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Friday / October 7.
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जानिए क्यूँ माँ कोकिला कहलाती है न्याय की देवी !

Kokila Devi Temple, Uttarakhand
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आज दर्शन करेंगे हिमालय की पावन भूमि पर स्थित मां कोकिला देवी की, पिथौरागढ़ के पाखू नामक क्षेत्र में मौजूद देवी का ये मंदिर ना सिर्फ सिद्धपीठ है बल्कि देवी का ये धाम न्यायालय(Court) भी है। चौंकिये मत। कोकिला कोटगाडी देवी(Kokila Kotgari Devi Temple) को न्याय की देवी के रुप में प्रतिष्ठा प्राप्त है।

जिस किसी को भी कही से जब न्याय की उम्मीद नहीं रह जाती है, तो वह कोटगाडी देवी की शरण में जाकर न्याय की गुहार करता है। यह भी मान्यता है ,कि कोटगाडी देवी उसे अवश्य ही न्याय दिलाती है। जनश्रुति के अनुसार जब सभी देवता कुछ विशेष परिस्थितियों में स्वयं को न्याय देने व फल प्रदान करने में असमर्थ मानते है। तो ऐसी स्थिति में कोकिला कोटगाडी देवी तत्काल न्याय देने को तत्पर रहती है। मंदिर के समीप ही अनेक पावन व सुरभ्य स्थल मौजूद है।

Kokila Devi Temple

पौराणिक कथाएं

इस पौराणिक मंदिर में शक्ति कैसे और कब अवतरित हुई इसकी कोई प्रमाणिक जानकारी नहीं हो पायी है। लेकिन दंत कथाओं में कई भक्त मानते है, कि यह देवी नेपाल से यहां आई है इनके विश्राम स्थल अनेकों स्थानों पर है। जहां नित्य इनकी पूजा होती है यहां कोट का तात्पर्य अदालत से माना जाता है। पीडितों को तत्काल न्याय देने के कारण ही इस देवी को न्याय की देवी माना जाता है। इसी भाव से इनकी पूजा सम्पन कराने की परम्परा है। 

Kaaliya Naag Mandir

एक प्राचीन कथा के अनुसार जब योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण ने बालपन में कालिया नाग का मर्दन किया और उसे जलाशय छोड़ने को कहा। जिसके बाद कालिया नाग व उसकी पत्नियों ने भगवान कृष्ण से क्षमा याचना कर प्रार्थना की। ” हे प्रभु हमें ऐसा सुगम स्थान बताये जहाँ हम पूर्णतः सुरक्षित रह सके”। तब भगवान श्री कृष्ण ने इसी कष्ट के निवारण के लिए कालिया नाग को माता के शरण में भेज अभय प्रदान किया था। कालिया नाग का प्राचीन मंदिर कोटगाडी से थोडी ही दूरी पर पर्वत की चोटी पर स्थित है जिसे स्थानीय भाषा में ’’काली नाग को डान कहते है। बताते है, पर्वत की चोटी पर स्थित इस मंदिर को कभी भी गरुड आर-पार नहीं कर सकते, जिस वजह से भी स्थान की मान्यता और ज्यादा बढ़ जाती है।

यहाँ पढ़ें: जानिए कैसे इस शक्तिपीठ का नाम कुंजापुरी देवी पड़ा !

मंदिर का रहस्य और मान्यताएं

Kokila Devi Temple of Uttarakhand

माँ कोकिला(Maa Kokila) के मंदिर को न्याय के मंदिर के रूप में जाना जाता है। लोग आपसी विवाद, लड़ाई-झगड़े के मामलों में न्यायालय में जाने के बजाय मां के दरबार में ले जाना पसंद करते हैं। मंदिर में सादे कागज में चिट्ठी लिखकर न्याय की गुहार लगाई जाती है। मंदिर में टंगी असंख्य अर्जियां इस बात की गवाही देती हैं। बेहद रमणीक स्थान पर स्थित मां कोकिला के दरबार के चाहने वाले देश, दुनिया में बहुत हैं लोग आते है। उत्तराखंड की पावन धरती में भगवान शंकर सहित ३३ कोटि देवताओं के दर्शन होते हैं।

आदि जगदगुरु शंकराचार्य ने स्वयं को इसी भूमि पर ही पधारकर धन्य मानते हुए कहा कि इस ब्रह्मांड में उत्तराखंड के तीर्थों जैसी अलौकिकता और दिव्यता कहीं नहीं है। इस क्षेत्र में शक्तिपीठों की भरमार है, सभी पावन दिव्य स्थलों में से तत्कालिक फल की सिद्धि देने वाली माता कोकिला देवी मंदिर का अपना दिव्य महात्म्य है।

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