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योगासन सीरीज: हर्निया से पीड़ितों के लिए यह आसन है, लाभदायी!

Vakrasana steps
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अधिकतर महिलाओं में हर्निया की तकलीफ रहती है। हर्निया से पीड़ित होने की वजह से कई आसन ऐसे हैं, जिन्हें करना मुश्किल हो जाता है। और ऐसे कई आसन भी हैं, जिनका योगाभ्यास हर्निया से पीड़ित लोगों के लिए वर्जित भी हैं। लेकिन आज हम एक ऐसे ही आसन की बात करेंगें। जिसके निरंतर अभ्यास से हर्निया जैसी तकलीफों में सहायक रहेगा। वह आसन है, Vakrasana इसका निरंतर अभ्यास अत्यधिक आवश्यक है। 

योगासन सीरीज (Yogasana Series) में आज का आसन है- वक्रासन (Vakrasana)। यह आसन का प्रयास हर्निया से पीड़ितों के लिए अत्यधिक लाभकारी है। आइए जानते हैं वक्रासन कैसे किया जाता है? और इस आसन का निरंतर प्रयास करने से कौन कौन से शारीरिक लाभ होते हैं? 

वक्रासन क्या है? (What is Vakrasana)

वक्रासन एक संस्कृत शब्द है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है। वक्र+आसन= वक्रासन, जिसमें वक्र का अर्थ है टेढ़ा और आसन का मतलब ध्यान मुद्रा। अर्थात इस आसन का अभ्यास करते वक्त हमारी शारीरिक स्थिति का आकार टेढ़ा दिखाई देता है। इस लिए इस आसन को वक्रासन कहा जाता है।  इस आसन को इंग्लिश में Easy Spinal Twist Pose भी कहा जाता है। आपको बता दें, वक्रासन का प्रतिदिन अभ्यास हर्निया से पीड़ित लोगों के लिए अत्यधिक सहायक है। इस आसन का प्रयास करते वक्त गर्दन सीधी रहती है, लेकिन पूरा शरीरी टेढ़ा रहता है। 

आइए जानते हैं, आसन करने की विधि के बारे में इसका अभ्यास करते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और कौन से शारीरिक लाभ होते हैं? 

Steps of Vakrasana image credit: अच्छी सोच

वक्रासन करने की विधि कुछ इस प्रकार है:- (How to do Vakrasana)

  • सर्वप्रथम वक्रासन का प्रयास स्वच्छ और खुले स्थान में करने का प्रयास करें। 
  • आब अपनी योगामेट पर दोनों पैर सामने की ओर फैलाकर बैठ जाएं। 
  • अपनी कमर को सीधा रखें और नजरों को सामने की तरफ केंद्रित करें। 
  • दोनों हाँथों को बाजू में जमीन से स्पर्श करें। 
  • सबसे पहले घुटनों को मोड़कर बाएं पैर के समांतर रखें। 
  • और दायें हाँथ को अपनी पीठ के पीछे ले जाएं। 
  • अब इस अवस्था को 2-3 मिनट तक बरकरार रखें। 
  • अब अपने बाएं पैर के घुटने को मोड़कर इस आसन को करें।
  • पुन: बाएं हाथ को दाहिने पैर के घुटने से लेकर जमीन पर रखें।
  • अब हल्के से अपनी गर्दन को पीछे की तरफ ले जाएं। 
  • और जितना हो सके पीछे की तरफ देखने का प्रयास करें। 
  • इस तरह प्रतिदिन वक्रासन का प्रयास करें। 

यहाँ पढ़ें: अंगुलियां चटकाने से हो सकते हैं, आपको ये गंभीर रोग!

Vakrasana Image Credit: Stylecraze

वक्रासन करने से होते हैं कई शारीरिक लाभ(Benefits of Vakrasana)

  • वक्रासन के निरंतर प्रयास से लीवर, किडनी स्वस्थ रहते हैं। 
  • जिन लोगों को पित्ताशय में पथरी की समस्या रहती है, उन्हें यह आसन अवश्य करना चाहिए। 
  •  निरंतर प्रयास से कंधों का दर्द दूर होता है। 
  • वक्रासन से दमा (Asthama-अस्थमा), जैसे रोग ठीक हो जाता है । 
  • शरीर की अकड़न और गर्दन की समस्या ठीक होती है।
  • हमारे शरीर का तंत्रिका तंत्र सही होता है । 
  • यह आसन पेट की चर्बी को कम करता है।
  • नितंर योगाभ्यास फेफड़ों को मजबूत बनता है। 
  • सुगर की बीमारी (मधुमेह) में फायदेमंद है। 
  • तनाव से मुक्ति पाने के लिए आसन का प्रयास करें। 
  • उच्च रक्तचाप में है अत्यधिक फायदेमंद। 

ऐसे लोग वक्रासन के अभ्यास दौरान सावधानियां जरूर बरतें या फिर ना आसन का प्रयास ना करें। 

Image Credit:femina.in

वक्रासन अभ्यास दौरान सावधानियाँ जरूर बरतें:

  • Vakrasana का अभ्यास रोज सुबह खाली पेट करें
  • ध्यान रखें, पीछे रखा गया हाथ कोहनी से सीधा रखते हुए मेरुदंड से 6 से 9 इंच के बीच में रखें।
  • यदि आपको पेट में दर्द है तो वक्रासन नहीं करनी चाहिए।
  • गर्दन दर्द होने पर भी इसके प्रयास से बचें।
  • ज़्यदा कमर दर्द के दौरान भी इस आसन का अभ्यास न करें। 

ध्यान दें: यदि योगाभ्यास के दौरान किसी भी तरह की शारीरिक तकलीफ होती है तो योग विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। 

जुड़े रहें, योग की इस “योगासन सीरीज” में तब तक के लिए पढ़ते रहें देश और दुनिया की खबरें और बने रहें हमारे साथ OTT INDIA पर.. 

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