Ott India News Logo
Recent Posts
Connect with:
Sunday / September 25.
Homeनेचर एंड वाइल्ड लाइफराजस्थान के जैसलमेर से जुरासिक काल की हाइबोडॉन्ट शार्क की नई प्रजातियों की खोज

राजस्थान के जैसलमेर से जुरासिक काल की हाइबोडॉन्ट शार्क की नई प्रजातियों की खोज

Hybodont sharks
Share Now

PIB Delhi:राजस्थान के जैसलमेर से जुरासिक युग की मछली खोज निकाली है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह  मछली जुरासिक युग की थी. जो (Hybodont sharks) हाईबोडॉन्ट शार्क नाम की मछली थी. 6.5 करोड साल पूर्व यह मछली विलुप्त हो चुकी हैं.  यह खोज के दौरान वैज्ञानिकों को इन शार्कों के दांतों की जानकारी प्राप्त हुई. अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हिस्टोरिकल बायोलॉजी, जर्नल ऑफ पैलियोन्टोलॉजी के अगस्त, 2021 के चौथे अंक में प्रकाशित किया गया है.

Fossils found of Hypsodont sharks

Image of Hybodontiformes order of fish

पश्चिमी क्षेत्र के पेलियोन्टोलॉजी डिवीजन के वरिष्ठ भूविज्ञानी कृष्ण कुमार के अनुसार, क्षेत्र के जुरासिक चट्टानों (लगभग 160 और 168 मिलियन वर्ष पुराने) से पहली बार हाईबोडॉन्ट शार्क की सूचना मिली है. हाईबोडॉन्ट, शार्क का एक विलुप्त समूह, ट्राइसिक और प्रारंभिक जुरासिक युग के दौरान समुद्र और नदी के दोनों वातावरणों में पाए जाने वाली मछलियों का एक प्रमुख समूह था. हालांकि, मध्य जुरासिक से समुद्री वातावरण में (Hybodont sharks) हाईबोडॉन्ट शार्क का पतन शुरू हो गया, जब तक कि उन्होंने दूसरी समुद्री शार्क की तरह थोड़ा बहुत सामंजस्य नहीं बैठा लिया. इसके बावजूद 65 मिलियन वर्ष पहले क्रेटेशियस युग के अंत में हाइबोडॉन्ट अंततः विलुप्त हो गईं.

Fossils found of Hypsodont sharks

Teeth of new species of Hybodont shark of Jurassic age have been reported for the first time from Jaisalmer by a team of officers from the Geological Survey of India

गौरतलब है कि जैसलमेर से खोजे गए नए टूटे हुए दांत अनुसंधान दल द्वारा नामित एक नई प्रजाति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसका नाम स्ट्रोफोडसजैसलमेरेंसिस है. भारतीय उपमहाद्वीप से पहली बार जीनस स्ट्रोफोडस की पहचान की गई है और यह एशिया से केवल तीसरा ऐसा मामला है. इसके पहले जापान और थाईलैंड में ऐसी प्रजाति पाई गई थी. नई प्रजातियों को हाल ही में शार्क रेफरेंस डॉट कॉम में शामिल किया गया है, जो एक अंतरराष्ट्रीय मंच है. जिसे इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन), स्पीशीज सर्वाइवल कमीशन (एसएससी) और जर्मनी के सहयोग से संचालित किया जाता है.

यहाँ भी पढ़ें : स्तनधारी जो लगता है सरीसृप, पर है THE MIRACLE MAMMAL

यह खोज राजस्थान के जैसलमेर क्षेत्र में जुरासिक वर्टीब्रेट जीवाश्मों के अध्ययन में एक मील का पत्थर है. और यह वर्टीब्रेट जीवाश्मों के क्षेत्र में आगे के शोध के लिए एक नया दरवाजा खोलती है.

यहाँ भी पढ़ें : प्रवासी पक्षियों की वर्तमान स्थिति, जाने क्यों कम हो रही है पक्षियों की संख्या

अधिक रोचक जानकारी के लिए डाउनलोड करें:- OTT INDIA App

No comments

leave a comment