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Homeन्यूजरामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी में पड़ने लगी थी दरार, अब दिल्ली-पटना में श्रद्धांजलि कार्यक्रम

रामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी में पड़ने लगी थी दरार, अब दिल्ली-पटना में श्रद्धांजलि कार्यक्रम

Ram Vilas Paswan
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लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) की आज पहली पुण्यतिथि है. पहली पुण्यतिथि पर जहां रामविलास पासवान के बेटे और जमुई से सांसद चिराग पासवान ने दिल्ली में तो वहीं उनके भाई पशुपति पारस ने पटना में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया है.

पशुपति पारस ने किया ट्वीट

हालांकि पशुपति पारस (Pashupati Paras) ने ट्वीट कर ये भी जानकारी दी है कि पीएम मोदी और उपराष्ट्रपति ने रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर उन्हें पत्र भेजा है. वहीं पशुपति पारस ने रामविलास पासवान को ट्वीट कर श्रद्धांजलि भी दी है. बता दें कि 8 अक्टूबर 2020 को रामविलास पासवान का निधन हो गया था.

चाचा-भतीजे की लड़ाई में ‘बंगला’ जब्त

दिल्ली और पटना दोनों जगहों पर हजारों लोगों के जुटने की संभावना है. इस कार्यक्रम को भी शक्ति प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है. गौरतलब है कि रामविलास पासवान के निधन के बाद से ही पार्टी में दरार पड़ने लगी थी और अभी कुछ दिन पहले ही चाचा-भतीजे की लड़ाई में चुनाव चिन्ह बंगला भी जब्त हो गया.  

पासवान के निधन के बाद से ही लोजपा (LJP) में फूट

दरअसल रामविलास पासवान के निधन के बाद ही लोजपा दो हिस्सों में बंट गई. चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति पारस अब दोनों खुद को पार्टी का अध्यक्ष बता रहे हैं. चुनाव आयोग ने कुछ दिन पहले लोजपा के चुनाव चिन्ह पर रोक लगा दी है और चिराग और पारस को अलग-अलग पार्टियों के साथ अलग-अलग चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं. चिराग पासवान अब लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष हैं और पशुपति पारस राष्ट्रवादी लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष हैं.

Ram Vilas Paswan

Image Courtesy: Google.com

ये भी पढ़ें: LJP Symbol Freeze: चाचा-भतीजे की लड़ाई में ‘बंगला’ फ्रीज, चुनाव आयोग ने जारी किया आदेश

केन्द्रीय मंत्री हैं पशुपति पारस

पार्टी में विवाद का मामला जब लोकसभा में मामला उठा तो स्पीकर ने पारस गुट की मांग को मंजूरी दे दी. उसके बाद पशुपति पारस को मोदी कैबिनेट में भी शामिल कर लिया गया. हालांकि तब भी उधर चिराग पासवान का गुट खुद को असली एलजेपी बताता रहा. अब ये साफ हो गया है कि अब पार्टी के चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल दोनों में से कोई नहीं कर पाएगा.

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