (Ecosystem) पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है. मुंबई से 220 K.M दूर पुरुषवादी में वार्षिक उत्सव वन्यजीव यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चूका है और तो और महाराष्ट्र भारत की जुगनू राजधानी के रूप में तेज़ी से उभर रहा है.

पर्यटकों का टोर्च (Flashlight) जुगनुओ को भ्रमित करता है क्योकि वे चमक के माध्यम से ही एक दूसरे से संवाद करते है. और मादा जुगनुओ को आकर्षित करने का काम करते है. पर्यटकों का टोर्च (Flashlight) इस क्रिया में दखल पैदा करता है. परंतु जुगनू सिर्फ आकर्षित करने के अपनी चमक का प्रयोग नहीं करते , वे अपने साथी को ढूढने के लिए कुछ खास रासायनिक पदार्थ भी पैदा करते है. पर्यटक सावधानी न बरते तो इससे जुगनुओ के जीवन चक्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है. 

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