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क्या कलयुग में दर्शन दे सकते हैं भगवान, अगर हां तो आखिर कैसे, पढ़ें क्या कहते हैं पौराणिक शास्त्र

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हिंदू(Hindu) धर्म में हर युग(Yuga) का अपना समय और महत्व होता है. पौराणिक शास्त्रों के मुताबिक अभी कलयुग(Kaliyuga) चल रहा है, जिसके 5 हजार से ज्यादा वर्ष बीत चुके हैं. लेकिन ये सुनकर सोचने की जरूरत नहीं है कि कलयुग खत्म होने वाला है बल्कि ये जानकर चौकिए कि अभी कलयुग करीब 4 लाख वर्ष बाकी है. मतलब अगले चार लाख सालों तक कलयुग ही चलेगा. ऐसे में ये सवाल उठता है कि आखिर कलयुग में ईश्वर(How To See God) को प्राप्त करने का तरीका क्या है, क्या पहले की तरह भगवान(God Darshan) अब भी दर्शन दे सकते हैं.

कलयुग में कैसे संभव है भगवान का दर्शन

इस सवाल का जवाब बिल्कुल हां या न में सीधे तौर पर नहीं है, बल्कि इस सवाल के जवाब को जानने के लिए आपको धर्मग्रंथों का सहारा लेना पड़ेगा. गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि जब-जब धरती पर पाप का बोझ बढ़ता है, तब-तब मैं अवतार लेता हूं. फिर आप कहेंगे कि ये तो अवतार की बात हुई फिर भगवान के दर्शन कैसे संभव हैं.

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Image Courtesy: Google.com

भक्तों को दर्शन देते हैं भक्तवत्सल प्रभु

अगर आपने रामचरितमानस का पाठ किया हो तो आपने पढ़ा होगा-

कलियुग केवल नाम अधारा

सुमिरि, सुमिरि नर उतरहीं पारा

अर्थात कलुयग में केवल भगवान के नाम का सुमिरन यानि उन्हें याद करना ही काफी ही, भगवान के नाम को यादकर ही लोग भवसागर को पार कर जाते हैं, मोक्ष को प्राप्त कर लेते हैं. अगर सच्चे मन से धर्म के रास्ते पर चलते हुए कोई कलियुग में भगवान का सुमिरन करने तो भक्तवत्सल प्रभु उसे जरूर दर्शन देते हैं, चाहे वो दर्शन(God Darshan) किसी रूप में हो.

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चारों युगों में ऐसे होते थे भगवान के दर्शन

चारों युगों के बारे में ये भी कहा जाता है कि सतयुग(Satyuga) में मनुष्य पाप नहीं करता, सभी सत्य के रास्ते पर चलते हैं, वहीं त्रेतायुग(Tretayuga) में सतयुग की तुलना में पाप का घड़ा बढ़ जाता है, वहीं द्वापर(Dwaparyuga) में ये और बढ़ जाता है. जबकि कलयुग आते-आते पाप की घटनाएं इतनी होने लगती हैं कि नाम मात्र के लोग पुण्य करने वाले बच जाते हैं.

ये भी पढ़ें: इस शुभ दिन भगवान भोलेनाथ धरती पर पुण्य आत्मा को देते हैं दर्शन! जाने क्या है वजह?

ये युगों का ऐसा चक्र है कि कलुयग में सिर्फ भगवान का नाम(Bhajan) लेने से ही लोग मोक्ष प्राप्त कर लेते हैं, जंगलों में जाकर तपस्या(Tapasya) करने की बजाय घर बैठे सुमिरन करना भी आपको भगवान के दर्शन करवा सकता है, जबकि बाकी के तीन युगों में मनुष्य को घोर तप करना पड़ता है, तब जाकर कहीं भगवान के दर्शन(Bhagwan Darshan) होते हैं. 

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