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Homeनेचर एंड वाइल्ड लाइफमधुमक्खियों के विनाश का कारण बन रहे हैं कीटनाशक, मधुमक्खियां है तो इंसान है ?

मधुमक्खियों के विनाश का कारण बन रहे हैं कीटनाशक, मधुमक्खियां है तो इंसान है ?

Honeybee
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दुनिया भर में परागणकों की प्रजातियां लगातार घट रही हैं, जोकि खाद्य सुरक्षा और इको सिस्टम के लिए एक चिंता का विषय है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 75 प्रतिशत फसलें परागणकों पर निर्भर करती हैं. मानवजनित तनावों के चलते मधुमक्खियों (Honeybee) की आबादी पर हानिकारक प्रभाव पड़ रहे हैं.

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वैज्ञानिकों ने मधुमक्खियों (Honeybee) पर मानवों के कारण हो रहे असरों का पता लगाया है. खोज के मुताबिक, कृषि और अन्य जगहों में उपयोग होने वाले कीटनाशकों के संपर्क में आने से मधुमक्खियों की मृत्यु दर में काफी वृद्धि हुई है. शोधकर्ता वैज्ञानिकों मुताबिक कीटनाशकों के खतरों को कम करके आंका गया है. 

पूरी दुनिया में मधुमक्खियां और अन्य परागणकर्ता फसलों के लिए महत्वपूर्ण हैं. दुनिया भर में मधुमक्खियां (Honeybee) और दूसरे कीटों में आ रही गिरावट इंसानी जीवन के लिए अच्छा संकेत नहीं है. इससे खाद्य सुरक्षा और इको सिस्टम पर गहरा प्रभाव पड़ता है.

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नए विश्लेषण ने मधुमक्खी के व्यवहार पर पेस्टिसाइट्स की असर का पता लगाया गया है. जिसमें मधुमक्खी और कुपोषण के बीच प्रभाव को देखा गया. जैसे कि मधुमक्खियों के भोजन के लिए घूमना, उनकी याददाश्त, कॉलोनी प्रजनन और उनका स्वास्थ्य इसके साथ अनेक बीमारियां.

शोधकर्ताओं ने पाया कि इन विभिन्न प्रकार के तनावों के चलते मधुमक्खियों (Honeybee) पर उनका बुरा प्रभाव पड़ा, जिससे उनकी मृत्यु के आसार काफी बढ़ गए. कृषि कार्य के तहत मधुमक्खियों पर कई मानवजनित तनावों का असर पड़ता है. जिसके चलते मधुमक्खियों और उनकी परागण सेवाओं में निरंतर गिरावट आएगी, जिससे मानव और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को नुकसान होगा.

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परागण करने वाले कीड़ों को कृषि से होने वाले खतरों का सामना करना पड़ता है, कीटनाशकों से जंगली फूलों से पराग और रस की कमी भी शामिल है. प्रबंधित मधुमक्खियों के औद्योगिक पैमाने पर उपयोग से परजीवियों और बीमारियों के लिए परागणकों का खतरा भी बढ़ जाता है.

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खेती की जाने वाले वातावरण में मधुमक्खियों का सामना कृषि में उपयोग होने वाले अलग-अलग केमिकल से होता है, जो मधुमक्खियों की आबादी के लिए खतरा पैदा कर सकता है. 2019 में वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि दुनिया भर में सभी कीट प्रजातियों में से लगभग आधी प्रजातियां घट रही हैं और एक तिहाई सदी के अंत तक पूरी तरह से गायब हो सकती हैं. मधुमक्खियों पर पड़ने वाले प्रभाव पर सीधे इंसानी जीवन के साथ भी जुड़ते है. अगर मधुमक्खियां नहीं होगी तो खाना नहीं होगा और खाने के बिना इंसानी जीवन की कल्पना भी मुश्किल है.

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