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Homeस्पोर्ट्सये हैं पैरालंपिक के ‘गोल्डन खिलाड़ी’, जानिए अब तक हिन्दुस्तान ने जीते कितने पदक, क्या रहा इतिहास?

ये हैं पैरालंपिक के ‘गोल्डन खिलाड़ी’, जानिए अब तक हिन्दुस्तान ने जीते कितने पदक, क्या रहा इतिहास?

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टोक्यो पैरालंपिक गेम्स की शुरुआत 24 अगस्त से होने वाली है. भारत की तरफ से इस बार कुल 54 एथलीट टोक्यो पैरालंपिक में हिस्सा ले रहे हैं जो भारत का निजी रिकॉर्ड भी होगा. ये खिलाड़ी तीरंदाजी, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, पैरा कैनोइंग, पावरलिफ्टिंग, स्विमिंग, ताइक्वांडो, निशानेबाजी और एथलेटिक्स जैसे खेलों में अपना दमखम दिखाएंगे.

पैरालंपिक में भारत ने जीते अब तक 12 पदक

पैरालंपिक खेलों (Paralympics Games) में भारत ने अभी तक कुल 12 पदक जीते हैं, जिसमें चार गोल्ड, चार सिल्वर और चार ब्रॉन्ज पदक शामिल हैं.  दीपा मलिक एकमात्र महिला खिलाड़ी हैं जिन्होनें भारत के लिए मेडल जीता है. जिनमें से देवेन्द्र झाझरिया ने दो गोल्ड और मरियप्पन थंगावेलु ने एक गोल्ड और मुरलीकांत पेटकर ने एक गोल्ड जीता है. बता दें कि पैरालंपिक खेलों कि शुरुआत 1960 में हुई थी,लेकिन भारत ने 1960 और 1964 के आयोजन में हिस्सा नहीं लिया था. पहली बार भारत ने 1968 के पैरालंपिक में हिस्सा लिया, जो इजरायल के तेल अवीव में हुआ था, हालांकि इसमें भारत को खाली हाथ लौटना पड़ा.

ये भी पढ़ें: पैरालंपिक में भारत की सबसे बड़ी टीम शामिल, महिला निशानेबाज भी लेंगी हिस्सा

स्वर्ण पदक से पैरालंपिक में खोला खाता

भारत ने अपना पहला पदक 1972 में जर्मनी के हीडलबर्ग गेम्स में जीता था. पैरा-तैराक मुरलीकांत पेटकर ने 50 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी में स्वर्ण पदक हासिल करते हुए 37.331 सेकंड का विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था. बड़ी बात ये रही कि  आयोजन में भाग लेने वाले 42 देशों की तालिका में भारत एक स्वर्ण पदक के साथ 24वें स्थान पर रहा.

12 साल बाद दोबारा लिया हिस्सा

हालांकि इसके बाद 1976 और 1980 के गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने हिस्सा नहीं लिया, लेकिन 12 साल बाद साल 1984 के पैरालंपिक गेम्स में शानदार वापसी करते हुए भारत ने चार पदक जीते, इस पैरालंपिक (Paralympics Games) की खास बात ये रही कि एक इकलौते खिलाड़ी जोगिंदर सिंह बेदी ने तीन पदक जीते, जिसमें एक सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल शामिल था.

32 साल बाद भारत ने जीता स्वर्ण

1984 में अपने सर्वाधिक पदक जीतने के बाद भारतीय प्रतियोगियों ने 1988 से 2000 तक पोडियम में स्थान पाने के लिए संघर्ष किया.  2004 के एथेंस गेम्स  में भारत के लिए पदकों का सूखा खत्म हुआ और भारत ने यहां एक स्वर्ण पदक जीता.

रियो पैरालंपिक में जीते चार पदक

लेकिन 2008 में बीजिंग से भारत को खाली हाथ लौटना पड़ा. साल 2012 और 2016 के पैरालंपिक खेलों में भारत ने एक बार फिर शानदार वापसी की. 2012 में ऊंची कूद F42 श्रेणी में एच एन गिरिशा ने भारत के लिए रजत पदक जीता वहीं 2016 के रियो गेम्स में चार पदक के साथ भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. भारत ने यहां दो गोल्ड, एक रजत और एक कांस्य जीता.

मरियप्पन थंगावेलु होंगे ध्वजवाहक

भारत ने टोक्यो पैरालिंपिक 2020 (Tokyo Paralympics Games) में 20 से अधिक बर्थ पहले से ही 14 श्रेणियों में तीरंदाजी, एथलेटिक्स और निशानेबाजी में सुरक्षित कर रखी है. विशेष रूप से हरविंदर सिंह और विवेक चिकारा ने पैरालंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई करने वाले देश के पहले पुरुष तीरंदाज बनकर इतिहास रच दिया है. 2016 के स्वर्ण पदक मरियप्पन थंगावेलु भी टोक्यो जाने वाली टीम का हिस्सा होंगे और आधिकारिक तौर पर इस बार भारतीय दल के ध्वजवाहक होंगे. उम्मीद की जा रही है की भारत रियो की तरह ही यहां पर भी बेहतर प्रदर्शन करेगा.

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