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गुजरात में आज से शुरू हो रहा है ‘नया साल’, जानें ‘बेस्तु वर्ष’ की खास बातें

Gujarati New Year
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गुजरात में हर वर्ष दिपावली के अगले दिन नव वर्ष का त्योहार मनाया जाता है. नव वर्ष के दिन लोग अपने रीश्तेदारों और दोस्तो को उनके घर मिलने जाते है. साथ ही दिपावली और नए साल की शुभकामनाएं देते है. इस दिन पर ही गोवर्धन पूजा का उत्सव भी मनाया जाता है. हिन्दु केलेंडर के हिसाब से देखे तो यह दिन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपाद को आता है. इस दिन को गुजरात में लोग ‘बेस्तु वर्ष’ कहते हैं. यह दिन काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है.

कैसे मनाया जाता है बेस्तु वर्ष

गुजराती नव वर्ष के दिन व्यापारी और ट्रेडर्स अपने नए वित्तीय खाते शुरू करते हैं. नई खाता बुक शुरू करते हैं और पुराने को अलविदा कहते हैं. अनुष्ठान के दौरान, खाता पुस्तकों की शुरुआत में एक स्वस्तिक बनाया जाता है, फिर उस पर शुभ-लाभ लिखा जाता है. ऐसा माना जाता है कि यह पूरे साल व्यापार में भाग्य और लाभ लाता है.

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गुजराती संस्कृति में इसे चोपड़ा कहते हैं. चोपड़ा पूजन देवी लक्ष्मी को समर्पित है. यह लोकप्रिय रूप से माना जाता है कि शुद्ध भक्ति और इरादों के साथ उनकी पूजा करने से नए साल को और अधिक समृद्ध, लाभदायक और शांतिपूर्ण बनाने में मदद मिलती हैं.

गुजराती बेस्तु वर्ष पर प्रार्थना करने और पूजा करने के लिए कोई विशेष समय या तिथि नहीं है. यह गोवर्धन पूजा के साथ मेल खाता है, इसलिए पूरे दिन को शुभ माना जाता है.

क्या है पौराणिक कथा

बेस्तु वर्ष और गोवर्धन पूजा का पर्व एक ही दिन आता है. किंवदंतियों के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने गोकुल के लोगों को भगवान इंद्र को ज्यादा मात्रा में प्रसाद नहीं देने के लिए राजी किया था. उन्होंने लोगों को, जो ज्यादातर किसान और चरवाहे थे, सिखाया कि उनका सच्चा ‘धर्म’ पहाड़ियों और मवेशियों के प्रति था जो उन्हें आपूर्ति और संसाधन देते थे. इसके बाद लोगों ने गोवर्धन पहाड़ी और गायों की पूजा करनी शुरू कर दी.

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भगवान इंद्र ने इस बात को नहीं समझा और लोगों पर अपना क्रोध प्रकट किया. उन्होंने गोकुल में लगातार बारिश की जिस वजह से पानी भर गया जो सात दिन और सात रातों तक जारी रहा. इसके बाद, कृष्ण ने लोगों और मवेशियों को आश्रय और सुरक्षा प्रदान करने के लिए अपनी छोटी उंगली से गोवर्धन पर्वत को उठा लिया. तब इंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने माफी मांगी. माना जाता है कि गोवर्धन पूजा करने की परंपरा जारी रही और आज भी मनाई जाती है. और इसी के साथ गुजराती लोग नव वर्ष की खुशी भी मनाते है.

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