Ott India News Logo
Recent Posts
Connect with:
Saturday / September 24.
HomeUnknown फैक्ट्सकहानी आजादी की: पढ़ें कैसे तिरंगा बना राष्ट्रीय ध्वज, हर भारतीय को पता होनी चाहिए ये कहानी

कहानी आजादी की: पढ़ें कैसे तिरंगा बना राष्ट्रीय ध्वज, हर भारतीय को पता होनी चाहिए ये कहानी

tri colour
Share Now

तिरंगे को सम्मान से सैल्यूट करने वाले हर भारतीय को ये कहानी जरूर जाननी चाहिए कि आखिर तिरंगा हमारा राष्ट्रीय ध्वज (Indian National Flag) कैसे बन गया. क्या आजादी के पहले से ही तिरंगे को डिजाइन कर लिया गया था या फिर आजादी के बाद तिरंगे को तैयार किया गया. अक्सर जब भी तिरंगे (Tiranga) की बात आती है तो आपके मन में भी देश के लिए प्रेम की भावना जरूर जाग उठती होगी. 19वीं सदी का वो दौर जब देश में बंगाल विभाजन और कांग्रेस के विभाजन का समय चल रहा था तो साल 1906 में स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता ने पहली बार एक ध्वज तैयार किया.

पहला ध्वज

  • तारीख- 7 अगस्त 1906
  • जगह- पारसी बागाना चौक (ग्रीन पार्क) कोलकाता
  • ध्वज- लाल, पीला, हरे रंग की Horizontal पट्टियां

हालांकि कोलकाता में बने इस लाल पीले और हरे रंगे के ध्वज की जगह साल 1907 में एक और ध्वज बनकर सामने आया. जिसे तैयार किया मैडम भिखाजी कामा ने. जिनका आजादी के आंदोलन में अहम योगदान रहा है.

दूसरा ध्वज

  • साल – 1907
  • जगह- पेरिस
  • ध्वज- तीन अलग-अलग रंग के ऊपर सात तारे, एक कमल जबकि नीचे अर्धचंद्र, सितारा और सूर्य

एक दशक बाद तीन रंगों का नहीं बल्कि दो रंगों का एक ध्वज आया. जिसे साल 1917 में डॉ. एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने फहराया. इस झंडे की खास बात ये थी कि इसमें अर्धचंद्र और सितारे भी थे, जिसका मतलब सात ऋषियों से जुड़ा था.

ये भी पढ़ें: 15th August Shayari: जब देश में थी दिवाली,वो झेल रहे थे गोली…पढ़ें स्वतंत्रता दिवस पर शायरी

तीसरा ध्वज 

  • साल- 1917
  • जगह- आंदोलन
  • ध्वज- दो रंग, सात सितारे, एक यूनियन जैक, जबकि एक में सफेद अर्धचंद्र और सितारा

हालांकि चार साल बाद सात ऋषियों वाले इस झंडे की जगह आंध्र प्रदेश का विजयवाड़ा जो पहले बेजवाड़ा हुआ करता था वहां के एक युवक ने झंडा बनाकर गांधीजी को सौंप दिया. इस झंडे की खास बात ये रही कि ये हिन्दू और मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करता था. हालांकि तब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को ये लगा था कि इसमें एक सफेद पट्टी और चलते हुए चरखे की जरूरत है.

चौथा ध्वज

  • साल – 1921
  • जगह- बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा)
  • ध्वज- दो रंग- लाल और हरा

शायद यही वजह रही कि एक दशक बाद जब नया तिरंगा झंडा तैयार हुआ तो उसमें केसरिया, सफेद और हरे रंगे के साथ चलता हुआ चरखा था.

पांचवां ध्वज

  • साल- 1931
  • ध्वज- केसरिया, सफेद, हरा और मध्य में चरखा

लेकिन आजादी मिलने से करीब एक महीने पहले जो तिरंगा झंडा बनकर तैयार हुआ उसे ही आज हम और पूरे हिन्दुस्तान के लोग सैल्यूट करते हैं. जिसमें केसरिया साहस का, सफेद शांति का और हरा हरियाली का प्रतीक है. साथ ही बीच में चरखे की जगह अशोक चक्र बना है. जिसकी 24 तीलियां अलग संदेश देती हैं. 

 

अधिक रोचक जानकारी के लिए डाउनलोड करें:- OTT INDIA App

Android: http://bit.ly/3ajxBk4

IOS: http://apple.co/2ZeQjTt

No comments

leave a comment