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Gandhi Jayanti 2021: चंपारण में नहीं बल्कि गांधीजी ने पहली बार यहां किया था सत्याग्रह का प्रयोग

Gandhi Jayanti 2021
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पूरा देश आज महात्मा गांधी की 152वीं जयंती (Gandhi Jayanti 2021) मना रहा है. 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे गांधीजी ने सत्याग्रह और अहिंसा के दम पर बिना खड़ग, बिना ढाल देश को आजादी दिला दी. देश की आजादी में गांधीजी का इतना अहम योगदान रहा है कि उन्हें हम राष्ट्रपिता के नाम से जानते हैं.

उनके सत्याग्रह (Satyagraha) की ताकत ये थी कि एक धोती पहने और हाथ में लाठी लिए गांधी से हथियारबंद अंग्रेज भी डर जाते थे. ये डर किस कदर था इस बारे में भी बताएंगे लेकिन पहले जानिए कि आखिर गांधीजी ने पहली बार सत्याग्रह कहां किया, क्या चंपारण सत्याग्रह (Champaran Satyagraha) को जिसे लोग गांधीजी का पहला सत्याग्रह (Satyagraha) कहते हैं क्या वो ऐतिहासिक तौर पर सही है.

Gandhi Jayanti 2021

Image Courtesy: Google.com

 

हिंदुस्तान में पहली बार चंपारण में किया था सत्याग्रह 

अगर इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो चंपारण सत्याग्रह जो साल 1917 में बिहार के चंपारण में हुआ था, वह गांधी जी का भारत में पहला सत्याग्रह था. अब चूंकि महात्मा गांधीजी साल 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे, इसलिए गुलाम हिंदुस्तान में उन्होंने पहली बार सत्याग्रह का इस्तेमाल चंपारण में ही किया था, लेकिन इस बात से ये स्पष्ट नहीं होता कि अहिंसा के पुजारी गांधीजी (Gandhi Jayanti 2021) के जीवन का ये पहला सत्याग्रह था.

Gandhi Jayanti 2021

Image Courtesy: Google.com

दक्षिण अफ्रीका में किया था पहला सत्याग्रह 

तो सवाल उठता है कि आखिर उनका पहला सत्याग्रह कौन सा था. इसके लिए आपको गांधी जी की जीवन यात्रा के बारे में समझना होगा. कहते हैं कि बैरिस्टर बनने के बाद जब महात्मा गांधी भारत लौटे तो अब्दुल्ला नाम के व्यापारी के प्रस्ताव पर साल 1893 में महात्मा गांधी वकालत करने दक्षिण अफ्रीका चले गए. वहां उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा था, ये कहानी आपने भी पढ़ी होगी. इसी भेदभाव को लेकर साल 1894 में ही गांधी जी ने अहिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिए थे.

Gandhi Jayanti 2021

Image Courtesy: Google.com

गांधीजी ने की थी फिनिक्स फार्म की स्थापना 

दक्षिण अफ्रीका के डरबन में गांधी जी ने फिनिक्स फार्म की स्थापना कर दी. जहां से 1906 में सत्याग्रह की शुरुआत हुई, ऐसा कहा जा सकता है. क्योंकि यहां लोगों को अहिंसक सत्याग्रह (South Africa Satyagraha) के लिए प्रशिक्षित किया गया. इसके बाद तो दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी ने सत्याग्रह का भरपूर इस्तेमाल किया और लोगों की मदद की. कहते हैं कि गांधीजी गोपाल कृष्ण गोखले (Gopal Krishna Gokhale) को अपना राजनीतिक गुरू मानते थे.

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उनकी सलाह पर उन्होंने रस्किन और लियो टॉलस्टाय की किताब पढ़ी. जिसके बाद उन्होंने रस्किन से भूख हड़ताल और लियो टॉलस्टाय से उन्होंने अहिंसक आंदोलन, सत्याग्रह (Satyagraha) की प्रेरणा ली थी.    

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