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Homeन्यूजविज्ञान भवन में हिंदी दिवस 2021 का आयोजन, मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृहमंत्री हुए शामिल

विज्ञान भवन में हिंदी दिवस 2021 का आयोजन, मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृहमंत्री हुए शामिल

Hindi Diwas 2021
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Hindi Diwas 2021: देश में हर वर्ष 14 सितंबर की तारीख को हिंद दिवस के रूप मनाया जाता है। दुनिया में सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा में हिंदी का नाम भी शामिल है। हिंदी दिवस 2021 (Hindi Diwas 2021) के अवसर पर मंगलवार को विज्ञान भवन में हिंदी दिवस समारोह और पुरस्कार वितरण का आयोजन किया गया जिसमें गृहमंत्री अमित शाह ने अध्यक्षता की। इस मौके पर हिंदी के बारे में बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि हमारे पीएम अंतराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी बोल सकते हैं तो हमें किस बात पर शर्म होती है?

केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री ने राजभाषा भारती पुस्तिका के 160वें अंक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर केन्द्रीय गृहराज्य मंत्री, नित्यानंद राय, अजय कुमार मिश्रा और निशिथ प्रामाणिक, केन्द्रीय गृह सचिव, राजभाषा विभाग के सचिव और भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री ने कहा कि हमने जब संविधान को स्वीकारा, इसके साथ ही 14 सितंबर 1949 के एक निर्णय को भी स्वीकार किया कि इस देश की राजभाषा हिंदी होगी और लिपि देवनागरी होगी।

अमित शाह ने कहा कि ये जो पुरस्कार होता है, वो कई लोगों को प्रेरणा देता है और राजभाषा को बढावा देने के लिए आगे बढ़ने का हौसला देता है। उन्होंने ग़ैर-हिंदी पुरस्कार विजेताओं को विशेष बधाई देते हुए कहा कि आप जिस प्रदेश से आते हो, उस प्रदेश की भाषा के साथ-साथ राजभाषा को भी उस प्रदेश में पहुँचाने का आपने बहुत अच्छा काम किया है। उन्होंने कहा कि हिंदी का किसी स्थानीय भाषा से कोई मतभेद नहीं है और हिंदी भारत की सभी भाषाओं की सखी है और यह सहअस्तित्व से ही आगे बढ़ सकती है।

अमित शाह ने कहा कि 14 सितंबर हमारे लिए एक मूल्यांकन का दिन होता है कि हमने अपने देश की भाषाओं और राजभाषा के लिए क्या किया और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए क्या किया है, उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए क्या किया है, विशेषकर नई पीढ़ी के दिल में, उनकी बोलचाल में, अपनी स्थानीय भाषाओं को गौरव दिलाने के लिए क्या किया है।

उन्होंने कहा कि आज जब हमने पीछे मुड़कर देखते हैं तो देश में एक समय आया था कि हमें ऐसा लगता था कि शायद भाषा की लड़ाई देश हार जाएगा। शाह ने कहा कि हम ये लड़ाई कभी नहीं हारेंगे, युगों-युगों तक भारत अपनी भाषाओं को संभालकर, संजोकर रखेगा, और हम उन्हें लचीला व लोकोपयोगी भी बनाएंगे।

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