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Homeभक्तिबुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है काली चौदस का पर्व

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है काली चौदस का पर्व

Kali Chaudas 2021
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दिवाली का पर्व समग्र भारत देश में धूम-धाम से मनाया जाता है, धनतेरस के दूसरे दिन और दिवाली के एक दिन पहले काली चौदस का पर्व मनाया जाता है। काली चौदस मुख्य रूप से पश्चिमी राज्यों गुजरात, राजस्थान में मनाया जाता है। काली चौदस को नरक चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। काली यानी काली माँ। इस त्योहार के से कई पौराणिक लोककथाओं हैं। आइए जानते हैं काली चौदस (Kali Chaudas) से जुड़ी पौराणिक कथाएं! 

काली चौदस की पौराणिक कथा:-  

लोककथा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने असुर नरकासुर का वध किया था, और अधर्म  पर विजय की प्राप्ति हुई थी। एक और कथा इस प्रकार है रंति देव नाम के एक राजा थे, आदर्शवादी राजा से अनजाने में कुछ पाप हुए जिससे उन्हें श्राप मिला था। उनकी मृत्यु का वक्त निकट आ गया था। राजा की पत्नी चिंतित हो गई उन्होंने राजा की रक्षा के लिए पूरे महल में दिए प्रज्ज्वलित कर दिए और आभूषणों को द्वार पर इकट्ठा कर दिया था। यमदूत ने सर्प का रूप धारण कर महल में प्रवेश कर लिया, लेकिन प्रकाश के तेज से सर्प के नेत्रों के समक्ष अंधकार छा गया, और राजा के प्राण बच गए। 

सर्प ने यमदूत के रूप में राजा को दर्शन दिए उसी क्षण राजा ने अनजाने में हुए पाप के बारे में पूछा। यमदूत ने जवाब देते हुए कहा एक बार तुमने एक ब्राह्मण को अपने द्वार से भूखा जाने दिया था। अनजाने में तुमसे घोर पाप हुआ था। राजा ने यमराज से अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए कुछ वक्त मांगा। यमदूत ने राजा को एक वर्ष का समय दिया। 

kali chaudas festival

Kali chaudas festival, image credit: google  

यहां पढ़ें: साल 2013 में किया गया था पोइचा मंदिर का निर्माण, इन वजहों से भक्तों के बीच है प्रसिद्ध

दूसरे दिन राजा अपनी समस्याओं को लेकर ऋषियों के पास पहुंचें और उन्हें अपनी परेशानियों के बारे में बताकर पापों से मुक्ति पाने का मार्ग मांगा। ऋषि ने कहा आप कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी का व्रत करें और ब्राह्मणों को भोजन करवा कर उनके प्रति हुए अपराधों के लिए क्षमा याचना करें। राजा ने वैसा ही किया। इस प्रकार राजा को पापों से मुक्ति मिली और उन्हें विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ। तभी से काली चौदस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन पूजा और व्रत करने से असुर शक्तियों का नाश होता है और पापों से मुक्ति मिलती है। इन कारणों से काली चौदस को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों में दिपक प्रज्ज्वलित करते हैं और घर को रंगीन लाइटों से जगमगा देते हैं। 

काली चौदस (Kali Chaudas) के दिन माँ काली का आशीर्वाद प्राप्त कर सफलता मिलती है, सत्य की जीत होती है। काली चौदस को रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। राजस्थान में इस दिन सभी लोग प्रात:काल जल्दी उठकर उबटन लगाकर स्नान करते हैं ऐसा माना जाता है शरीर शुद्ध होता है और पापों से मुक्ति मिलती है। 

देखें यह वीडियो: माँ काली की उपासना  कैसे करें ?

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