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Heli-Borne Survey से मिलेगी जमीन के अंदर की स्थिति की जानकारी, 5 राज्यों में होगा सर्वे

Heli-Borne Survey
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Heli-Borne Survey: बचपन से हम पढ़ते आ रहे हैं कि जमीन के करीब 71 प्रतिशत हिस्से पर पानी यानि जल है, लेकिन फिर भी देश के कई हिस्सों में पानी की किल्लत है. विज्ञान की भाषा में कहें तो भूजल की किल्लत है. भूजल का मतलब जमीन के अंदर मौजूद पानी से है.

राजस्थान समेत कई ऐसे राज्य हैं जहां बारिश के भरोसे खेती होती है, मतलब बारिश हुई तो पैदावार अच्छी होगी और नहीं हुई तो अच्छी नहीं होगी और हैरानी की बात ये है कि ये शुष्क क्षेत्र में आते हैं, जहां बारिश औसत से कम होती है.

हेली बोर्न सर्वे से मिलेगी जानकारी 

अब चूंकि बारिश कम होती है इसलिए जलस्तर भी काफी नीचे चला जाता है. कई जगहों पर जलस्तर इतना नीचे चला जाता है कि वहां पानी की किल्लत होने लगती है. ऐसे में जल संरक्षण भी एक चुनौतीपूर्ण काम हो जाता है. जिसे देखते हुए अब जल संरक्षण के उद्देश्य से हेली बोर्न सर्वे (Heli-Borne Survey) शुरू किया जा रहा है.

गिरता जा रहा है भूगर्भ का जलस्तर 

केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आज जोधपुर में शुष्क क्षेत्र में भूजल प्रबंधन के लिए होने वाले हेली-बोर्न सर्वेक्षण का उद्घाटन किया. इस दौरान केन्द्रीय मंत्री  ने कहा कि एक बैठक में मैंने अपने सभी सांसद साथियों से पूछा कि वाटर रिजर्व वायर कहां है. सबने अलग-अलग राय दी लेकिन हमने कहा कि देश का सबसे बड़ा रिजर्व वयर हमारी धरती माता है. लगातार जिस तरह से हम जमीन से पानी निकाल रहे हैं, दुनियाभर में जितना पानी निकाला जाता है उसका 25 प्रतिशत पानी हम निकालते हैं, इसी वजह से भूगर्भ जल स्त्रोत नीचे जा रहे हैं. हमारे भूगर्भ का जलस्तर गिरता जा रहा है.

Heli-Borne Survey

Image Courtesy: Canva.com

‘समाज में भी अब इस पर लोग चिंतन कर रहे हैं’ 

अब हमें इस पर प्राथमिकता से काम करना है कि जमीन में वापस पानी कैसे भर सकते हैं. पीएम मोदी के नेतृत्व में इस पर गंभीरता से काम कर रहे हैं. समाज में लोग आज जल के विषय पर चिंतन करने लगे हैं, कई राज्यों की सरकारें भी इसे लेकर काम कर रही है. 

ऐसे होगा हेली बोर्न सर्वे 

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि जहां ज्यादा चुनौतियां हैं, वहां भारत सरकार के अधिकारियों को भेजा जाए. 2020 में ग्राउंड में कोरोना की वजह से काम नहीं कर पाए. इस बार हमने 700 जिलों में इस कार्यक्रम को किया. वर्तमान में जितनी बड़ी चुनौती है, उसे देखते हुए हमें और मैपिंग की जरूरत है. हमने तय किया कि हेली बॉर्न (Heli-Borne Survey) तकनीक का इस्तेमाल करेंगे. हेलीकॉप्टर में कैमरे लगे हैं. एक बार जब हेलीकॉप्टर उड़ान भरेगा तो जमीन के 500 मीटर गहराई में क्या स्थिति है उसका भी सर्वे (Heli-Borne Survey) हो जाएगा. जमीन के ऊपर जो स्थितियां हैं, उसकी भी एक मैपिंग हो जाएगी. फिर ये पता चल जाएगा कि जल संरक्षण कैसे हो सकता है. जमीन के अंदर पानी कैसे जा सकता है, ये जानने की जरूरत है.  

Heli-Borne Survey

Image Courtesy: Canva.com

ये भी पढ़ें: पीएम मोदी ने Jal Jeevan Mission App किया लॉन्च, पानी को प्रसाद की तरह इस्तेमाल करने की सलाह

इन पांच राज्यों में होगा हेली बोर्न सर्वे 

बता दें कि राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के 3.88 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करने वाले हिस्से का हेली बोर्न भू-भौतिकीय सर्वेक्षण (Heli-Borne Survey) करवाया जाएगा. इसके लिए केन्द्रीय भूजल बोर्ड, जल शक्ति मंत्रालय और सीएसआईआर-एनजीआरआई के बीच समझौता हुआ है.

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