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पुण्यतिथि विशेष: 62 साल बाद प्रवाहित हुईं थीं बापू की अस्थियां, पहले भी गोडसे ने दो बार की थी मारने की कोशिश

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Gandhiji Death Anniversary: 30 जनवरी का दिन हर उस हिंदुस्तानी के लिए उस महान आत्मा को याद करने का दिन है जिन्होंने अहिंसा के दम पर आजादी का वह मुकाम हासिल किया जिसके रास्ते कांटे भरे रहे. हर स्वतंत्रता सेनानी(Freedom Fighter) ने आजादी के आंदोलन में अपना अमूल्य योगदान दिया लेकिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस(Netaji) जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी से जब गांधीजी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया तो बापू पूरे मुल्क में राष्ट्रपिता(Father Of The Nation) के नाम से मशहूर हो गए.

2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे महात्मा गांधी(Mahatma Gandhi) के जीवन के कई ऐसे पहलू रहे हैं, जिनके बारे में चर्चा काफी कम होती है. एक ऐसा ही पहलू उनकी हत्या से जुड़ा है. हम सब जानते हैं कि 30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाउस में नाथूराम गोडसे(Nathuram Godse) ने गांधीजी की गोली मारकर हत्या कर दी, लेकिन इस बात का जिक्र कम होता है कि उससे पहले भी गोडसे ने बापू को मारने की कोशिश की थी.

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Image Courtesy: Google.om

दस दिन पहले फेंका गया था बम

यहां तक कि हमले से दस दिन पहले यानि 20 जनवरी 1948 को भी गांधीजी को निशाना बनाकर बिड़ला हाउस में बम फेंका गया था. मदनलाल पाहवा नाम के पंजाबी शरणार्थी ने गांधी(Gandhi) को निशाना बनाकर बम फेंका लेकिन गांधीजी बच गए और बम दीवार पर जा लगा, जिससे दीवार के दो टुकड़े हो गए. इस हमले के पीछे की वजह से गांधीजी का वह आमरण अनशन था, जो पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये भुगतान के लिए वह कर रहे थे.

बिड़ला हाउस में ऐसी थी सुरक्षा

कहते हैं कि बिड़ला हाउस(Birla House) के मुख्य गेट पर सुरक्षा के लिए एक हेड कॉन्स्टेबल और चार कॉन्स्टेबल तैनात रहते थे. गांधीजी की प्रार्थना सभा में सादे कपड़ों में तैनात पुलिस हर संदिग्ध पर नजर रखती थी, हालांकि गांधीजी को ये पसंद नहीं था. मौत के बारे में उनका ख्याल था कि जिंदगी ईश्वर के हाथ में, अगर मरना हुआ तो कोई नहीं बचा सकता.

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Image Courtesy: Google.om

पहले भी की थी मारने की कोशिश

ऐसे महान ख्याल वाले महात्मा को मारने की कोशिश गोडसे(Godse) ने कोई पहली बार नहीं की थी. इतिहास में इस बात का जिक्र मिलता है कि मई 1934 और सितंबर 1944 में भी गोडसे ने गांधीजी को मारने की कोशिश की थी, लेकिन तब वह सफल नहीं हो सका. जब प्रार्थना सभा में गांधीजी मनु और आभा के कंधों पर हाथ रखकर जा रहे थे तो इसी दौरान सामने से नाथूराम गोडसे ने आकर पहले हाथ जोड़े और फिर एक के बाद एक गोलियां दाग दी. अहिंसा के पुजारी के साथ हुई हिंसा से देश ही नहीं बल्कि पुरी दुनिया की आंखें नम हो गईं.  

ये भी पढ़ें: Gandhi Jayanti 2021: चंपारण में नहीं बल्कि गांधीजी ने पहली बार यहां किया था सत्याग्रह का प्रयोग

62 साल बाद प्रवाहित हुई अस्थियां

यूं तो गांधीजी(Gandhiji) की हत्या के बाद 12 फरवरी 1948 को प्रयागराज में अस्थियां प्रवाहित की गईं लेकिन जिस दक्षिण अफ्रीका से गांधीजी ने अपने अहिंसा और सत्याग्रह के प्रयोग की शुरुआत की वहां उनकी अस्थियां 62 साल बाद प्रवाहित की गईं. कहते हैं कि गांधीजी के एक परिवारिक मित्र ने उनकी अस्थियां करीब 62 साल तक गोपनीय रखी और साल 2010 में साउथ अफ्रीका(South Africa) के डरबन के समुद्र में गांधीजी के अस्थियों के अवशेष प्रवाहित किए गए.

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