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History of Signature: कहां से शुरु हुए सिग्नेचर, क्या है सिग्नेचर का इतिहास? जानिए सबकुछ

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सिग्नेचर या दस्तखत यानि पूरी पहचान. अब ये आप पर निर्भर करता है कि आप अपने सिग्नेचर कैसे करते हैं. आप अपने सिग्नेचर को सिंपल रखते हैं या उसमें अपनी पूरी क्रिएटिविटी दिखा देते हैं. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि आपके सिग्नेचर आपकी मानसिकता को दिखाते हैं. आप अपने सिग्नेचर को अगर सिंपल रखते हैं तो ये आपकी सहजता को दिखाता है वहीं अगर आप इसमें अपनी क्रिएटिविटी दिखाते हैं तो इससे पता चलता है कि आप कितने क्रिएटिव हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सिग्नेचर की शुरुआत कब से हुई, किसने सिग्नेचर करने की शुरुआत की. नहीं तो चलिए आज हम आपको बताते हैं सिग्नेचर यानि दस्तखत की शुरुआत कहां से हुई और इसके पूरे इतिहास के बारे में.

सिग्नेचर का इतिहास

दरअसल हजारों सालों से सिग्नेचर की परंपरा चली आ रही है और आपको ये जानकर हैरानी होगी ये परंपरा उस समय भी थी जब कागज, कलम और दवात भी नहीं थे. उस समय में लोग पाषाण या पत्थरों पर सिग्नेचर किया करते थे. इतिहास में इसे लेकर इसी तरह की कई बातों का जिक्र है. आज के समय में भी हर जगह बैंक, किसी रिसीट पर साइन करना या अपने डॉक्यूमेंट्स को सेल्फ अटेस्ट करना हो सिग्नेचर का इस्तेमाल किया जाता है. सिग्नेचर से ही हमारी पहचान भी बनती है. लोग हमें हमारे सिग्नेचर से ही पहचान लेते हैं कि ये कौन शख्स है.

कहां से शुरु हुए सिग्नेचर?

कई जगहों पर इस बात का जिक्र है कि सिग्नेचर सबसे पहले 3 हजार ईसा पूर्व शुरु हुए. सुमेरियाई और मिस्र की सभ्यताओं के कई ऐसे शिलालेखों के पिक्चर और पिक्टोग्राफ बताते हैं कि उस समय में भी दस्तखत किए जाते थे. लेकिन उस दौरान ये नाम के रुप में नहीं होते थे बल्कि पिक्चर के तौर पर सिग्नेचर किए जाते थे. सुमेरियाई मिट्टी की प्लेट पर कई ऐसी फोटोज मिली हैं जिन पर सिग्नेचर के रुप में फोटोज उकेरी गई थी. अक्षरों के रुप में उकेरी गई इन फोटोज के गंभीर मायने होते थे.

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अब अगर बात करें दस्तखत के कानून की तो आपको बता दें कि दस्तखत को जरुरी बनाने के लिए साल 1677 में इंग्लैंड की संसद में स्टेट ऑफ फ्रॉड एक्ट पास किया गया जिसमें सिग्नेचर को जरुरी कर दिया गया ताकि जालसाजी और फ्रॉड से बचा जा सके.

लेकिन आजकल सिग्नेचर सिर्फ पेपर पर सीमित नहीं रह गए हैं. बदलते इस दौर के साथ हर एक चीज डिजिटलाइजेशन हो रहा है तो ऐसे में अब सिग्नेचर भी डिजिटल तरीके से किए जाते हैं. तो आपको बता दें कि ई सिग्नेचर की शुरुआत को लेकर साल 2000 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने ई-साइन एक्ट पास किया. जिससे ई-सिग्नेचर टेक्नोलॉजी का मार्ग प्रशस्त कर दिया. आज ये तकनीक पूरी दुनिया में अपनाई जाने लगी है.

 

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