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Thursday / September 29.
Homeकहानियांआइए चलते हैं, पंचतंत्र की कहानियों के उस दौर में!

आइए चलते हैं, पंचतंत्र की कहानियों के उस दौर में!

Billi ke gale mein Ghanti
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हम पंचतंत्र की कहानियाँ सुनकर ही बड़े हुए हैं, और कई कहानियों से हमने सीख भी ली है। पंचतंत्र (Panchatantra) की कहानी में आज की कहानी है- आखिर क्यूँ बांधी गई बिल्ली के गले में घंटी? 

बड़े से घर में रहा करते थे सैंकड़ों चूहे:- 

एक बहोत बड़े घर में कई सारे चूहे मिलकर रहते थे। सभी बिंदास अपने घर में घूमते रहते थे और हंसी-खुशी अपना पेट भर लिया करते थे। चूहों की लाईफ आराम से कट रही थी। अचानक एक दिन भारी बारिश हुई और सभी चूहे काफी खुश थे। लेकिन एक बिल्ली बारिश से खुद को बचते बचाते चूहों के घर में घुस गई। बिल्ली कई दिनों तक छुपकर रह रही थी। इस बात की भनक चूहों को नहीं लगी। 

billi ki kahani

Image Credit: Google Image

चूहों की शांति में पड़ा भंग:- 

बिल्ली के आजाने से और चूहों को इस बात की जानकारी मिलने से उनकी शांति भंग होती दिखाई दे रही थी। क्यूंकि चूहों को पता था कि, हम सब तो मिलजुलकर खाना खा लेते हैं। लेकिन बिल्ली तो हमें ही अपना शिकार बनाएगी? यह सोचकर उन्हें 2,3 दिनों तक नींद नहीं आई। बिल्ली को देखते ही सारे चूहे अपने अपने बिल में छुप जाते थे। दूसरी ओर बिल्ली मन ही मन बहोत खुश हो गई कि उसको तो अब रोज दावत मिलेगी। इतने सारे चूहे हैं, जिनको एक एक करके खाऊँगी और मेरा तो (बिल्ली) का महीना गुजर जाएगा। और उस घर पर धीरे धीरे बिल्ली का आतंक बढ़ गया था। 

बिल्ली ने ढाया चूहों पर आतंक:- 

 बिल्ली की हरकतों से सारे चूहे परेशान हो चुके थे। क्यूंकि बिल्ली ने एक एक कर चूहों के दोस्तों को खाना शुरू कर दिया था। ऐसे वक्त में चूहों को अपने बच्चों की चिंता सताने लगी। क्यूंकि जब भी बिल्ली को भूख लगती तो वह अंधेरे में छुप जाया करती थी और जैसे ही चूहे निकलते उन पर झपट्टा मारकर उन्हें खा जाया करती थी। ऐसा रोज होने लगा। धीरे-धीरे चूहों की संख्या कम होने लगी थी। और चूहों में दहशत फैल गई थी।

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billi ki kahani

Image Credit: Google Image

समस्या का हल निकालने के लिए चूहों ने एक सभा बुलाई:- 

चूहों में दहशत अधिक फैलने से समस्या का हल निकालने के लिए चूहों ने एक सभा बुलाई। सभा में सभी चूहे मौजूद थे। सभी ने एक एक कर कई सारे सुझाव दिए, ताकि बिल्ली के आतंक को रोका जा सके और चूहों का परिवार उसका शिकार न बने। लेकिन, किसी का भी सुझाव ऐसा नहीं था, जिससे बिल्ली का आंतक रोका जा सके। सभी खामोश होकर बैठ गए तभी अचानक से एक बूढ़े चूहे ने सुझाव दिया। 

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सुझाव यह था कि,  बिल्ली से बचने का एक ही उपाय है घंटी। लेकिन उसके लिए धागे की और एकबड़ी घंटी की जरूरत पड़ेगी। बूढ़े चूहे ने बताया कि इस घंटी को हम बिल्ली के गले में बांध देंगे और जब वह आएगी, तो घंटी बजने की आवाज सुनाई देगी। और हमें खतरे की घंटी सुनाई दे जाएगी। यह सुनते ही हम सभी भाग कर अपने बिल में छिप जाएंगे। इस तरह से हम बिल्ली का शिकार होने से बच जाएंगें। यह सुनते ही सभी चूहे खुशी से झूमने लगे।

अब प्रश्न यह था कि बिल्ली के गले में घंटी बंधेगा कौन? 

सबने खुशी से नाचना शुरू कर दिया, नाचने कूदने लगे उसी समय एक बुद्धिमान चूहा उठकर बोला सब शांत हो जो इतना खुश होने की जरूरत नहीं है। फिलहाल प्रश्न यह है कि बिल्ली के गले में घंटी बाँधेंगें कैसे? इसलिए जब तक बिल्ली के गले में घंटी नहीं बंध जाती हम सुरक्षित नहीं है। सभी चूहे एक दूसरे की तरफ देखने लगे। और सभा में सन्नाटा छा गया था। सभी चूहे निराश हो गए। इसी बीच बिल्ले के आने की आहट पाते ही सभी चूहे भागकर अपने-अपने बिल में जाकर छिप गए। 

कहानी से सीख : पंचतंत्र (Panchatantra) की इस कहानी का मर्म यह है कि किसी भी समस्या का निवारण मिल जाने तक ही बात सीमित नहीं होती है। बल्कि  योजना को लागू करने के बारे में भी सोचना अनिवार्य है। इलसिए हमेंशा कमियाबी के बाद ही जश्न का मजा लेना चाहिए। 

 ऐसी ही रोचक कहानियाँ आपके समक्ष हम लाते रहेंगे। तब तक के लिए देश और दुनिया की खबरों के लिए बने रहें OTT INDIA पर.. स्वस्थ रहें। 

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