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यह आसन बनाएगा शरीर में रक्त संचार प्रक्रिया को बेहतर!

Supta vajrasana
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हम अक्सर रोजमर्रा की गतिविधियों को कर काफी थक जाते हैं, और कई सारी शारीरिक तकलीफों का सामना करना पड़ता है। जैसे कि, सिर दर्द, कमर दर्द, कमजोरी महसूस होना। इसलिए दिन भर की थकान को दूर करने का एक आसन है, जिसे करने से हमें स्फूर्ति मिलेगी और हमारा दिन अच्छा व्यतीत होगा। इस आसन का नाम है- सुप्त वज्रासन (Supta Vajrasana)। 

योगासन सीरीज (Yogasana Series) में आज का आसन है-  सुप्त व्रजासन  (Supta Vajrasana)। यह आसन शरीर में रक्तसंचार की प्रक्रिया को बनाए रखने  में सहायक है। आइए जानते हैं सुप्त व्रजासन कैसे किया जाता है? और इस आसन का निरंतर प्रयास करने से कौन से शारीरिक लाभ होते हैं? 

सुप्त व्रजासन क्या है? (What is Sutpa vrajasana) 

सुप्त व्रजासन एक संस्कृत शब्द है। सुप्त का अर्थ है-सोया हुआ। और आसन का मतलब मुद्रा। इस आसन को पीछे की ओर लेटकर किए जाने की वजह से इसे सुप्त व्रजासन कहा जाता है। इस आसन को करने से शरीर में रक्तसंचार की प्रक्रिया नियमित रहती है। और भी कई सारी शारीरिक तकलीफें दूर होती हैं। सुप्त व्रजासन को पीठ के बल लेटकर किया जाता है। इस आसन को सही तरीके से करना अत्यधिक अनिवार्य है। 

Supta vajrasana

Steps of Supta vajrasana

सुप्त व्रजासन करने की विधि कुछ इस प्रकार है:- (How to do Sutpa vrajasana)

सुप्त व्रजासन को करते वक्त कई सारी तकनिकियों को ध्यान में रखकर करना चाहिए। क्यूंकि यह आसन शरीर के लिए अत्यधिक लाभकारी है। आइए जानते हैं आसन करने की प्रक्रिया के बारे में।

यहाँ पढ़ें: योगासन सीरीज: शरीर का संतुलन बनाये रखने में यह आसन है, लाभकारी!

  • इस आसन को खुले और सुरक्षित वातावरण में करना अनिवार्य है। 
  • सर्वप्रथम व्रजासन की स्थिति में बैठ जाएं। 
  • अपने हाँथों और कोहनियों (Elbows) का सहारा लेते हुए धीरे धीरे पीछे की ओर झुकें। 
  • इस प्रकार कोहनियों को जमीन से टीकाने का प्रयास करें। 
  • अब अपने हाँथों को धीरे धीरे फैलाएं। 
  • अब सिर के पीछे की ओर ले जाते हुए, कंधों को जमीन से टिकाएं। 
steps of supta vajrasana

supta vajrasana Image Credit: Google Image

  • अब पीठ के बाल लेटने का प्रयास करें। 
  • अब हाँथों को अपनी थाई पर रखें। 
  • या फिर कंधों के नीचे रखें। 
  • इन सभी प्रक्रियों के दौरान सांस निरंतर लेते रहें। 
  • कुछ देर इस अवस्था में रहने का प्रयास करें। 
  • अब धीरे धीरे प्रारम्भिक अवस्था में आ जाएं। 
  • सुप्त व्रजासन का प्रयास दिन में 4-5 बार करें। 

सुप्त व्रजासन

Sutpa vrajasana को करने से मिलेंगे कई सारे शारीरिक लाभ:-  

सुप्त व्रजासन को नितदिन करने से पेट की कई समस्याएं दूर होती हैं, इसके अलावा पेट की चर्बी को भी कम करने में लाभकारी है। कमर दर्द में भी यह आसन अत्यधिक लाभदायक है। प्रतिदिन योगाभ्यास से कई महत्वपूर्ण शारीरिक लाभ होते हैं। जो कि कुछ इस प्रकार हैं। 

  • सुप्त व्रजासन मासिक धर्म की समस्या के निवारण के लिए सबसे उत्तम आसन माना जाता है। 
  • यह आसन हमारे घुटनों को मजबूत करता है। 
  • पेट से जुड़ी सस्यायें जैसे कि- कब्ज, एसिडिटी, पेट दर्द से भी छुटकारा मिलता है। 
  • यह आसन हमारे शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है। 
  • रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ और सुरक्षित रखने में अत्यधिक लाभदायी है। 
  • महत्वपूर्ण बात तो यह है कि सुप्त व्रजासन अस्थमा जैसी बीमारी पर नियंत्रण लाने में सहायक है। 
  • इस आसन से कमर को अच्छा आकार प्रदान होता है। 
  • इस आसन को करने से जांघों और मांसपेशियों में एक खिचाव बनता है जिससे पैरों को मजबूती मिलती है। 

यहाँ पढ़ें: इन नुस्खों को अपनाएं और शरीर को स्वस्थ बनाएं!

ऐसे लोग इस आसन का प्रयास करने से बचें:- (Precautions of Supta Vajrasana )

  • सुप्त व्रजासन को करने से पहले कई सावधानियाँ हैं जिन्हें ध्यान रखना आवश्यक है। 
  • सबसे पहले पेट में किसी प्रकार की सर्जरी है तो इस आसन को करने से बचें। 
  • घुटने की तकलीफ या सर्जरी है तो इस आसनका प्रयास न करें। 
  • अत्यधिक कमर दर्द में इसके अभ्यास से बचें। 

ध्यान दें: यदि योगाभ्यास के दौरान किसी भी तरह की शारीरिक तकलीफ होती है तो योग विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। 

जुड़े रहें, योग की इस “योगासन सीरीज” में तब तक के लिए पढ़ते रहें देश और दुनिया की खबरें और बने रहें हमारे साथ OTT INDIA पर.. 

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